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सैंडी से किस उम्मीदवार को होगा फायदा?

 बुधवार, 31 अक्तूबर, 2012 को 17:04 IST तक के समाचार
सैंडी

मौसम साफ़ होते ही ये बातें होने लगीं हैं कि कहीं सैंडी ने बराक ओबामा की गिरती साख को बचा तो नहीं लिया

दिल्ली की तरह वॉशिंगटन का माहौल भी काफी सियासी है. यहाँ राजनीति का माहौल हमेशा गर्म रहता है.

सैंडी तूफ़ान के ज़बरदस्त तबाही मचाने के बाद अब वाशिंगटन में यह चर्चा होने लगी है कि इससे किस उम्मीदवार को फायदा होगा.

टीवी और कैफ़े में मौसम साफ़ होते ही ये बातें होने लगीं कि कहीं सैंडी ने बराक ओबामा की गिरती साख को बचा तो नहीं लिया

अपनी चुनावी मुहिम स्थगित करके बराक ओबामा पूरी तरह से राहत के इंतज़ाम में लग गए.

जब उनसे पूछा गया कि आपकी चुनावी मुहिम कब शुरू होगी तो उन्होंने कहा वो इस समय राहत के कार्य पर अधिक ध्यान दे रहे हैं और अगले मंगलवार को होने वाले चुनाव की अभी उन्हें चिंता नहीं.

उन्हें चुनौती देने वाले मिट रोमनी ने भी अपना चुनावी प्रचार बंद किया पर पहले यह कहा कि वो चुनावी मुहिम जारी रखेंगे.

उनके खेमे से अनिश्चितता के सिग्नल मिल रहे थे जबकि ओबामा के खेमे में हालात पर काबू के संकेत मिल रहे थे.

'नुकसान अधिक'

मेरीलैंड विश्वविद्यालय के सुमित कुमार के अनुसार सैंडी तूफ़ान से ओबामा को नुकसान होगा फायदा नहीं.

उन्होंने कहा, "सैंडी से प्रभावित होने वाले लगभग सभी राज्य डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों से भरे पड़े हैं. वो ओबामा से पहले से नाराज़ हैं. तूफ़ान के कारण कम से कम 40 लाख बिजली के बिना जीवन बिता रहें हैं. वो उन से अब और भी नाराज़ होंगे."

सॉफ्टवेयर इंजीनियर असित गुप्ता के अनुसार, ''जो भी उम्मीदवार इससे सियासी फायदा उठाने की कोशिश करेगा उसे नुकसान हो सकता है.''

वाशिंगटन में टाइम्स ऑफ़ इंडिया के संवाददाता चिदानंद राजघट्टा कहते हैं, ''जिन लाखों घरों में बिजली चली गई है वो परेशान हैं और शायद चुनाव तक बिजली नहीं आई तो वो वोट डालने नहीं जाएंगे जिस से ओबामा को कम वोट मिलेंगे क्योंकि प्रभावित होने वाले डेमोक्रेटिक पार्टी के राज्यों में हैं.''

एक बड़े होटल के मिल्की माइकल ब्रिज ने मुझे बताया, ''उनकी राय में बराक ओबामा ने एक दबंग नेता होने का सबूत दिया है जिससे हर राज्य में वोटरों को ये पैगाम मिला होगा की 'ये हमारा सही मायने में लीडर है. हम इसे ही वोट देंगे'.

ओबामा की परेशानी

"सैंडी से प्रभावित होने वाले लगभग सभी राज्य डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों से भरे पड़े हैं. वो ओबामा से पहले से नाराज़ हैं. तूफ़ान के कारण कम से कम 40 लाख बिजली के बिना जीवन बिता रहें हैं. वो उनसे अब और भी नाराज़ होंगे."

मेरीलैंड विश्वविद्यालय के सुमित कुमार

राष्ट्रपति ओबामा की परेशानी यह है कि अगर वो अपनी तारीफ़ आप करने लगे तो लोग इस बात को पसंद नहीं करेंगे और कहेंगे कि ये तो आपका कर्तव्य है.

दूसरी तरफ वो इसे चुनावी मुहिम के दौरान नहीं जताएंगे कि तूफ़ान कटरीना के दौरान राष्ट्रपति बुश की तरह बेअसर और नाकाम नहीं रहे और आपदा से निपटने के इंतज़ाम से लेकर राहत कार्य तक काम करते रहे, तो ये अपने हाथ से एक मौक़ा निकलने देने वाली बात होगी

मिट रोमनी ने आपदा शुरू होने से पहले लोगों से अपील की कि वो अपने राजनीतिक मतभेद भूल कर राहत कार्य के लिए दिल खोल कर चंदा दें.

बजट कम किया

उनकी परेशानी इस बात से भी बढती है कि वो जब मासाच्यूसेट्स के गवर्नर थे, एक आपदा के दौरान आम आमदी की मदद नहीं की जबकि उनके पास बहुत पैसे थे.

इसके इलावा उन्होंने इस बात का भी जवाब देना पड़ सकता है कि आपदा की निगरानी वाली संस्था फेमा के बजट को कम करने की मुहिम क्यों चलाई थी.

लोग देख सकते हैं कि आपदा के पहले और इसके दौरान फेमा ने कितना बढ़िया काम किया.

अगर इसका बजट कम कर दिया जाए तो सैंडी जैसे तूफानों का मुकाबला किस तरह से किया जाएगा.

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