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मंगलवार, 21 अप्रैल, 2009 को 09:38 GMT तक के समाचार
 
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'बीमार समाज का इलाज करेगी पीस पार्टी'
 

 
 
पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ अय्यूब
पीस पार्टी का असर बस्ती मंडल में ही ज़्यादा दिखाई दे रहा है
रात क़रीब 12 बजे हैं. दुकानें बंद हो गई हैं और कुत्ते भौंकने लगे हैं. इलाहाबाद से खलीलाबाद तक का सफ़र करके हम थक गए हैं. लेकिन फिर भी हम इंतज़ार कर रहे हैं डॉक्टर मोहम्मद अय्यूब का जो मुसलमानों की नई बनी 'पीस पार्टी' के नेता हैं.

गोरखपुर के बड़हलगंज कस्बे के रहने वाले 53 वर्षीय डॉक्टर अय्यूब लिवर के सर्जन हैं. लेकिन पिछले एक साल की राजनीति में उन्होंने इस इलाके के मुसलमानों में अपनी गहरी पैठ बना ली है.

पिछले तीन घंटों के इंतज़ार में लोगों से बात करके इस बात का अहसास हुआ कि मुस्लिम समुदाय के लोग मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, और बहुजन समाज पार्टी इन तीनों से मायूस है. इसीलिए उन्हें डॉक्टर अय्यूब की पार्टी में अपनापन नज़र आता है और वह उनको आज़माने की बात कह रहे हैं.

फिर भी मुसलमानों का एक तबका कह रहा है कि बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती के साथ जुड़े रहने में ही फ़ायदा है.

पिछले आम चुनावों में यहाँ से भालचंद यादव बहुजन समाज पार्टी से जीते थे मगर चुनाव के बाद दल-बदल करके समाजवादी पार्टी मे आ गए थे. फिर उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी के भीष्म शंकर उर्फ़ कुशल तिवारी जीते और भालचंद हार गए.

इस बार भालचंद समाजवादी पार्टी से लड़ रहे हैं और यादव बहुल इलाकों में उनकी पकड़ बरकरार है. इन दोनों के अलावा कांग्रेस के फ़ज़ले मसूद और भारतीय जनता पार्टी के शरद त्रिपाठी भी मैदान में हैं.

भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता

पीस पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अब तक 25 प्रत्याशी खड़े किए हैं. जबकि पाँच और प्रत्याशी खड़े करने का इरादा है.

 डॉक्टर अय्यूब की पीस पार्टी ने कई उम्मीदवार सांप्रदायिकता के आधार पर खड़े किए हैं और उनकी पार्टी मुख्य रूप से एक ही मज़हब के हितों के लिए बनी है
 
वरिष्ठ पत्रकार मज़हर आज़ाद

दिल्ली के कुछ मुसलमान नेता भी इस पार्टी के साथ हैं इसलिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश से भी उसके उम्मीदवार हैं. लेकिन उसका असर बस्ती मंडल में ही ज़्यादा दिखाई दे रहा है.

हालांकि पीस पार्टी भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता से लड़ने की बात करती है लेकिन उसके परचों में इस बात पर ज़ोर है कि वह मुसलमानों के नेतृत्व वाली उनकी अपनी पार्टी है.

रणनीति के तौर पर पीस पार्टी ने कई हिंदू उम्मीदवार भी खड़े किए हैं. खलीलाबाद के राजेश सिंह उनमें से एक हैं.

रात 12 बजते बजते डॉक्टर अय्यूब और उनके साथियों की गाड़ियों का काफ़िला महदावल चौराहे पर हमारे पास आकर रुका.

चौराहे पर भीड़भाड़ देखकर मजिस्ट्रेट और पुलिस की जीप भी वहाँ सायरन बजाते हुए आ गई.

दुआ सलाम करके डॉक्टर अय्यूब से बातचीत शुरू हुई तो मेरा पहला सवाल था, "आप एक अच्छे भले डॉक्टर हैं. प्रेक्टिस छोड़कर राजनीति मे क्यों आए?"

बड़ी बीमारी

उनका जवाब था, "समाज बीमार है, उसके इलाज के लिए." डॉक्टर अय्यूब भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और जातिवाद को बड़ी बीमारी मानते हैं.

क्षेत्र में गश्त करती सरकारी गाड़ी
पार्टी के परचों में इस पर ज़ोर है कि वह मुसलमानों के नेतृत्व वाली उनकी ही पार्टी है.

मैंने उनसे पूछा, "आपका एजेंड़ा इतना व्यापक है तो फिर ऐसा क्यों है कि आपसे मुसलमान ही ज़्यादा आकर्षित हो रहे हैं."

