होम्स: युद्ध के साये में जीता एक शहर

  • 18 फरवरी 2013
सीरिया का होम्स शहर
एक अनुमान के मुताबिक सीरिया में 60 हज़ार मौतों में से एक तिहाई होम्स शहर में हुई हैं.

सीरिया का शहर होम्स में पिछले दो साल से भीषण लड़ाई जारी है. इस दौरान अनुमानित 60 हज़ार मौतों में से एक तिहाई होम्स में हुई.

यहां लड़ाई और मौतों के बारे में अक्सर सुनने को मिलता है लेकिन सोचने वाली बात ये है कि लोग वहां कैसे गुज़ारा कर रहे हैं?

वहां की रोज़मर्रा की ज़िंदगी कैसी है? और विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाकों में रहने वालों की ज़िंदगी उन लोगों से कैसे फर्क है जो सरकार के कब्ज़े वाले इलाकों में रहते हैं?

होम्स में लगभग हर शाम गोलाबारी होती है. शहर लगभग खाली हो चुका है और इसका काफ़ी हिस्सा उजड़ चुका है. लेकिन अगर आप सरकार के कब्ज़े वाले इलाके में रहते हैं, तो ज़िंदगी लगभग सामान्य है.

मुंह खोलने पर गिरफ़्तारी का डर

अल-गाउटा एक उच्चवर्गीय इलाका है. यहां बच्चों का प्लेग्राउंड एक नए बाज़ार का हिस्सा है, इसे स्थानीय निवासियों ने बनवाया है और इसके लिए सरकार ने मदद दी है.

इस मार्किट के प्रभारी जाहेर अल शबान का कहना है, "हमारे यहां आस-पास के इलाकों से कई लोग आते थे जो काम पर नहीं जा सकते. वे यहां आकर सड़कों पर चीज़ें बेचने लगे. तो समुदाय के बुज़ुर्गों ने सुझाव दिया कि यहां खाली जगह पर मार्किट बनाया जाए फुटपाथ पर से दुकानें हटाई जाएं."

होम्स में लोग अपनी कहानियां तो सुनाना चाहते हैं लेकिन उन्हें ये भी डर है कि अगर वो अपनी बात कहेंगे तो उन्हें सुरक्षा बल गिरफ़्तार कर लेंगे.

पास के विपक्ष के कब्ज़े वाले इलाके से इस बाज़ार में फल बेचने आने वाला एक व्यक्ति कहता है कि उनके इलाके में अक्सर गोलाबारी होती है.

वो बताता है, "इससे पहले मैं एक अच्छी-खासी तनख्वाह वाली नौकरी करता था लेकिन एक साल पहले मुझे जबरन अपने घर से निकाल दिया गया. अब मैं एक फ्लैट में अपने परिवार के 20 लोगों के साथ रह रहा हूं."

सुविधाओं की कमी

होम्स के कई सुन्नी इलाकों में यही हाल है. सरकार के मुताबिक इन इलाकों में 'आतंकवादी' पनपते हैं.

होम्स, सीरिया
होम्स के इन-शात इलाके में स्थानीय स्कूल में कई परिवारों ने शरण ले रखी है इसलिए बच्चों के पढ़ने की कोई जगह नहीं बची है.

शहर के इन-शात इलाके में बच्चे अब सड़कों पर खेलते दिखते हैं क्योंकि स्थानीय स्कूल में लगभग 75 परिवारों ने शरण ले रखी है. लोगों को बारिश से बचाने के लिए कमरों की छतें प्लास्टिक से ढंकी गई हैं.

स्कूल में शरण लेने वालों की अलग-अलग कहानियां हैं. सभी यहां सुविधाओं की कमी की शिकायत करते हैं. लेकिन वे सिर्फ़ भोजन ही नहीं चाहते. वे हिंसा की समाप्ति चाहते हैं, वे चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनकी आवाज़ सुने. लेकिन कोई नहीं चाहता कि उनकी पहचान ज़ाहिर हो.

एक महिला बताती है कि वो एक महीने से नहाई नहीं है. इस स्कूल में पानी या कमरे गर्म करने की सुविधा नहीं है.

इस बीच, एक और महिला कहती हैं कि उन्हें गर्म रहने से ज़्यादा सुरक्षा की ज़रूरत है. वो कहती है कि घर में भी कोई सुरक्षित नहीं है और सरकारी सुरक्षाबल उन्हें मारने और उनकी बेटियों का बलात्कार करने आते हैं.

दुनिया की उपेक्षा

जॉन गिंग संयुक्त राष्ट्र के मानवतावादी मामलों की संस्था के निदेशक हैं. उनके मुताबिक दुनिया सीरिया के संकट के प्रति सुन्न हो गई है.

जॉन कहते हैं, "जैसा कि होता है, किसी भी संघर्ष में निर्दोष लोगों पर ही सबसे ज़्यादा असर पड़ता है. यहां लोगों को सिर्फ़ भोजन, दवाईयां या जीवनयापन की मूलभूत सुविधाओं की ही ज़रूरत नहीं है. हम देख रहे हैं कि देश का मूलभूत ढांचा बरबाद हो रहा है-अस्पताल, कारखाने, उद्योग—सब कुछ बरबाद हो रहा है."

संयुक्त राष्ट्र की इस बात पर भी निंदा हो रही है कि वे सीरिया के उन इलाकों में मदद नहीं पहुंचा पा रहे हैं जहां मदद की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, ख़ासकर विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाके.

जॉन गिंग मानते हैं कि ये आलोचना जायज़ है. वे कहते हैं, "ये आलोचना जायज़ है कि संयुक्त राष्ट्र की मदद काफ़ी नहीं है और ये इसलिए क्योंकि हमें अपनी ज़रूरत का सिर्फ़ 50 प्रतिशत पैसा ही मिल रहा है. ये बेहद ज़रूरी है कि संयुक्त राष्ट्र हर जगह मदद पहुंचाए, चाहे वो सरकार के कब्ज़े वाले इलाके हों या विद्रोहियों के कब्ज़े वाले."

होम्स के निवासी शहर के भविष्य के बारे में चिंतित हैं.

महिलाओं की प्रसाधन सामग्री बेचने वाला एक व्यक्ति कहता है कि युद्ध से सब थक चुके हैं और जबतक सब एक दूसरे को माफ़ कर एक नई शुरुआत न करेंगे, ये मुश्किलें तब तक ख़त्म नहीं होंगी.