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रविवार, 17 मई, 2009 को 05:22 GMT तक के समाचार
 
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'कांग्रेस पार्टी की करिश्माई जीत'
 

 
 
अख़बार
अख़बारों इसे कांग्रेस की अहम जीत बता रहे हैं

लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत की ख़बर से भारतीय अख़बार भरे हुए हैं. कुछ अख़बार इसे करिश्माई जीत बता रहे हैं तो कुछ इसे गठबंधन की राजनीति का अंत बता रहे हैं.

अख़बारों का मानना है कि ये बात तय हो गई है कि अच्छी सरकार चलाने का लाभ मिलता है.

समाचारपत्रों ने यहाँ तक कहा है कि भारतीयों ने खुद भारत को आश्चर्यचकित कर दिया है.

राष्ट्रीय सहारा का शीर्षक है- हाथ को मिला देश का साथ.

अख़बार लिखता है कि एक अरब की जनसंख्या वाले दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश ने दक्षिणपंथियों को नकारते हुए और वामपंथियों को काबू में रखते हुए मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस को एक बार फिर सरकार चलाने का आदेश दे दिया है.

अमर उजाला का शीर्षक है- पंजा पड़ा सब पर भारी. कांग्रेस का 1991 के बाद सबसे बेहतरीन प्रदर्शन.

अख़बार लिखता है कि कमजोर प्रधानमंत्री, आतंकवाद और महंगाई जैसे मुद्दों को नकारते हुए लोगों ने इस बार स्थिरता के मुद्दे पर वोट दिया.

दैनिक जागरण की सुर्खी है- कांग्रेस का करिश्मा, सिंह फिर बनेंगे किंग.

जागरण लिखता है कि कांग्रेस ने तो करिश्मा कर दिया. सभी अंदाज़ झुठलाते हुए देश भर में कांग्रेस का परचम लहराया.

विपक्ष धराशाही हुआ और कांग्रेस के मनमोहनी हाथ का ऐसा वार हुआ कि लालकृष्ण के प्रधानमंत्री बनने की हसरत अधूरी रह गई.

कांग्रेस का करिश्मा

दैनिक हिंदुस्तान का शीर्षक- यूपीए ले उड़ा अमृत कलश.

 जनता ने ऐसी सब अनिश्चितताओं और झंझटों का निपटारा कर दिया और अब कांग्रेस सरकार बनाएगी और उसकी सहयोगी पार्टियाँ विनम्र सहायिका की भूमिका में होंगी. न उसे वामपंथियों के सामने हाथ पसारने होंगे और न समाजवादियों का अहसान लेना होगा
 
प्रभाष जोशी, जनसत्ता में

हिंदुस्तान ने संपादकीय में लिखा है कि समांतर वैचारिकता का एक बड़ा भ्रम जो 90 के दशक में पैदा हुआ था, 16 मई 2009 के चुनावी नतीजों के साथ विसर्जित हो गया. पंद्रहवी लोकसभा के चुनावी नतीजे भारत की वयस्क होती इसी मानसिकता के संकेत हैं.

जनसत्ता की सुर्खी है- भारी पड़ा कांग्रेस का हाथ.

जनसत्ता में प्रभाष जोशी लिखते हैं कि ये गठबंधन की राजनीति का अंत और कांग्रेस के पुनरोदय की शुरुआत है.

उनका कहना है कि जनता ने ऐसी सब अनिश्चितताओं और झंझटों का निपटारा कर दिया और अब कांग्रेस सरकार बनाएगी और उसकी सहयोगी पार्टियाँ विनम्र सहायिका की भूमिका में होंगी. न उसे वामपंथियों के सामने हाथ पसारने होंगे और न समाजवादियों का अहसान लेना होगा.

वो लिखते हैं कि फिर भी कांग्रेस एकछत्र राज करने की घंमडी हालत में नहीं होगी और यह अपने लोकतंत्र के लिए भला होगा.

अंग्रेज़ी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स का हैडिंग है- सिंग, स्टिल किंग यानी सिंह की अब भी बादशाहत कायम है.

अख़बार ने पहले पन्ने पर संपादकीय छापा है जिसमें वो लिखता है कि 2009 के चुनाव का संदेश साफ़ है कि अच्छी सरकार चलाने के नतीजे अच्छे होते हैं.

अख़बार लिखता है कि राजनीतिक पंडित रोज नई गणनाएं देते थे लेकिन मतदाताओं ने बिना कैलकुलेटर के अपनी राय जाहिर कर दी.

संडे टाइम्स का हैडिंग है- कांग्रेस गेट्स फ्री हैंड यानी का कांग्रेस का हाथ मुक्त.

अख़बार लिखता है कि भारत को भारतीयों ने आश्चर्यचकित किया. पिछली बार किसी ने कांग्रेस के नेतृत्ववाले यूपीए गठबंधन की जीत के बारे में नहीं सोचा था और इस बार किसी ने नहीं सोचा था कि कांग्रेस 200 से ऊपर सीटें हासिल करेगी.

पिछले 25 वर्षों में किसी पार्टी की ये सबसे अधिक सीटें हैं.

 
 
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