पास कब आए दूर वाले 'चंदा मामा'

 बुधवार, 23 जनवरी, 2013 को 08:14 IST तक के समाचार

बच्चे को सदियों से लोरियां सुनाई जाती रही हैं.

लोरी अंग्रेजी के शब्द ‘ललबाई’ (lullaby) का हिंदी अनुवाद है. ‘ललबाई’ यानी ‘लल’ और ‘बाई’ का मिश्रण, जिसका अर्थ होता है बच्चा शांत हो जाए और फिर सो जाए.

लोरी के इतिहास को खंगाला गया तो पता चला कि करीब चार हज़ार साल पहले बेबीलोनिया में पहली बार किसी मां ने अपने बच्चे को लोरी सुनाई थी.

ये लोरी आज दुनिया भर में गाई-सुनाई जाने वाली लोरियों का स्रोत हो सकता है.

पहली बार लोरी बच्चे को सुलाने के लिए ही गाया गया था.

ईसा पूर्व 2000 में मिट्टी के एक छोटे से टुकड़े पर गहरे खुदे लोरियों के ये शिलालेख बताते है कि लोरियाँ गुनगुनाने का इतिहास कितना पुराना है.

बेबीलोनिया से लोरी का नाता

हथेलियों में समा जाने वाला मिट्टी का ये नन्हा शिलालेख ‘क्यूनीअफार्म स्क्रिप्ट’ यानी स्फानलिपि का उदाहरण है और लोरियों का पहला लिखित सबूत भी है.

मिट्टी के शिलालेख पर लिपि को बहुत बारीकी से लिखा गया है. इसे लेखन कला की पहली लिपि कहते हैं जिसे बेबीलोनिया के लेखकों ने गढ़ा.

इस लोरी को जहां तक पढ़ा जा सका है उसका मतलब ये निकलता है कि, “जब एक बच्चा रोता है तो ईश्वर विचलित हो जाते हैं और फिर उसका परिणाम घातक होता है.”

यानी पहली लोरी में प्रेम से अधिक डर का स्वाद था. इस शिलालेख को लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में रखा गया है.

क्या कहती हैं लोरियां

"वो लोग बच्चों को नसीहत देते थे कि बहुत शोर कर चुके हो और इस शोर से बुरी आत्माएं जाग गई है और अगर वह अभी तुरंत नहीं सोया तो प्रेत आत्माएं उसे खा जाएगी"

ज़ोय पलमर,संगीतकार

प्राचीन संगीत के ज्ञाता और विशेषज्ञ रिचर्ड डंब्रिल कहते हैं, “इस काल में लोरियों में भय और डर की विशिष्टता थी.”

एक लोरी का उल्लेख करते हुए संगीतकार ज़ोय पामर कहते हैं, “वो लोग बच्चों को नसीहत देते थे कि बहुत शोर कर चुके हो और इस शोर से बुरी आत्माएं जाग गई हैं और अगर वह अभी तुरंत नहीं सोया तो प्रेत आत्माएं उसे खा जांएगी”

पश्चिमी कीनिया के लुओ जाति के बीच एक लोरी काफी प्रचलित है जिसमें बच्चों से कहा जाता है कि जो बच्चा नहीं सोएगा, उसे लकड़बग्घा खा जाएगा.

यहां तक कि ब्रिटेन में जो मांए अक्सर लोरी गुनगुनाती हैं ‘रॉक ए बे बेबी’ में भी भय के कुछेक शब्द मिलते हैं.

इस लोरी में बड़े ही सुंदर और हल्के- फुल्के तरीके से बच्चे को डराने की कोशिश की जाती है.

बाल विकास पर कई किताबें लिख चुके लेखक गोड्डार्ड ब्लेथ कहते हैं कि दुनिया भर में कई ऐसी लोरियां है जिसका शाब्दिक अर्थ नहीं निकाला जा सकता.

वो कहते हैं, “ज्यादातर लोरियों में स्नेह, करुणा और संरक्षण की बातें ही होती है. कई लोरियों में देश के इतिहास को दोहराया जाता है.”

ज़ोय पामर जो एक संगीतकार हैं रॉयल लंदन अस्पताल में लोरी पर काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि वो अस्तपाल में मांओं को लोरियां सिखा रहे हैं जिनमें कई तो नई हैं लेकिन कई बहुत पुरानी हैं.

बच्चा गर्भ से सुनने लगता है लोरियां

गोड्डार्ड ब्लेथ कहते हैं कि गर्भ के 24वें सप्ताह में ही बच्चा मां की आवाज़ सुनने लगता है.

रूस के शिशु विशेषज्ञ माइकल लेज़ारेव कहते हैं, “मां की आवाज़ सेतु की तरह होती है जो गर्भ में पल रहे बच्चे को बाहर की दुनिया से जोड़ता है”.

माइकल कहते हैं, गर्भ में पल रहा बच्चा बाहर की आवाज़ें सुन सकता है लेकिन उतना साफ नहीं जितना की मां की आवाज़ को वो वह सुनता है. क्योंकि इसे बच्चा बाहर और भीतर दोनों तरह से सुन सकता है.

उदाहरण के तौर पर स्वीडन की एक लोरी में(मोर्स लिला ओले) आठ अलग-अलग स्वर वर्ण हैं.

इनका कहना है कि मां और बच्चे के बीच बातचीत और लोरियों का पुराना इतिहास है. कई शोध बताते हैं कि बच्चों में ताल और लय को समझने की अदभुत क्षमता होती है.

ब्लेथ ये भी कहते हैं कि मां अगर लोरी नहीं भी गा रही होती हैं तो बच्चे से बहुत लय में बात करती हैं, धीमे-धीमें प्यार से बोलती हैं जो बच्चों के लिए सहज होता है और बच्चा उस आवाज़ पर प्रतिक्रिया देता है.

ब्लेथ कहते हैं कि उनका अध्ययन बताता है कि आज भी लोरी अपना रास्ता तय कर रही है...कीनिया से रीरिया, मोरक्को, ब्रिटेन

लोरियों की दिलचस्प बातें

"मां की आवाज़ सेतू की तरह होता है जो गर्भ में पल रहे बच्चे को बाहर की दुनिया से जोड़ता है"

माइकल लेज़ारेव, रूस के शिशु विशेषज्ञ

भारत के अधिकांश हिस्से में बच्चों को जो लोरियां सुनाई जाती है उनमें चंदा मामा का जिक्र होता है. चंदा मामा दूर के एक प्रचलित लोरी है.

कीनिया में मांएं लोरियों में अक्सर लकड़बग्घे का जिक्र करती हैं ताकि बच्चा डर से सो जाए.

कीनिया के ग्रामीण इलाकों के जंगलों में लगड़बग्घे पाए जाते हैं शायद ये इसकी प्रमुख वजह है.

स्वीडन में कुछ लोरियों में बच्चों को भाषा सिखाने की कोशिश होती है तो कुछ लोरियां शिक्षाप्रद होती हैं. इराक की लोरियों में दर्द होता है.

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