अफ़गानी तालिबानों को रिहा करेगा पाकिस्तान

 बुधवार, 14 नवंबर, 2012 को 19:02 IST तक के समाचार
फ़ाइल

रिहा होने के इंतज़ार में तालिबानी

पाकिस्तान सरकार जेल में बंद कई अफ़गानी तालिबानी अधिकारी को रिहा करने के लिए तैयार हो गई. सरकार ने ये कदम इस्लामाबाद में चल रही अफ़गानिस्तान के मध्यस्थों के साथ शांति वार्ता के दौरान उठाया है.

अफ़गानी सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि रिहा होने वाले समूह में तालिबान की सरकार के पूर्व न्याय मंत्री मुल्ला तुरबी और दो खुफ़िया अधिकारी शामिल हैं.

अफ़गानिस्तान के अधिकारी ने इसे शांति बहाली की कोशिश में एक बेहतर कदम बताया है.

पाकिस्तान ने कहा है कि वह अफ़गानिस्तान में शांति की कोशिशों का समर्थन करता है और बंदियों को रिहा करना उस दिशा में एक वास्तविक कोशिश है.

बीसीसी संवाददाता ओरला ग्यूरिन ने इस्लामाबाद से बताया है कि ऐसा लगता है तालिबान के नंबर दो नेता मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का नाम फिलहाल इस सूची में नहीं है.

अफ़गानिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक अब्दुल गनी की साख तालिबान लड़ाकों में बेहद अच्छी है और वे शांति बहाली की कोशिशों में अहम भूमिका निभा सकते हैं. अफ़गानी लड़ाकों और अमरीकी नेतृत्व वाली नेटो सेना के बीच बीते 10 सालों से संघर्ष जारी है.

सकारात्मक पहल

विश्लेषकों के मुताबिक पाकिस्तान सरकार का यह कदम बेहद अहम है क्योंकि रिहा होने वाले तालिबानी नेता अपने इलाके में जाकर ज़्यादा लोगों को शांति बहाली की प्रक्रिया से जोड़ेंगे.

अफ़गानी अधिकारी तालिबानी बंदियों को रिहा करने के लिए लंबे समय से कोशिश कर रहे थे. अधिकारियों के मुताबिक रिहा होने वाले लड़ाकों के कट्टरपंथी कमांडरों से सीधा संपर्क है और रिहा होने के बाद वे शांति बहाली की कोशिशों में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

एक अफ़गानी अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "रिहा होने वाले लोग शांति बहाली की कोशिशों में कितनी अहम भूमिका निभाएंगे, यह निश्चित नहीं है लेकिन पाकिस्तान के इस कदम से शांति बहाली की कोशिशों को मदद जरूर मिलेगी."

हालांकि अफ़गानी लड़ाके कब रिहा होंगे यह स्पष्ट नहीं हुआ है और उसकी बारीकियों पर अभी काम किया जा रहा है.

ज़्यादातर विश्लेषकों के मुताबिक अफ़गान सरकार और तालिबानियों के बीच राजनीतिक समझौता ही सबसे कारगर उपाय है जिसके जरिए 2014 में नेटो सैनिकों के पूरी तरह से अफ़गानिस्तान से हटने से पहले इलाके में शांति स्थापित हो सकता है.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक पाकिस्तान सरकार का फ़ैसला अफ़गानी उच्च शांति परिषद की बड़ी कामयाबी है. यह परिषद इस्लामाबाद में तालिबानियों को रिहा करने के लिए अभियान चला रही है और काबुल में तालिबान और अफ़गान सरकार के बीच विश्वास और भरोसा स्थापित करने में जुटी है.

अफ़गानिस्तान और अमरीका ने पाकिस्तान पर कट्टरपंथी समूह को शह देने का आरोप लगाया है ताकि वहाँ भारत के प्रभाव को कम किया जा सके. इनमें हक्कानी नेटवर्क भी शामिल है. वैसे पाकिस्तान इन आरोपों को ख़ारिज करता रहा है.

इसे भी पढ़ें

टॉपिक

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.