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अमरीका में क्या करती हैं मनमोहन सिंह की बेटी

 शुक्रवार, 8 फ़रवरी, 2013 को 10:12 IST तक के समाचार

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बेटी अमृत सिंह की एक रिपोर्ट ने अमरीका प्रशासन को मानवाधिकार हनन के मामले में कठघरे में ला दिया है.

इस रिपोर्ट में अमरीकी खुफ़िया एजंसी सीआईए के बारे में कई अहम जानकारी शामिल है. इसमें अमरीका में 9/11 के हमले के बाद कैद किए गए लोगों के बारे में बताया गया है.

214 पन्नों की इस रिपोर्ट में 136 लोगों का विवरण है, जिन्हें अमरीका खुफिया एजंसी ने पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया है, कैद में रखा है और दूसरे देशों की जेलों में भेजा है.

इन लोगों के बारे में बताते हुए अमृत सिंह ने लिखा है कि इस दौरान कई बार जरूरी प्रक्रियाओं को नहीं अपनाया गया है.

136 लोगों में ज़्यादातर पाकिस्तान के नागरिक हैं. हालांकि दिलचस्प ये है कि इसमे भारत का कोई नागरिक शामिल नहीं है.

54 देशों पर आरोप

"अब वक्त आ गया है जब अमरीका और उसके सहयोगी देश ये स्वीकार करें कि उन्होंने बड़े पैमाने पर लोगों को गोपनीय ढंग से कैद करके रखा है. इसके लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों के ख़िलाफ़ प्रभावी जांच भी होनी चाहिए."

अमृत सिंह, मानवाधिकार के लिए लड़ने वाली वकील

अमृत सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक इतने बड़े पैमाने पर मानवाधिकार का हनन करने वाली इन कोशिशों में अमरीका को दुनिया भर के करीब 54 देशों का सहयोग मिला है.

इनमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान, लीबिया, डेनमार्क, जर्मनी, फ़्रांस, स्पेन, इटली और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं.

इस रिपोर्ट में उन देशों पर करारा प्रहार किया गया है जो मानवाधिकार के हितों की बात तो करते हैं लेकिन अमरीका के इस कदम पर उनका साथ भी देते हैं.

माना जा रहा है कि मानवाधिकार के मुद्दे पर अमृत सिंह की इस रिपोर्ट के चलते बराक ओबामा प्रशासन की मुश्किलें बढ़ेंगी.

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा है,“अब वक्त आ गया है जब अमरीका और उसके सहयोगी देश ये स्वीकार करें कि उन्होंने बड़े पैमाने पर लोगों को गोपनीय ढंग से कैद करके रखा है. इसके लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों के ख़िलाफ़ प्रभावी जांच भी होनी चाहिए”.

अमृत सिंह भारतीय प्रधानमंत्री की तीन बेटियों में सबसे छोटी हैं.

इन दिनों वे अमरीका में ओपन सोसायटी जस्टिस इनिशिएटिव के राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंक विरोधी कार्यक्रम से जुड़ी हुई हैं.

अर्थशास्त्री से मानवाधिकार सिपाही

इससे पहले वे अमरीकी सिविल लिबर्टी यूनियन के अप्रवासी अधिकार परियोजना की अटॉर्नी स्टॉफ के तौर पर काम कर रही थीं.

अमृत ने न्यूयार्क विश्वविद्यालय में कानून के प्रोफेसर बार्टन बेबे से शादी की है.

चाहे वो जार्ज बुश का शासन रहा हो या फिर बराक ओबामा का शासन हो, अमृत हमेशा मानवाधिकार के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाती रही हैं.

वकालत और मानवाधिकार में काम करने से पहले अमृत सिंह वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में अर्थशास्त्री के तौर पर काम करती थीं.

उन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और यॉले लॉ स्कूल से शिक्षा हासिल की है.

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