उनका जवाब था, "जो जिस समाज का होता है, वहीँ के लोग उनसे ज़्यादा आकर्षित होते हैं. जैसे चमार जाति के लोग मायावती से जुड़े हैं और यादव मुलायम सिंह से."

लोगों की बातों का हवाला देते हुए मैंने उनसे पूछा कि लोग उन्हें वोट कटवा पार्टी कहते हैं.

डॉक्टर अय्यूब के अनुसार, "ऐसा नहीं है. उनका मानना है कि पीस पार्टी के कई उम्मीदवार मुख्य मुक़ाबले में हैं."

डॉक्टर अय्यूब की बात अपनी जगह लेकिन वरिष्ठ पत्रकार मज़हर आज़ाद कहते हैं कि डॉक्टर अय्यूब की पीस पार्टी ने कई उम्मीदवार सांप्रदायिकता के आधार पर खड़े किए हैं और उनकी पार्टी मुख्य रूप से एक ही मज़हब के हितों के लिए बनी है.

मज़हर आज़ाद का कहना है कि पीस पार्टी जिस तरह मुसलमानों के वोट काट रही है उससे अंततः भारतीय जनता पार्टी का फ़ायदा हो सकता है और पूर्वांचल के इस हिस्से में बीजेपी को अपनी ज़मीन वापस पाने में मदद मिल सकती है.

उग्र हिंदुत्व की प्रतिक्रिया

प्रेक्षकों का कहना है कि इस इलाक़े में पीस पार्टी ने कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी, तीनों की नींद उड़ा दी है क्योंकि यह तीनों पार्टियाँ अपनी जीत के लिए मुस्लिम मतों पर निर्भर रहती हैं.

 गोरखपुर के फ़ायर ब्रांड भारतीय जनता पार्टी के नेता योगी आदित्यनाथ ने इस इलाके में कई सालों से उग्र हिंदुत्व का जो अभियान चलाया है, उसी की प्रतिक्रिया में मुस्लिम समुदाय उलेमा काउंसिल और पीस पार्टी जैसी मुस्लिम परस्त पार्टियों से जुड़ रहा है.
 
प्रेक्षक

प्रेक्षकों का यह भी कहना है कि गोरखपुर के फ़ायर ब्रांड भारतीय जनता पार्टी के नेता योगी आदित्यनाथ ने इस इलाके में कई सालों से उग्र हिंदुत्व का जो अभियान चलाया है, उसी की प्रतिक्रिया में मुस्लिम समुदाय उलेमा काउंसिल और पीस पार्टी जैसी मुस्लिम परस्त पार्टियों से जुड़ रहा है. और यह पार्टियाँ योगी की ही तरह की आक्रामक शैली का ही इस्तेमाल कर रही हैं.

पीस पार्टी ने जो उम्मीदवार उतारे हैं, उनमें से कई धनबल वाले हैं. और एकाध पर आपराधिक केस भी चल रहे हैं.

कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि चुनाव लड़ने लड़ाने के लिए पीस पार्टी के पास इतना पैसा कहाँ से आया?

दिल्ली से प्रकाशित एक साप्ताहिक अखबार में इस तरह की ख़बर छपी है कि मुस्लिम वोटरों के कांग्रेस की ओर बढ़ते झुकाव को रोकने के लिए भारतीय जनता पार्टी पीस पार्टी और उसके उम्मीदवार की परदे के पीछे से मदद कर रही है.

अखबार में यह भी छपा है कि पीस पार्टी की इस मुहिम के पीछे दिल्ली के कुछ मुस्लिम नेताओं और भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी के कुछ क़रीबी सलाहकारों का दिमाग़ काम कर रहा है.

यह भी कहा जा रहा है कि क्योंकि बस्ती मंडल की तीनों सीटें बहुजन समाज पार्टी ने जीती थीं, इसलिए बसपा का दलित मुस्लिम गठजोड़ रोकने के लिए समाजवादी पार्टी भी इस मुहिम को हवा दे रही है. हालांकि अब पीस पार्टी समाजवादी पार्टी के लिए काफ़ी नुकसानदेह हो गई है.

सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने मंगलवार को बस्ती और खलीलाबाद की जनसभाओं में पीस पार्टी का ज़िक्र करते हुए मुस्लिम समुदाय को आगाह किया कि उनका वोट कटने से भाजपा का फ़ायदा होगा.

श्री यादव ने फिर से सफ़ाई दी कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को कमज़ोर करने के लिए ही कल्याण सिंह से हाथ मिलाया है.

 
 
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