BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
रविवार, 19 अप्रैल, 2009 को 08:10 GMT तक के समाचार
 
मित्र को भेजें   कहानी छापें
बिहार में चुनाव का 'साइड इफ़ेक्ट'
 

 
 
शादी की एक गाड़ी
बिहार में चुनाव ड्यूटी के लिए बड़ी तादाद में निजी वाहनों को ज़ब्त किया जाता है
बिहार में आजकल शादी-ब्याह का मौसम है लेकिन शादियाँ टाली जा रही हैं. अगर बारात निकली तो दुल्हे की सवारी दुल्हन के घर तक पहुंचेगी, ये तय नहीं. लोगों के मुंह से सिर्फ़ यही निकल रहा है... 'चुनाव जो न कराए'.

लड़की पक्ष को तो इसकी चिंता नहीं है लेकिन वर पक्ष वाले बेचारे परेशान हैं. क्योंकि कोई भी ट्रेवल एजेंसी अपनी गाड़ी, चाहे कार हो या बस, भाड़े पर देने को तैयार नहीं है. सबके सब सात मई तक का इंतज़ार करने को कह रहे हैं. उसी दिन बिहार में आख़िरी चरण का मतदान है.

इस समय चुनाव ड्यूटी लिए बड़े पैमाने पर गाड़ियाँ ज़ब्त की जा रही हैं. चाहे निजी गाड़ी हो या टैक्सी, आजकल सड़क पर गाड़ी निकालने के बजाए लोग घर में ही गाड़ी रखना पसंद कर रहे हैं.

चिंता की बात यह कि अगर आपने गाड़ी निकाली तो सड़कों पर कहीं भी पुलिस की गाड़ी मिल सकती है और उसमें बैठे अधिकारी तुरंत आपकी गाड़ी पर पोस्टरनुमा आदेशपत्र चिपका देते हैं. इसमें चुनाव ड्यूटी के लिए किस तारीख़ को कितने बजे पहुंचना है, इसका विवरण होता है.

आस्था ट्रेवल्स के पिंकू का कहना है, "हम लोग गाड़ी भाड़े पर नहीं दे रहे हैं. अगर ज़ब्त हो गई तो गाड़ी का क्या हाल होगा पता नहीं. सरकार को चाहिए था कि पर्यवेक्षकों, सुरक्षाकर्मियों और ईवीएम मशीनों को ढोने के लिए अपनी ओर से व्यवस्था करती या फिर गाड़ी मालिकों को उचित पैसे का भुगतान करती."

टल रही है शादियाँ

ज़ब्त की गई गाड़ी
सरकारी अधिकारी के ज़रिए ज़ब्त की गई गाड़ी

प्रशासन बारात की गाड़ियों तक को नहीं बख़्श रहा है. मुज़फ़्फ़रपुर से सटे कमतौल गांव में शिवपूजन शर्मा शादी के लिए निकले, लेकिन बारात पहुँचने से पाँच किलोमीटर पहले ही उनके भाड़े की गाड़ी पकड़ ली गई. चालक ने विरोध किया तो गाड़ी उसी समय वहीं ज़ब्त कर ली गई.

शिवपूजन के पिता जी कहते हैं, "हम लोगों ने किसी तरह लड़की वालों तक ये ख़बर पहुँचाई और उन्हीं के गांव से किसी तरह गाड़ी का इंतज़ाम किया गया."

कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि बारातियों से लदी गाड़ी पकड़ ली गई और वापसी में उन्हें सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का इस्तेमाल करना पड़ा.

कुछ लोगों ने पहले से तय शादियों की तारीख़ भी आगे खिसका दी है. मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के बरूराज के रहने वाले राजू ने अपनी बहन की शादी 17 अप्रैल से बढ़ा कर 10 मई कर दी है.

लेकिन गाड़ी ज़ब्त होने से चालक खुश हैं. मैंने ट्रैवल एजेंसी में ही काम करने वाले एक स्थानीय ड्राइवर उमेश से इसका कारण पूछा, "हमें तो हर दिन सौ-डेढ़ सौ रूपया भी मिलता है और डीज़ल में भी इधऱ-उधर हो जाता है. लेकिन मालिक को कुछ भी नहीं मिलता."

लेकिन जो लोग अपनी कार ख़ुद ही चलाते हैं, उनमें से अधिकांश ने अपनी गाड़ी बाहर निकालना बंद कर दिया है. कुछ लोगों ने तो अपने गैराज में ही गाड़ी के पहिए निकाल कर अलग रख दिए हैं ताकि पुलिस अगर घर भी पहुंच जाए तो जवाब दिया जा सके कि गाड़ी ख़राब है.

 
 
रानी पाल 'माँ की गांधीगिरी'
इलाहाबाद की एक महिला बेटे के कथित क़ातिल के ख़िलाफ़ चुनाव मैदान में है.
 
 
मायावती बसपा के नारों का दम!
बसपा के रोज़ बदलते नारों के बारे में जनता की राय का एक विश्लेषण.
 
 
सुशील कुमार मोदी 'विकास हमारा मुद्दा है'
सुशील मोदी का कहना है कि वो उपलब्धियों को लेकर चुनाव मैदान में हैं.
 
 
पूर्वांचल में चुनाव प्रचार पूर्वांचल में चुनाव
राजनीतिक रूप से परिपक्व पूर्वांचल में विकास नहीं बन पाया चुनाव प्रचार में मुद्दा.
 
 
वीएस आचार्य ऐसा भी होता है...
भाजपा के नेता वीएस आचार्य कांग्रेस की रैली संबोधित करने पहुँच गए.
 
 
इससे जुड़ी ख़बरें
भारत का आम चुनाव: आँकड़ों में
06 अप्रैल, 2009 | चुनाव 2009
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें   कहानी छापें
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>