मिस्र: सेना को मिले गिरफ्तारी के अधिकार

  • 11 दिसंबर 2012
मिस्र
सोमवार को राष्ट्रपति भवन के बाहर सुरक्षा घेरे को और कड़ा कर दिए जाने के भी सुबूत दिखे

मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी ने सेना को आदेश दिया है कि वो 15 दिसंबर को नए संविधान पर होने वाले जनमत संग्रह से पहले शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए कार्रवाई करें

सेना को आम लोगों को गिरफ्तार करने की भी शक्ति दी गई है.

इससे पहले 22 नवंबर को एक आदेश में मोर्सी ने खुद को अतिरिक्त शक्तियाँ दे दी थीं जिन्हें अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती थी. लेकिन इसका भारी विरोध होने के कारण उस आदेश को वापस ले लिया गया.

विपक्ष की मांग है कि 15 दिसंबर के जनमत संग्रह को रोका जाए, लेकिन मोर्सी ने इस मांग को मानने से मना कर दिया है.

विपक्षी नेता मंगलवार को जनमत संग्रह के विरोध में देश भर में प्रदर्शन आयोजित कर रहे हैं.

पूर्व विदेश मंत्री अम्र मूसा ने बीबीसी से कहा कि विपक्ष का मकसद सत्ता परिवर्तन नहीं है लेकिन वो बेहतर संविधान चाहता है.

इस्लामी गुटों ने कहा है कि वो विपक्ष के प्रदर्शनों के विरोध में प्रदर्शन करेंगे. इससे काहिरा में दोबारा हिंसा होने का भय फैल गया है.

राष्ट्रपति मोर्सी ने लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए कोला, सिगरेट और बियर जैसी वस्तुओं की बिक्री पर लगा कर कम कर दिया है.

तनाव

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विपक्ष की मांग है कि मोर्सी नए संविधान के लिए होने वाले जनमत संग्रह को स्थगित करें

समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक मोर्सी ने सेना से कहा है कि जब तक शनिवार के जनमत संग्रह का नतीजा ना आ जाए, तब तक शांति व्यवस्था को बरकरार रखा जाए.

काहिरा में बीबीसी संवाददाता जॉन लायन के मुताबिक मोर्सी के ताजा घोषणा से ये डर व्याप्त हो गया है कि क्या मिस्र वापस सैन्य शासन की ओर बढ़ रहा है.

नए सरकारी आदेश के मुताबिक सेना से कहा गया है कि वो स्थानीय पुलिस की मदद से सुरक्षा व्यवस्था कायम करें.

सोमवार को राष्ट्रपति भवन के बाहर सुरक्षा घेरे को और कड़ा कर दिए जाने के भी सुबूत दिखे.

अभी तक ये साफ नहीं है कि क्या विपक्ष शनिवार को होने वाले जनमत संग्रह का बहिष्कार करेगा? उधर वरिष्ठ न्यायाधीशों का एक दल जनमत संग्रह के निरीक्षण के लिए तैयार हो गया है.

मिस्र में जनमत संग्रह का निरीक्षण परंपरागत तौर पर न्यायपालिका करती रही है लेकिन 22 नवंबर को मोर्सी की घोषणा के बाद हजारों न्यायाधीश हड़ताल पर चले गए थे.

न्यायपालिका का आरोप था कि सरकार समर्थक उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालने का प्रयास कर रहे थे. दरअसल सरकार समर्थक नहीं चाहते थे कि न्यायपालिका संवैधानिक प्रारुप की वैद्यता पर कोई फैसला सुनाए.

उधर विपक्ष का आरोप है कि संविधान की संरचना जिस बैठक में हुई उसमें मोर्सी के इस्लामी समर्थकों का दबदबा था.

रविवार को विपक्षी नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद नेशनल सैल्वेशन फ्रंट ने कहा कि संविधान का प्रारूप मिस्र के लोगों की आकांक्षाओं को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करता.

गुट के प्रवक्ता सामेह ऐशाउर ने एक पत्रकारवार्ता में कहा, "हम जनमत संग्रह को खारिज करते हैं क्योंकि इससे लोगों में फूट बढ़ेगी."

विपक्ष की मांग है कि मोर्सी नए संविधान के लिए होने वाले जनमत संग्रह को स्थगित करें.