भाषाओं का मरघट है न्यूयॉर्क!

  • 20 दिसंबर 2012
न्यूयॉर्क, भाषा

न्यूयॉर्क करीब 800 भाषाओं का घर और भाषाविदों के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थान है. न्यूयॉर्क की विभिन्न भाषाओं को सुनने के लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है, बस सब-वे पर सवार होना है.

रास्ते में आपको कोरियाई, चीनी, स्पैनिश, बंगाली, गुजराती, नेपाली सहित विभिन्न भाषाएँ सुनाई देंगी. रास्तों पर आपको विभिन्न भाषाओं में चिह्न या निशान बने मिलेंगे.

लेकिन न्यूयॉर्क ऐसा भी शहर है जहाँ कई भाषाओं की मौत भी हो रही है. यूनेस्को के अनुसार दुनिया की करीब 6,500 भाषाओं में से आधी विलीन होने के कगार पर हैं और शताब्दी के अंत तक इनका नामो-निशान भी नहीं रह जाएगा.

आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन दशकों में अमरीकी घरों में अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं की बोलचाल में 140 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है.

न्यूयॉर्क शहर के पाँच महत्वपूर्ण इलाकों– द ब्रांक्स, ब्रुकलिन, मैनहैटन, क्वींस और स्टेटन द्वीप में दुनिया की हर बड़ी भाषा को बोलने वाले लोग मौजूद हैं, लेकिन यहाँ ऐसी भाषाओं के अंश भी मिलेंगे जिन्हें बोलने वाले चुनिंदा लोग ही रह गए हैं.

अब जाघवा या लिवोनियन भाषा पर आंकड़े एकत्र करने के लिए भाषाविदों को दुनिया का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है. वो सात नंबर ट्रेन लेकर न्यूयॉर्क के उन इलाकों में जा सकते हैं जहाँ इसे बोलने वाले लोग मिल जाएंगे.

न्यूयॉर्क के दो भाषाविदों और एक कवि– डैनियल कॉफमैन, जूलियट ब्लेविंस और बॉब हॉलमैन ने इस मौके को पहचाना और एंडेंजर्ड लैंग्वेज अलायंस या लुप्तप्राय भाषा गठबंधन की स्थापना की.

कॉफमैन मानते हैं कि दुनिया के कोने-कोने से आप्रवासी बड़ी संख्या में न्यूयॉर्क पहुँचते हैं, इसी कारण न्यूयॉर्क में इतनी भाषाओं को बोलने वाले लोग आसानी से मिल जाते हैं.

वो बताते हैं कि स्लोवीनिया में रहने वाले गॉटशीयर्स लोग स्लाविक भाषा जैसी अपनी ही एक अलग भाषा बोलते हैं जिसे जर्मन लोग समझ नहीं पाते.

इसी भाषा को बोलने वाले चंद लोगों में से कुछ लोग क्वींस में रहते हैं.

होंडूरास और बेलीज़ में गरीफुना भाषा बोलने वाले कुछ आप्रवासी लोग अमरीका में रहते हैं.

एंडेंजर्ड लैंग्वेज अलायंस के कर्मचारी दो गरीफुना भाषा बोलने वाले लोगों लोरीडा ग्वीटी और एलेक्स कोलोन की ना सिर्फ भाषा को बल्कि उनकी संस्कृति और परंपरागत गानों को भी रिकॉर्ड कर रहे हैं.

भाषाविदों ने सुलावेसी, इंडोनेशिया की ममूजू भाषा बोलने वाले हुस्नी हुसैन का वीडिया बनाया है.

न्यूयॉर्क में ममूजू भाषा को बोलने वाले वो एकमात्र व्यक्ति हैं और शायद इस भाषा को पहली बार डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा रहा था.

लेकिन भाषाएँ क्यों मरती हैं?

न्यूयॉर्क
न्यूयॉर्क में हर बड़ी भाषा को बोलने वाले लोग मिल जाते हैं

कई बार लोग खुद से या फिर दबाव में आकर अपनी भाषा बदल लेते हैं.

19वीं शताब्दी के अंत में मैनहाटन का उत्तरी छोर यिदिश भाषा का केंद्र था. वहाँ यिदिश से जुड़ी पत्र-पत्रिकाएँ, रेस्तराँ और किताबों की दुकानें मौजूद थीं लेकिन 20वीं सदी में जब इलाके से यहूदी लोग जाने लगे, तब भाषा की स्थिति खराब हुई.

यहाँ तक की अमरीका में पैदा हुए यहूदी आप्रवासियों के बच्चे यिदिश भाषा बोल नहीं पाते थे लेकिन ऐसे वक्त जब यिदिश के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे थे, यिदिश भाषा ने वापसी की.

इसका श्रेय यिदिश बुक सेंटर के संस्थापक और प्रमुख आरोन लांस्की को जाता है.

उनके प्रयासों का नतीजा था कि यिदिश भाषा की 11,000 किताबों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया गया है और अब वो इंटरनेट पर उपलब्ध हैं.

न्यूयॉर्क के धार्मिक यहूदी यिदिश का इस्तेमाल आम बोलचाल की भाषा में कर रहे हैं.

लांस्की कहते हैं, ''आजकल ऐसे कई लोग हैं जो अपने बच्चों को यिदिश भाषा सिखा रहे हैं.''

यिदिश में रेडियो कार्यक्रम का भी प्रसारण होने लगा है.