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बेटी का सिर कलम, माँ ने माफ़ कर दिया

 गुरुवार, 24 जनवरी, 2013 को 15:17 IST तक के समाचार
रफ़ीना नफ़ीक

रफ़ीना नफ़ीक चाहती हैं कि लोग अपने बच्चों को पढाएं-लिखाएं

एक माँ ने उन लोगों को माफ कर दिया है जिनकी माँग पर उनकी बेटी का सिर कलम कर दिया गया.

बतौर सज़ा सिर कलम करने की ये घटना सऊदी अरब की है जहां श्रीलंका की ये लड़की घरेलू कर्मचारी के तौर पर काम करती थी. उसे एक शिशु की हत्या का दोषी पाया गया था.

जिसे सज़ा मिली, उस लडकी का नाम रिज़ाना है और साल 2005 में जब शिशु की हत्या हुई थी, तब उसकी उम्र महज 17 साल थी. दस्तावेज़ उसकी उम्र की पुष्टि करते हैं.

रिज़ाना की माँ रफ़ीना नफ़ीक का कहना है कि उनकी बेटी निर्दोष थी और उसे बिना किसी जुर्म के सज़ा मिली.

वहीं सऊदी सरकार का कहना है कि रिज़ाना को माफ़ नहीं किया जा सकता था क्योंकि बच्चे के माता-पिता उसके लिए सज़ा चाहते थे.

इस पूरे मामले में एक पेंच ये रहा कि दस्तावेज़ों के मुताबिक रिज़ाना की उम्र शिशु की हत्या के समय केवल 17 वर्ष थी और उसे मौत की सज़ा देना बाल-अधिकारों का उल्लंघन है.

माफ कर दिया

श्रीलंका में रहने वाली रफ़ीना कहती हैं कि उन्होंने बच्चे के माता-पिता को माफ कर दिया है जिन्होंने उनकी बेटी के लिए मौत की सज़ा माँगी थी.

रफ़ीना ने बीबीसी के आज़म अमीन से कहा, ''किसी को दोष देने का कोई मतलब नहीं है. रिज़ाना अब जा चुकी है.''

वे कहती हैं, ''रिज़ाना को मौत की सज़ा दिए जाने के बारे में हमें मीडिया के जरिए पता चला. सऊदी अधिकारियों को हमें कम से कम इस बारे में बताना तो चाहिए था. यहां तक कि उन्होंने रिज़ाना का शव श्रीलंका भेजने से भी इनकार कर दिया.''

रिज़ाना के परिवार ने अपनी बेटी की बारे में कोई खबर पाने के लिए आठ वर्ष तक इंतज़ार किया.

पासपोर्ट और उम्र का पेंच

रिज़ाना की माँ नफ़ीक ने अपने जैसे और परिवारों से अनुरोध किया है कि वे अपनी बच्चियों को घरेलू काम करने के लिए सऊदी अरब या कहीं भी ना भेजें.

रिज़ाना का पासपोर्ट

वे कहती हैं कि इसके बजाए बेहतर होगा कि अपने बच्चों को पढ़ाया-लिखाया जाए.

कोलम्बो स्थित बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेवीलैंड के मुताबिक, ऐसा प्रतीत होता है कि रिज़ाना को जब काम के लिए सऊदी अरब भेजा गया था, तब पासपोर्ट पर उसकी गलत उम्र 23 वर्ष बताई गई.

वे कहते हैं कि अन्य मौलिक दस्तावेज़ों में रिज़ाना की आयु 17 वर्ष बताई गई है और इस हिसाब से वो बच्ची थी.

सऊदी अरब में हुआ ये था कि रिज़ाना जिस शिशु की देखभाल करती थी, उसकी किसी दुर्घटना की वजह से मौत हो गई थी, लेकिन अदालत ने पाया कि उसकी मौत गला घोंटने से हुई थी.

वहीं मानवाधिकार समूहों का कहना है कि रिज़ाना पर चला मुक़दमा एक दिखावा भर था क्योंकि उसे किसी अनुवादक और वकील तक की सेवा मुहैया नहीं कराई गई थी.

मुआवज़े से इनकार

"रिज़ाना को मौत की सज़ा दिए जाने के बारे में हमें मीडिया के जरिए पता चला. सऊदी अधिकारियों को हमें कम से कम इस बारे में बताना तो चाहिए था. यहां तक कि उन्होंने रिज़ाना का शव श्रीलंका भेजने से भी इनकार कर दिया"

नफ़ीक, रिज़ाना की मां

रिज़ाना की माँ नफ़ीक ने अपनी बेटी की मौत के बदले सऊदी अरब की ओर से मुआवजे की पेशकश को ये कहते हुए सार्वजनिक रूप से ठुकरा दिया कि वे ''उस मुल्क से कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगी जिसने उनकी बच्ची को मार डाला.''

बहरहाल, श्रीलंका के राष्ट्रपति ने पीड़ित परिवार को फॉरेन एम्प्लॉयमेंट ब्यूरो के जरिए 7,800 डॉलर की मदद प्रदान की है.

बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक, रिज़ाना की माँ नफ़ीक चाहती हैं कि लड़कियां काम करने के लिए विदेश नहीं जाएं और वे ये जानती हैं कि ये बदलाव एकदम से नहीं होगा.

अभी इसी हफ्ते दो लड़कियों को उस समय तब पकड़ा गया था जब वे सऊदी अरब जाने की कोशिश कर रही थीं.

वहीं सरकार का कहना है कि वह विदेश जाकर काम करने के मामले में आयुसीमा बढ़ाकर 25 वर्ष करने के लिए एक नया कानून लाना चाहती है.

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