BBC navigation

ऑस्ट्रेलिया में हर आठ में एक आदमी गरीब

 मंगलवार, 20 नवंबर, 2012 को 08:46 IST तक के समाचार
इस अध्ययन में गरीबी की तुलनात्मक परिभाषा इस्तेमाल की गई है.

एक ताजा अध्ययन बताता है कि ऑस्ट्रेलिया में हर आठ में से एक व्यक्ति गरीबी में जिंदगी गुजार रहा है.

किसी विकसित देश के लिए इतनी गरीबी चिंता की बात है. आखिर इसकी वजह क्या है.

इस अध्ययन रिपोर्ट को तैयार करने वाले न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के ब्रूस ब्रैडबरी कहते हैं, “इस अध्ययन में हमने गरीबी की तुलनात्मक परिभाषा का प्रयोग किया है.”

वो बताते हैं कि उन्होंने देश की एक माध्यमिक आय तय की और जिन लोगों की आमदनी इस माध्यमिक आय के आधे से भी कम है, उन्हें गरीब के तौर पर परिभाषित किया गया.

मंदी से कम हुई गरीबी!

गरीबी का आकलन इन आमदनियों की बाकी ऑस्ट्रेलियाई समाज से तुलना करके किया गया. औद्योगिक रूप से विकसित देशों में गरीबी को तुलनात्मक रूप से मापना बहुत ही सामान्य है.

"अमीर देशों में उच्च जीवन शैली अपनाने की क्षमता होती है. ये पूरी तरह उचित है कि अमीर देशों में नीतियों के बारे में सोचने वाले लोग उन मानकों के बारे में भी सोचें जो अमीर देश हासिल कर सकते हैं."

ब्रूस ब्रैडबरी, रिपोर्ट के लेखक

ब्रूस ब्रैडबरी कहते हैं, “अमीर देशों में उच्च जीवन शैली अपनाने की क्षमता होती है. ये पूरी तरह उचित है कि अमीर देशों में नीतियों के बारे में सोचने वाले लोग उन मानकों के बारे में भी सोचें जो अमीर देश हासिल कर सकते हैं.”

लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि ये गरीबी का आकलन नहीं है, बल्कि ये इससे ज्यादा असमानता का संकेत है.

चूंकि इसमें ये आकलन होता है कि औसतन लोग कैसे जिंदगी जी रहे हैं, इसलिए ये बदलता रहता है. उदाहरण के लिए आयरलैंड में 2008 के वित्तीय संकट के बाद देश में गरीब लोगों की संख्या घट गई क्योंकि निर्धनता का पैमाना समझी जाने वाली पूरे समाज की माध्यमिक आमदनी घट गई.

गरीबी का पैमाना

ब्रैडबरी का कहना है कि तुलनात्मक गरीबी असमानता से नजदीकी तौर पर जुड़ी है, लेकिन दोनों एक बात नहीं है.

ऑस्ट्रेलिया में गरीबी

ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में इतनी गरीबी चिंता का कारण हो सकती है.

ऑस्ट्रेलिया एक अमीर देश है लेकिन वहां रहने वाले गरीब किसी भी तरह इथोपिया जैसे कम आमदनी वाले देशों के गरीबों के बराबर नहीं हो सकते.

ब्रैडबरी कहते हैं, “अगर (विकासशील) देश में लोगों की जीवन शैली की तुलना अमीर देशों से की जाए तो तुलनात्मक ग़रीबी रेखा का इस्तेमाल नहीं हो सकता.”

वहीं संयुक्त राष्ट्र के मानव विकास कार्यक्रम के बिल ओरमे कहते है, “राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर गरीबी को मापने का कोई एक तरीका नहीं है. इसके लिए मूल्यांकनों की अलग अलग रेंज और कारकों का संजोयन इस्तेमाल किया जाता है.”

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलना करने के लिए आप को गरीबी को सही मायनों में मापना होगा. इसके लिए सबसे आम तरीका यही है जो लोग प्रतिदिन 1.25 डॉलर से कम पर जिंदगी गुजार रहे हैं, वो गरीब हैं.

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.