पाकिस्तान: शिया प्रदर्शनकारियों के साथ संकट वार्ता

  • 13 जनवरी 2013

पाकिस्तान के क्वेटा में मारे गए लोगों के शवों को दफ़नाने से इनकार कर रहे और सरकार से सुरक्षा की मांग कर रहे शिया प्रदर्शनकारियों से पाकिस्तानी अधिकारी संकट वार्ता कर रहे हैं लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है.

गुरुवार की घटना के बाद दूसरी रात भी शिया प्रदर्शनकारियों ने क़रीब 50 ताबूतों के साथ सड़क की नाकेबंदी कर रखी है.

पाकिस्तान सरकार के दो मंत्री और बलूचिस्तान के गवर्नर प्रांतीय राजधानी क्वेटा में प्रदर्शनकारियों के साथ संकट के समाधान के लिए वार्ता कर रहे हैं.

कड़ाके की ठंड में प्रदर्शनकारियों ने उसी स्नूकर क्लब के क़रीब सड़क की नाकेबंदी कर रखी है जहां गुरुवार को चरमपंथी हमले हुए थे.

प्रदर्शनकारी बम धमाकों के शिकार हुए क़रीब 50 लोगों के शवों को सड़क के बीचोंबीच रखकर बैठे हैं.

गुरुवार के हमले में मारे गए क़रीब 80 लोगों में से ज़्यादातर लोग क्वेटा की पांच लाख की आबादी वाले हज़ारा शिया समुदाय से हैं.

ये लोग मूलत: अफ़गानिस्तान के रहनेवाले हैं लेकिन अब वे कई पीढ़ियों से क्वेटा में ही बस गए हैं.

प्रदर्शनकारी अडिग

शिया कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सैय्यद दाऊद आग़ा ने बीबीसी को बताया कि प्रदर्शनकारी शिया समुदाय के लोग तब तक अपने मृतकों को नहीं दफ़नाएंगे जब तक सेना ये आश्वासन नहीं देती कि वो शहर की प्रशासनिक व्यवस्था को नियंत्रित करेगी.

धमाके के शिकार हुए एक व्यक्ति की रिश्तेदार फ़िदा हुसैन ने कहा, "हम सभी समुदायों की सुरक्षा चाहते हैं और हमारी सुरक्षा के लिए हर तरह के सुरक्षा इंतेज़ाम किए जाने चाहिए. जब तक हमारी मांगें सरकार नहीं मान लेती हम इस शवों को नहीं दफ़नाएंगे."

मृतकों को नहीं दफ़नाने का फैसला इस्लामी समाज में प्रदर्शन का एक कठोर क़दम माना जाता है क्योंकि आमतौर पर मृतकों को निधन के दिन ही दफ़ना दिया जाता है.

बलूचिस्तान के गवर्नर नवाब ज़ुल्फ़िक़ार मगसी ने ये स्वीकार किया कि इन हमलों के बाद अधिकारियों को वाक़ई शासन के स्वरूप में बदलाव लाना चाहिए.

पाकिस्तान में हाल के वर्षों में हुए इन सबसे त्रासद बम धमाकों के बाद बलूचिस्तान की सरकार ने तीन दिन के शोक का एलान किया है.

इस घटना में मारे गए अन्य मुसलमान समुदाय के लोगों के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है.

हमला

गुरुवार को क्वेटा में हुए अलग-अलग हमलों में क़रीब सौ लोग मारे गए थे.

बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा में एक भीड़भाड़ वाले स्नूकर क्लब में गुरुवार को हुए दोहरे बम धमाकों में 80 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

पहले धमाके के बाद वहां पहुंचे कई राहतकर्मी और पत्रकार दूसरे धमाके में निशाना बने. दूसरे धमाके में क्लब की इमारत भी ध्वस्त हो गई.

मरने वालों में ज्यादातर शिया लोग थे. एक सुन्नी चरमपंथी लश्कर-ए-झांगवी ने इन हमले की जिम्मेदारी स्वीकारी है.

बलूचिस्तान में न सिर्फ अलगाववादी विद्रोह चल रहा है, बल्कि वहां शिया और सुन्नी संप्रदायों के बीच भी हिंसा आम है.

एक वरिष्ठ पुलिस अफसर हामिद शकील ने बताया कि पहले अलमदार रोड पर स्कूनर हॉल बिल्डिंग के बाहर धमाका हुआ. इसके बाद वहां राहतकर्मी, पुलिस के जवान और मीडिया वाले पहुंचे गए. लेकिन दस मिनट वहां दूसरा धमाका हो गया जिसमें पहले धमाके से ज्यादा लोग मारे गए.

पुलिस के अनुसार पहले धमाके को आत्मघाती हमलावर ने अंजाम दिया जबकि दूसरा धमाका कार में रखे एक बम से किया गया.

मृतकों में दो पत्रकार, पांच राहतकर्मी और कम से कम पांच पुलिसकर्मी शामिल हैं.

लश्कर-ए-झांगवी ज़िम्मेदार

बीबीसी संवाददाता एम इलियास खान का कहना है कि इन धमाकों की जिम्मेदारी लेने वाला लश्कर-ए-झांगवी गुट पहले इस इलाके में रहने वाले शिया हजारा लोगों को निशाना बनाता रहा है.

दूसरी तरफ पाकिस्तान के स्वात घाटी इलाके में गुरुवार को हुए धमाके में कम से कम 21 लोग मारे गए और 80 से ज्यादा घायल हो गए. ये धमाका एक धार्मिक आयोजन के दौरान हुआ.

पहले अधिकारियों ने कहा कि धमाका एक गैस कनस्तर से हुआ लेकिन बाद एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये इसकी वजह एक बम था.