हमारे देश में इतने क़ानून हैं कि छोटा सा व्यवसाय भी शुरू नहीं किया जा सकता है लेकिन एक बहुराष्ट्रीय कंपनी जहाँ चाहे फ़ैक्ट्री लगा सकती है. हो ये रहा है कि फ़ैक्ट्री आबादी के बिल्कुल बीच खुल जाती है या फिर हम फ़ैक्ट्री के आसपास बस जाते हैं और दुर्घटना के बाद मुआवज़ा उद्योग शुरू हो जाता है.
प्रेम वर्मा, सीहोर, मध्य प्रदेश
कुछ समय तक खूब हाय तौबा मचती है लेकिन फिर सब कुछ यथावत चलता है. अधिकारी और राजनेता अपने अपने ढंग से आंकड़ों से खिलवाड़ करते हैं और पीड़ितों की आवाज़ कहीं इसी खिलवाड़ में दबी रह जाती है. गाँव और शहरों के रिहायशी इलाक़े संवेदनशील स्थानों के आसपास बेरोकटोक बढ़ते जा रहे हैं.
बलवंत सिंह, होशियारपुर, पंजाब