अगर आज़ादी ही है तो अक्ल के इस्तेमाल की भी आज़ादी होनी चाहिए.अब तक दूसरों की लिखी हुई कहने वाले ऐक्टर ने अपनी बात कहने से पहले यह क्यों नहीं सोचा कि बह भी किसी टीम के मालिक हैं. उन्होंने किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को क्यों नहीं ख़रीदा. दोनों ग़लत हैं.
भागम भाग, मॉंट्रियल, कनाडा
बाल ठाकरे नाटक करने के लिए काफी उत्सुक दिखते हैं.उनके पास करने के लिए कुछ और नहीं है.वे शाहरुख़ ही नहीं कुछ और लोगों को इस तरह के बेमतलब के मामलों में घसीट चुके हैं. उनके सार्वजनिक रूप से बयान देने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए.
जमाल अहमद, मुंबई