सांबा ट्रेन में संगीत की महफ़िल

  • 14 जनवरी 2013
सांबा ट्रेन
हर साल दिसंबर महीने में इस ट्रेन यात्रा का आयोजन होता है

ब्राज़ील की परंपरागत संगीत शैली सांबा का नाता रियो डी जेनेरियो शहर से माना जाता है. इस शहर में इसे हर साल दिसंबर में बड़े अनोखे तरीक़े से मनाया जाता है.

साल में एक बार पूरे शहर और बाहर के भी तमाम बैंड मिलकर मुख्य शहर से बाहरी शहर की ओर स्थित ओस्वाल्डो क्रूज़ तक एक विशेष ट्रेन यात्रा का आयोजन करते हैं. इसी जगह को सांबा नृत्य का जन्म स्थल माना जाता है.

रियो शहर के बीचो-बीच ये रेलवे स्टेशन आस-पास की तमाम जगहों से रोज़ाना आने वाले हज़ारों मज़दूरों का केंद्र है. लेकिन साल में एक बार ये आपाधापी अचानक बदल जाती है और लोग इस स्टेशन पर काम के लिए नहीं बल्कि आनंद लेने के लिए आते हैं.

संगीतकार मार्क्विन्होज डी ओस्वाल्डो क्रूज़ ने 17 साल पहले सांबा ट्रेन की इस यात्रा की शुरुआत की थी.

वह अपने पड़ोस के संगीत के इतिहास को बदलना चाहते थे जो तमाम महान सांबा संगीतकारों की जन्मस्थली है.

इसका मक़सद लोगों को ये बताना था कि बीसवीं सदी की शुरुआत में यहां के दासों द्वारा तैयार किया गया संगीत बहुत ज्यादा स्वीकार्य नहीं था.

वो कहते हैं, "उस समय सांबा प्रतिबंधित था, इसलिए लोग स्टेशन पर हर गुरुवार को मिलते रहे होंगे और ट्रेन पर इकट्ठे होते होंगे. दरअसल ऐसा करके एक तो मालिकों के सताए जाने से छुटकारा मिलता था, दूसरे संगीत का अभ्यास भी होता था."

समय की पाबंद

सांबा ट्रेन
खचाखच भरी ट्रेन में जमकर सांबा का लुत्फ उठाते हैं

समय की बेहद पाबंद पहली ट्रेन यहां से शाम छह बजकर चार मिनट पर छूटती है. लेकिन लोगों की भीड़ काफ़ी पहले से ही इकट्ठी होनी शुरू हो जाती है और लोग सांबा का आनंद उठाते हैं.

पहली बार सांबा ट्रेन महज सौ लोगों को ही आकर्षित कर सकी थी, लेकिन अब इसमें हज़ारों लोग शामिल होते हैं. यहां से पांच ट्रेनें रवाना होती हैं और इस दिन यात्रियों का कोई किराया नहीं लगता. जब ट्रेन के भीतर संगीतकार, संगीत बजाना शुरू करते हैं तो पूरा माहौल सांबामय हो जाता है.

करीब 20 मिनट के भरपूर संगीत का आनंद लेने के बाद ट्रेन ओस्वाल्डो क्रूज़ पहुंचती है और फिर अलग-अलग बैंड्स ट्रेन से उतरकर अपने संगीत का प्रदर्शन करते हैं और फिर पार्टी शुरू हो जाती है.

ये ट्रेन स्थानीय लोगों और पर्यटकों को एक दूसरे के क़रीब भी लाती है. यहां रहने वाली एक महिला का कहना है, "मेरे लिए तो ये बहुत ही नेचुरल है. मैं ओस्वाल्डो क्रूज़ में रहती हूं इसलिए मैं कह सकती हू् कि मैं सांबा की दुनिया की रहने वाली हूं और ये दृश्य तो मेरे जीवन का एक हिस्सा है."

ट्रेन की यात्रा कभी-कभी सिर्फ़ एक यात्रा भर होती है, कभी ये एक गंतव्य होता है, लेकिन इस बार ये सिर्फ़ और सिर्फ़ सांबा है.

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