'मौक़ा मिला तो फिर वेश्या बनूंगी...'

  • 8 अक्तूबर 2012
वैश्यावृत्ति

शोधकर्ता और कभी ख़ुद एक सहचरी (एस्कॉर्ट वुमन) के तौर पर काम कर चुकीं डॉक्टर ब्रुक मैगनानटी का कहना है कि वेश्यावृत्ति ने उन्हें आज़ादी का एहसास दिया.

उन्होंने कहा कि अगर उन्हें मौक़ा मिला तो वो दोबारा वेश्यावृत्ति में जाना चाहेंगी लेकिन उन्हें लगता है कि जो काम वो करती थीं उसके लिए उनकी उम्र थोड़ी ज़्यादा हो गई है.

डॉक्टर मैगनानटी का कहना है कि जो लोग इस मामले को दूसरी तरह से देखते हैं वो दरअसल इस पूरे काम को समझते ही नहीं हैं.

बीबीसी के विशेष प्रोग्राम हार्डटॉक में कात्या एडलर से बात करते हुए ब्रुक मैगनानटी ने कहा कि औरतों के अधिकार का झंडा बुलंद करने वालों के एक बहुत बड़े तबक़े को इस पूरे कामकाज की समझ ही नहीं है.

पारलैंगिक और पुरुष भी शामिल

ब्रुक मैगनानटी का कहना है कि ज्यादातर लोगों को इस वैश्यावृत्ति के कामकाज की समझ नहीं है

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को लगता है कि सिर्फ़ महिलाएं ही इस उद्योग का हिस्सा बनाई जाती हैं और वो भी जबरन, लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि इस काम में अब ट्रांसजेंडर या पारलैंगिकों से लेकर पुरुष तक शामिल हो रहे हैं.

ब्रुक मैगनानटी ने कहा कि दुनिया भर में पुरुष वेश्यावृत्ति का एक बड़ा बाज़ार है जिनकी सेवाओं की ख़रीदार धनवान महिलाएं हैं.

औरतों के हक़ के पक्ष में लिखने वाली एक महिला के हवाले से पूछे गए एक सवाल के जवाब में मैगनानटी ने कहा, ''पुरूष वेश्याओं का एक समूह इसलिए तैयार करते हैं क्योंकि इससे उनकी महिलाओं पर वर्चस्व की भावना और अहंकार की पूर्ति होती है.''

यौन संबंधों के तजुर्बे

मैगनानटी पहले एक ब्लॉग लिखा करतीं थीं जिसमें वो अपने यौन संबंधो के तजुर्बों के बारे लिखती थीं, जो काफ़ी विवादास्पद रहा था.

साक्षात्कार के दौरान उन्होंने यूरोप के कई देशों जैसे फ्रांस की संसद के उस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया जिसमें एक पारित प्रस्ताव के ज़रिए समाज से वेश्यावृत्ति को पूरी तरह ख़त्म करने की बात कही गई है.

उन्होंने कहा कि ये पूरी तरह अव्यावहारिक है क्योंकि विश्व इतिहास में कभी भी, कहीं भी ऐसा समाज रहा ही नहीं है जिसमें वेश्यावृत्ति नहीं रही हो.