इसका मकसद केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करना है. ये शर्मनाक है कि कुछ भारतीय राजनेता सत्ता हासिल करने के लिए ऐसे क़दम उठा रहे हैं. ये कहीं बड़े चरमपंथी हैं और हमें इनसे मुक्ति पानी चाहिए. मैं अबू आज़मी की सराहना करता हूँ कि उन्होंने ऐसा दुस्साहस किया.
राज, न्यूयॉर्क
राष्ट्र भाषा पर इस तरह सवाल उठाया जाना ही नहीं चाहिए. आज ये मुद्दा महाराष्ट्र में उठ रहा है कल दूसरे प्रांतों में उठेगा. इस तरह का सवाल पूरे देश के लिए शर्मनाक है. अगर राष्ट्र भाषा को अपने देश में नहीं बोल सकते हैं तो कहाँ बोलेंगे, इस पर पूरे देश को विचार करना होगा.
प्रवीण कुमार चंदन