कौन हैं राजा परवेज़ अशरफ़?

  • 16 जनवरी 2013
राजा परवेज़ अशरफ़
प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ को आने वाले दिनों में अदालत से निपटना होगा.

जून 2012 में राजा परवेज़ अशरफ़ को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनाए जाते वक्त ही अधिकांश पर्यवेक्षकों ने कह दिया था कि उनका कार्यकाल मुश्किलों से भरा होगा.

राजा अशरफ़ को युसुफ़ रज़ा गिलानी की जगह ये ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी.

उनकी मुख्य ज़िम्मेदारी थी अपनी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का आम चुनाव में नेतृत्व करना. ये चुनाव मई में होने हैं, और फिलहाल सरकार, न्यायालय और पाकिस्तान में बेहद ताक़तवर फौज के बीच गतिरोध जारी है.

लेकिन देश के सबसे बड़े न्यायालय ने भ्रष्टाचार के मामले में प्रधानमंत्री की गिरफ़्तारी के आदेश जारी किए हैं. राजा परवेज़ अशरफ़ को इससे निपटना होगा.

आलोचक उन्हें 'राजा रेंटल' यानी किराए पर लिया जा सकने वाला राजा बुलाते हैं. उन पर आरोप है कि उन्होंने जल संसाधन और ऊर्जा मंत्री के तौर पर बहुत पैसे उगाहे थे.

हालांकि, वो इन आरोपों से इंकार करते हैं.

राजनीतिक परिवार

राजा परवेज़ अशरफ़ पीपीपी के बहुत अहम सदस्य हैं और पार्टी की साझा सरकार में दो बार मंत्री रह चुके हैं. पाकिस्तान में साल 2008 से पीपीपी के ही नेतृत्व में सरकार है.

राजा परवेज़ अशरफ़ का संबंध गुज्जर ख़ान शहर से है, जो राजधानी इस्लामाबाद से लगभग एक घंटे के फ़ासले पर है.

पीपीपी
पीपीपी के एक और प्रधानमंत्री अदालत का आदेश न मानने का नतीजा भुगत चुके हैं.

उनका जन्म साल 1950 में सिंध के शहर संघर में हुआ था जहां उनके परिवार की काश्तकारी की ज़मीने हैं. उन्होंने सिंध विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा हासिल की है.

राजा अशरफ़ सिंधी भाषा बहुत अच्छी तरह से बोलते हैं और ख़ुद को आधा सिंधी मानते हैं. शायद ये एक बड़ी वजह है कि वो उस पार्टी में अहम मुक़ाम हासिल कर पाने में कामयाब रहे हैं जिसके ज़्यादातर बड़े नेता इसी समुदाय से संबंध रखते हैं.

उनके एक चाचा सैनिक शासक अयूब ख़ान के मंत्रिमंडल में भी थे.

पढ़ाई ख़त्म करने के बाद उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर जूते का व्यापार शुरू किया था लेकिन वो कामयाब नहीं हो सका जिसके बाद राजा अशरफ़ प्रॉपर्टी के धंधे में लग गए. कहा जाता है कि उनका वो व्यापार ख़ासा फल-फूल रहा है.

देश की राजनीति में उन्होंने लगभग चार दशक पहले क़दम रखा और पार्टी के लिए अपने क्षेत्र में काफ़ी काम किया.

शुरूआती दौर में चुनावी मैदान में उन्हें नाकामी का मुंह देखना पड़ा जब वो लगातार तीन संसदीय चुनाव हार गए. लेकिन पिछले दो बार, यानी साल 2002 और 2008 से क़िस्मत उन पर मेहरबान है.

राजा अशरफ़ युसुफ़ रज़ा गिलानी की सरकार में जल संसाधन और ऊर्जा मंत्री रहे.

अपने कार्यकाल में वो बार-बार देश में जारी बिजली की कमी को दूर करने के वादे करते रहे, जो पूरे नहीं हो पाए. इस वजह से मीडिया ने उन्हें लेकर कई तरह के लतीफ़े भी बनाए.

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पीपीपी नेता फौज के साथ मिलीभगत बता रहे हैं.

इसी दौर में उन पर रिश्वतख़ोरी के इल्ज़ाम भी लगे. इस मामले में उनके ख़िलाफ़ एक जांच अभी भी जारी है.

जबरदस्त राजभक्त

परवेज़ अशरफ़ लग रहे आरोपों की वजह से उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया था लेकिन कुछ महीनों में ही उन्हें सूचना और प्रसारण मंत्री बना दिया गया.

जब उनके प्रधानमंत्री बनाए जाने की बात पक्की होती नज़र आई तो देश के सबसे बड़े अंग्रेज़ी अख़बार ने अपनी मुख्य हेडलाइन में उन्हें 'रेंटल राजा' कहकर संबोधित किया.

ऊर्जा मंत्रालय में उनकी मौजूदगी के वक्त देश में बिजली की कमी को ख़त्म करने के लिए रेंटल पॉवर प्रॉजेक्ट शुरू किया गया था.

लेकिन अपने ऊपर लगे इल्ज़ामों से निपटना ही उनकी एक मुश्किल नहीं रही है, सुप्रीम कोर्ट उन पर दबाव बनाती रही है कि वो स्विस प्रशासन से कहें कि वो राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामले की जांच फिर से शुरू करे.

पूर्व प्रधानमंत्री गिलानी ने सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश की अनदेखी की थी जिसकी वजह से उन्हें सत्ता से हाथ धोना पड़ा था.

उन्होंने स्विस प्रशासन को इस बाबत लिखा भी, लेकिन अभी तक ये साफ़ नहीं है कि क्या ये जांच फिर से शुरू होगी?

फ़िलहाल तो सबकी नज़र इस बात पर है कि वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर किस तरह के क़दम उठाते हैं.

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