अमरीका चुनाव के पाँच तथ्य

  • 22 अक्तूबर 2012

अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर हर ओर चर्चा है. चुनाव में कई मुद्दे हैं और मतों के हिसाब से हर राज्य की अपनी अहमियत है. नज़र डालते हैं अमरीका चुनाव के मुख्य तथ्यों पर.

सबसे बड़ा मुद्दा

अमरीका में ज़्यादातर लोगों की नज़र में अर्थव्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा है. ये रैसमुसेन रिपोर्ट्स का शोध है. इस शोध के मुताबिक, जिन लोगों के पास नौकरी नहीं है वो तो चिंतित हैं ही, 28 फीसदी नौकरीपेशा लोगों को भी नौकरी खो जाने का डर है.

हाउसिंग मार्केट को लेकर भी लोगों में आशंका है. 43 हफ्तों से बेरोज़गारी दर आठ फीसदी से ऊपर बनी हुई है. कर्ज़ 16 ट्रिलियन डॉलर है.

रैसमुसेन के मुताबिक लोग ये नहीं समझते कि चार वर्षों में उनकी हालत सुधरी है लेकिन वो ये भी नहीं मानते कि उनकी स्थिति बहुत बिगड़ी है. इसीलिए मुकाबला कड़ा है. बहुत से लोग आर्थिक दिक्कतों के लिए जॉर्ज बुश को ज़िम्मेदार मानते हैं.

कुछ ही राज्य अहम

अमरीका में चुनावी नतीजे कुछ बैटलग्राउंड स्टेट पर ही निर्भर करते हैं यानी वो राज्य जहाँ मुकाबला कड़ा है.

कहाँ है मुख्य मुकाबला

ओहायो ऐसा ही राज्य है. यहाँ 18 इलेक्टोरल वोट हैं और दोनों पार्टियाँ लाखों डॉलर खर्च कर चुकी हैं. यहाँ पिछले छह महीने से लोगों के फोन पर ऑटोमेटिड संदेश आ रहे हैं. टीवी पर भी पार्टियों के विज्ञापन आते रहते हैं. ओहायो ने सात राष्ट्रपति दिए हैं

फ्लोरिडा भी इसी वर्ग में आता है. वर्ष 2000 में यहाँ जॉर्ज बुश और अल गोर के बीच मुकाबला इतना कड़ा था कि दोबारा मतगणना की माँग हो गई थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ये मामला बंद हुआ. पेनसिल्वेनिया और आयोवा ऐसे ही राज्य हैं. राष्ट्रपति बनने के लिए किसी को भी 270 वोट चाहिए होते हैं.

बदलता मतदाता

अमरीका में मतदाताओं का स्वरूप लगातार बदल रहा है. मिसाल के तौर पर हर महीने पचास हज़ार अतिरिक्त हिस्पैनिक समुदाय के लोगों को मतदान करने की अनुमति मिलती है. हिस्पैनिक समुदाय अमरीकी जनसंख्या का 16.3 फीसदी है.

पहली दफा दोनों उम्मीदवारों ने टीवी पर स्पैनिश में संदेश दिए हैं. पिछली बार लैटिन अमरीकी समुदाय के 68 फीसदी वोट ओबामा को मिले थे.

क्यों भारतीय ओबामा के मुरीद हैं

रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार मिट रोमनी की अप्रवासन पर नीतियाँ काफी़ कड़ी हैं. आशंका है कि इस वजह से रोमनी को लैटिन अमरीकी वोट कम मिलें. देखना होगा कि हिस्पैनिक समुदाय के लोग कितनी संख्या में वोट देने निकलते हैं.

जहाँ तक भारतीय समुदाय की बात है तो विशेषज्ञों का मानना है कि वो ज़्यादातर डेमोक्रेटिक पार्टी को ही वोट देते हे हैं.

विदेशी मुद्दों पर भी नज़र

वैसे तो अमरीकी मतदाता विदेशी मसलों की तुलना में घरेलू मुद्दों को ज़्यादा अहमियत देते हैं. लेकिन लीबिया में अमरीकी राजदूत के मारे जाने से विदेश नीति का मुद्दा गर्मा गया है. ईरान, इसराइल और अफग़ानिस्तान पर भी अब टीवी पर बहस हो रही है.

रोमनी का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा ईरान पर नरम रुख अपनाते रहे हैं और उन्होंने इसराइल को धोखा दिया है.

अमरीका में रहने वाले अरबी-अमरीकी मूल के लोगों में फलस्तीन को लेकर रुचि है जबकि क्बूयाई मूल के लोगों में क्यूबा के प्रति नीति को लेकर. व्हाइट हाउस में जो भी आएगा उसका ग्लोबल नीतियों पर होगा, इसलिए अमरीकी चुनाव में काफ़ी दिलचस्पी है.

साथ में है सीनेट चुनाव भी

छह नवंबर को सिर्फ अमरीका के राष्ट्रपति पद के लिए ही मतदान नहीं होगा बल्कि सीनेट की एक तिहाई सीटों और प्रतिनिधि सभा की सीटों के लिए भी वोटिंग होगी.

हालांकि इन चुनावों को उतनी कवरेज नहीं मिली है लेकिन ओबामा या रोमनी के भावी कार्यकाल में ये नतीजे अहम भूमिका निभाएँगे.

प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है और सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी का. अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो नया राष्ट्रपति बनने के बाद भी गतिरोध जारी रहेगा. गतिरोध की वजह से 2011 में बहुत कम विधेयक पारित हो सके थे और कांग्रेस के कामकाज में मुश्किल आई थी.

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