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शुक्रवार, 08 मई, 2009 को 09:38 GMT तक के समाचार
 
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'वाम दल ग़लतियों से सीख रहे हैं'
 

 
 
बुद्धदेव भट्टाचार्य

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य का कहना है कि आम चुनावों के बाद परिस्थितियों के आधार पर ही तय किया जाएगा कि वाम दल केंद्र में किसे समर्थन देंगे.

कोलकाता में बीबीसी की टीम के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी. हमारा मुख्य उद्देश्य अभी भाजपा और कांग्रेस को हराना है. परिणामों के बाद पार्टी की बैठक होगी जिसमें हम परिस्थिति देखेंगे और ये भी कि वाम दलों की कितनी सार्थक भूमिका हो सकती है किस सरकार में."

बुद्धदेव बीबीसी की टीम से पार्टी के कार्यालय अलीमुद्दीन स्ट्रीट में मिले. आश्चर्यजनक बात ये थी कि बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री के साथ कोई तामझाम नहीं था. वो सीधे कमरे में आए, अकेले बैठे और खुलकर बातचीत की.

वाम दलों के नेताओं से बातचीत में वैश्विक आर्थिक संकट की बात न आए ये असंभव है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वाम दल अंधाधुंध निजीकरण का विरोध करते रहे हैं और वर्तमान आर्थिक संकट इसी की देन है.

पश्चिम बंगाल के बारे में वो चाहते हैं कि एक मिश्रित अर्थव्यवस्था हो जिसमें उद्योग धंधे बड़ी कंपनियां खोलें लेकिन आधारभूत ढांचे में, बैंकिंग सेक्टर और अन्य ऐसे क्षेत्रों में सरकार का दखल हो.

तो क्या ये नेहरू की मिश्रित अर्थव्यवस्था नहीं है? वो हंसते हैं, और कहते हैं, "नेहरु की नीतियां ठीक थीं लेकिन मनमोहन सिंह तो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की नीतियां चलाते हैं. वो ग़लत है."

ग़लतियों से सीख

 अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी. हमारा मुख्य उद्देश्य अभी बीजेपी और कांग्रेस को हराना है. परिणामों के बाद पार्टी की बैठक होगी जिसमें हम परिस्थिति देखेंगे और ये भी कि वाम दलों की कितनी सार्थक भूमिका हो सकती है किस सरकार में
 
बुद्धदेव भट्टाचार्य

मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि वाम दल ग़लतियों से सीख रहे हैं.

उनका कहना था, "साम्यवाद कठिन परिस्थितियों से गुज़र रहा है. चीन ने बदलाव किए हैं रुस की ग़लतियों से सीख कर. हम चीन, दक्षिण अमरीका, सबसे सीख रहे हैं और ग़लतियों से सीखना ही चाहिए."

तो उनकी नई नीति क्या है बंगाल के लिए? वो कहते हैं, "हमने भूमि सुधार किए. अब हम चाहते हैं कि उद्योग आए. विदेशी निवेश हो. सब लोग टाटा के बारे में जानते हैं लेकिन ये नहीं जानते कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल में सात स्टील कारखाने खुल रहे हैं."

लेकिन सिंगुर और नंदीग्राम में क्या सरकार से ग़लतियां हुई?

वो कहते हैं, "सिंगुर में सबकुछ हो चुका था. कारखाना बन चुका था. कुछ ही दिनों में कार उत्पादन होने वाला था. तब कुछ महिलाओं ने विरोध करना शुरु किया. लोकतंत्र है. मैं उन्हें मना नहीं कर सकता था."

क्या उन्हें नैनो की फैक्ट्री न खुलने का दुख है, इसके जवाब में मुख्यमंत्री कहते हैं,"बुरा तो लगा था लेकिन हमने चीन की ऑटोमोबाइल कंपनी से बात की है और उनका कारखाना लग जाएगा पश्चिम बंगाल में जल्दी ही."

और नंदीग्राम में जहां जानें गईं, उन्हें लगता है कि ग़लती हुई है. वो कहते हैं, "मिला जुला सा अनुभव होता है. दुख भी होता है, बुरा भी लगता है. वहां लोगों की जानें गईं. अगर मुझे पता होता कि पुलिस के जाने के बाद वहां फायरिंग हो सकती है तो मैं कभी भी पुलिस को नहीं भेजता. मेरा काम लोगों पर गोली चलाना नहीं हैं. मैं बातचीत करता."

वो स्पष्ट करते हैं कि नंदीग्राम के पास नयाचल में नई पेट्रोकेमिकल्स फैक्ट्री भी खुल रही है.

आर्थिक नीति

बुद्घदेव ने पश्चिम बंगाल के विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस की कड़ी आलोचना की और कहा कि तृणमूल पूरे देश में सबसे नकारात्मक और विध्वंसक विपक्षी दल है.

पश्चिम बंगाल में वामपंथ बदल रहा है. वो कहते हैं कि चीन में भी विचारधारा अब मुख्यधारा नहीं रही है लेकिन जब भी मौका मिलता है वाम दल ये बताने से नहीं चूकता कि विचारधारा के मामले में वो पश्चिम से बेहतर हैं.

कुछ ऐसा ही बुद्धदेव के साथ बैठक में भी हुआ. वो आर्थिक सुधारों के एक अलग चेहरे की, विदेशी निवेश की और औद्योगीकरण की बात करते रहे और साथ ही उनका यह भी दावा था कि पश्चिम बंगाल के छात्र आज भी मानते हैं कि पूंजीवाद मानव इतिहास का आखिरी पन्ना नहीं हो सकता है.

 
 
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