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शनिवार, 09 मई, 2009 को 07:48 GMT तक के समाचार
 
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तमिलनाडु का बनता-बिगड़ता समीकरण
 

 
 
करुणानिधि और सोनिया गांधी
करुणानिधि और सोनिया गांधी की तमिल नाडू में संयुक्त रैली थी लेकिन वह स्थगित हो गई है
वर्ष 2004 में हुए लोक सभा चुनाव में तमिलनाडु की सभी 39 सीटों पर द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) के नेतृत्व में लोकतांत्रिक प्रगतिशील गठबंधन या डीपीए को सफलता मिली थी.

डीएमके को 16 सीटें मिलीं, कांग्रेस को 10 सीटें, पट्टाली मक्कल कच्ची या पीएमके को छह और वाइको के एमडीएमके को चार सीटें और अन्य तीन सीटों पर वामपंथियों की जीत हुई.

इस प्रकार केंद्र में सरकार बनाने में यूपीए को तमिलनाडु से बहुत मदद मिली थी.

तमिलनाडु की सभी 39 सीटों और पुडूचेरी की एक सीट मिला कर यूपीए को 40 सीटों का फ़ायदा हुआ था.

लेकिन इस लोक सभा चुनाव में तमिलनाडु की स्थिति बिल्कुल भिन्न है. यहां पिछले गठबंधन का अस्तित्व नहीं रहा.

डीएमके और कांग्रेस को छोड़ बाक़ी पांच पार्टियां पीएमके, एमडीएमके, सीपीआई., सीपीएम और मुस्लिम लीग अलग हो गई हैं.

बुधवार 13 मई को जब पूरे राज्य में एक दिन का मतदान होगा तब लोग किन मुद्दों पर अपनी राय रखेंगे?

वही बुनियादी मुद्दे

मैंने चेन्नई और उत्तर तमिलनाडु के कुछ ज़िलों के दौरे के बाद पाया कि बाक़ी राज्यों की तरह यहां भी मुख्य मुद्दा बिजली, पानी, सड़क और रोज़गार से जुड़ा है.

जयललिता
जयललिता श्रीलंका में तमिल भाषाई लोगों की दशा का ज़िम्मवार डीएमके को मानती है

विलुप्पुरम की 50 वर्षीय मरियम्मा एक मज़दूर हैं. वे कहती हैं कि नौकरी मुश्किल से मिलती है. डीएमके की सरकार ने भले ही चावल एक रूपए प्रित किलो पर ग़रीबों में बांटा हो लेकिन बाक़ी खाद्य पदार्थ के दाम आसमान छू रहे हैं.

उन्होंने कहा कि खाद्य तेल 70 रूपए प्रति किलो है, दाल 50 रूपए और टमाटर 15 रूपए प्रति किलो.

पचपन वर्षीय अंथनी कहते हैं कि रोज़गार गारंटी स्कीम से उन्हें नौकरी ज़रूर मिली लेकिन 80 रूपए प्रति दिन की जगह उन्हें सिर्फ़ 70 रुपए प्रति दिन मिले जिसे अब घटा कर 65 रुपए कर दिया गया है और चुनाव के कारण रोज़गार गारंटी स्कीम पर भी रोक लगा दी गई है.

डीएमके 2006 के विधान सभा चुनाव में विजयी हुआ लेकिन तीन साल सत्ता में रहने के बाद भी कोई सत्ता विरोधी लहर नज़र नहीं आ रही है.

श्रीलंका पर राजनीति

ऐआईएडीएमके नेता जयललिता, डीएमके नेता और मुख्य मंत्री करुणानिधि पर वार करने से नहीं चूकतीं.

अब श्रीलंका में तमिल भाषाई लोगों की दशा पर वो डीएमके और कांग्रेस को ज़िम्मेवार मानती हैं.

राजनीतिक विश्लेशक और तुगलक पत्रिका के संपादक चो रामास्वामी मानते हैं कि ऐआईएडीएमके की जीत तय नहीं है. समीकरण भले ही बदल गया हो लेकिन छोटी पार्टियों से ऐआईएडीएमके का वोट बहुत अधिक नहीं बढ़ेगा. सब कुछ जयलिलिता के अभियान पर निर्भर है.

विजयकांत से घबराहट

करुणानिधि
बीमारी के कारण करुणानिधि चुनाव अभियान में भाग नहीं ले पा रहे हैं

डीएमके विरोधी वोट कहां तक ऐआईएडीएमके के खाते में जाते हैं बहुत हद तक अभिनेता विजयकांत की डीएमडीके पार्टी पर निर्भर है.

सन 2006 के विधान सभा चुनाव में डीएमडीके को नौ प्रतिशत वोट मिले थे और विजयकांत ने विधायक का चुनाव भी जीता. अभिनेता विजयकांत ऐआईएडीएमके का वोट काट सकते हैं.

इसी डर के कारण जयललिता रात दिन मतदाताओं को लुभाने के लिए अभियान से जुड़ी हुई हैं.

दूसरी ओर 84 वर्षीय डीएमके नेता एम करूणानिधि बीमार हैं और अस्पताल में हैं. कई दिनों से वो चुनाव अभियान में शामिल नहीं हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ उनकी संयुक्त रैली स्थगित हो गई थी. सोमवार को अभियान ख़त्म हो रहा है और डीएमके-कांग्रेस कोई बड़ी रैली नहीं कर पाए हैं.

 
 
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