चीनः एक बच्चा नीति में ढील, फिर भी सख़्त सजा बरकरार

  • 21 जनवरी 2014
चीन

चीन ने अपनी एक बच्चा नीति में ढील दी, मगर इस ढील के बावजूद उन बच्चों के लिए हालात नहीं बदले हैं जिनका जन्म इस नीति के उल्लंघन का परिणाम है.

पूर्वी चीन में शांगदोह इलाके का छोटा कृषिप्रधान गांव. गांव के मध्य में स्थित है नन्हें-मुन्नों का एक स्कूल.

गांव के अधिकांश बच्चे यहां आते हैं. यहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा मिलती है. वे पढ़ते हैं, गाना गाते हैं, खूब झूला झूलते हैं और खेलते-कूदते भी हैं.

इन हंसते मुस्कुराते बच्चों में एक बच्चा ऐसा भी है जिसे पहले यहां आने की मनाही थी. यहां आने से उसे रोका ना जाए इसके लिए उसके माता पिता को स्कूल को रिश्वत देनी पड़ी.

छूट के बावजूद सख्त सजा बरकरार

बड़ी बड़ी आंखों वाले झांग रनडोंग का चेहरा गंभीर है. वह शोरगुल करते हुए बच्चों के झुंड से अलग एक किनारे खड़ा है.

वह झांग परिवार का 'गैरकानूनी' बच्चा है. गैरकानूनी इसलिए क्योंकि वह अपनी मां का दूसरा बच्चा है. और चीन में एक-बच्चा नीति लागू होने के कारण दूसरे बच्चे के जन्म को नीति का उल्लंघन माना गया है.

झांग दंपत्ति के दूसरे बच्चे को पहचान पत्र नहीं दिया गया.

झांग के जन्म से चीनी अधिकारी नाराज़ हैं, इसलिए उन्होंने उसका पहचान पत्र जारी नहीं किया है. पहचान पत्र के बिना वह बच्चा निःशुल्क शिक्षा या सेहत संबंधी सुविधाओं का उपभोग नहीं कर सकता.

यही नहीं वह अपने ही देश में यात्रा नहीं कर सकता और न ही किसी लाइब्रेरी का इस्तेमाल कर सकता है.

चीन ने 1970 के दशक में जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए एक बच्चा नीति लागू की थी. इस नीति में हाल ही में छूट दी गई है.

इस नीति के तहत शहरी आबादी को सिर्फ़ एक ही बच्चा पैदा करने का अधिकार था जबकि गाँवों में पहली संतान बेटी होने पर दो बच्चे पैदा करने की छूट दी गई. उन परिवारों को भी दो बच्चे पैदा करने की छूट दी गई जिनमें दोनों में से कोई एक परिजन स्वयं इकलौती संतान हो.

मगर मूल नीति का उल्लंघन करते हुए पहले पैदा हुए दो करोड़ बच्चों के लिए कुछ भी नहीं बदला. इन बच्चों के परिवारों को हर्जाने में बड़ी रकम देनी पड़ रही है और बच्चों को कई बुनियादी हक से वंचित रहना पड़ रहा है.

पहचान पत्र देने से इंकार

अपने मामूली से घर में बैठे झांग परिवार के सदस्य स्थानीय प्रशासन से चल रही उनकी लड़ाई के बारे में बताते हैं.

झांग रनडोंग की मां कहती हैं, "जैसे ही मुझे पता चला मैं फिर से गर्भवती हूं, मैं डर गई. हालांकि भीतर कहीं कोने में थोड़ी खुशी भी थी. मैं नहीं चाहती थी कि गांववाले यह जानें और मुझे बच्चा गिराने के लिए मज़बूर किया जाए."

बच्चे को चुपचाप जन्म देने के बाद झांग दंपत्ति ने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से पैसा उधार लेकर सरकार को जुर्माना भी भरा. यह रकम करीब दस हजार डॉलर की थी.

एक आकलन के मुताबिक केवल 2012 में एक-बच्चा नीति के तहत जुर्माने के रूप में 3.3 अरब डॉलर की रकम इकट्ठा की गई. झांग दंपत्ति ने बीबीसी को उस जुर्माने की रसीद भी दिखाई.

चीन के कुछ हिस्सों में जो एक-बच्चा नीति का उल्लंघन करते हैं उन्हें जुर्माना भरना पड़ता है. कई बार दंपत्ति स्थानीय अधिकारियों को दूसरे बच्चे का पहचान पत्र देने के लिए घूस भी देते है.

झांग दंपत्ति का स्थानीय अधिकारियों से संघर्ष जारी है.

मगर झांग की ही तरह कई दूसरे बच्चे इस मामले में अभागे हैं.

झांग दंपत्ति के जुर्माना भरने के बावजूद स्थानीय अधिकारी बच्चे का पहचान पत्र नहीं दे रहे हैं. उन्हें और पैसे चाहिए. झांग जोड़ी को यह नियम सही नहीं लगता. वे इसे अपने बुनियादी अधिकारों का हनन मानते हैं.

मिसेज झांग ने बताया, "कई महिलाओं का जबरदस्ती बंध्याकरण किया गया है. हमें हमेशा ये डर लगा रहता है कि अधिकारी आएंगे और पति की अनुपस्थिति में ले जाकर हमारा ऑपरेशन करवा देंगे."

'मैं अपील करुंगी'

बिगाओली से 500 किमी दूर उत्तर में इसी तरह हैरान परेशान एक मां और है जिसे अपने सवालों के जवाब चाहिए.

बीजिंग के उत्तरी सिरे पर रहने वाली लुई फ़ी भी इलाके के स्थानीय अधिकारियों से अपने बच्चे के पहचान पत्र के लिए लड़ाई कर रही हैं. उनका बच्चा आठ साल का है.

उस बच्चे के पास तो जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं है. संयोग से लुई को एक ऐसा स्कूल मिल गया है जिसने बच्चे को अपने यहां पढ़ने की इजाजत दे दी है. लुई फी ने जब दूसरे बच्चे को जन्म दिया था तब उन्हें भी सख्त सजा से गुजरना पड़ा. यह उनकी दूसरी शादी थी.

हुआ यूं कि लुई के दूसरे पति को पहले से एक बच्चा है. अब इसी वजह से सरकार लुई फी के तीन बच्चे मान रही है. उन्हें नीति का उल्लंघन करने के लिए 54 हज़ार डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा. विडंबना ये है कि यह रकम उनकी सलाना आमदनी से 14 गुणा अधिक है.

लुई फी मालगोदाम में काम करती हैं. उन्हें अपने मासिक वेतन से 14 गुना रकम हर्जाने के रूप में देनी पड़ी.

लुई फी बीबीसी को यह कहते हुए फूट फूट कर रो पड़ी कि यह कर्ज मैं आजीवन नहीं चुका पाऊंगी.

उन्होंने स्थानीय अधिकारियों पर मुकदमा कर दिया है. लुई और उनके वकील का मानना है कि जुर्माने के रूप में रकम भर देने के बावजूद बीजिंग सरकार द्वारा बच्चे का पहचान पत्र जारी नहीं करना एक ग़ैरकानूनी कदम है. बीजिंग की अदालत इस मुकदमे पर अगले हफ़्ते फ़ैसला देने वाली है.

यह मामला उन लोगों के लिए एक मिसाल बन सकता है जो कमोबेश इसी तरह की परिस्थितियों से गुज़र रहे हैं.

सरकार के साथ चल रही मां की लड़ाई को अनदेखा करते हुए चीन की सरकार बच्चे को उसका कानूनी हक देगी या नहीं, यह भी एक गंभीर सवाल है.

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