बलात्कार पीड़िता को मिला 'शहीद' का दर्जा

  • 25 अगस्त 2014

पंजाब में बरनाला ज़िले के महिल कलां गांव में लगा यह बोर्ड ध्यान खींचता है जिस पर लिखा है 'शहीद बीबी किरणजीत कौर मार्ग.'

पंजाबी में किसी लड़की या महिला को आदर से बीबी कहा जाता है, लेकिन यह किरणजीत कौन हैं जिन्हें शहीद का दर्जा दिया गया है?

महिल कलां और सहिजड़ा गांवों के बीच बनी इस सड़क पर महिल कलां से थोड़ा आगे थाने के सामने से एक कच्चा रास्ता जाता है.

इसी रास्ते पर तकरीबन दो किलोमीटर आगे खेतों में किरणजीत कौर का घर बना है.

इंसाफ़ की लड़ाई

इसी रास्ते पर रोज़ साइकिल से मास्टर दर्शन सिंह आते-जाते हैं. किरणजीत कौर उन्हीं की बड़ी बेटी का नाम है.

किरणजीत कौर उस वक़्त सत्रह साल की थीं जब भारत की आज़ादी की 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही थी और पंजाब में लड़कियों की भ्रूण हत्या पर बहस छिड़ी थी.

किरणजीत कौर का कॉलेज से लौटते वक़्त 29 जुलाई 1997 को बलात्कार के बाद क़त्ल कर दिया गया था. पंद्रह दिन बाद खेत में दबी उनकी लाश मिली थी.

इलाक़े के किसान, मज़दूर, मुलाज़िम और छात्र संगठनों ने इंसाफ पाने के लिए एक्शन कमेटी बनाई गई. अभियुक्तों को अदालत ने दोषी करार दिया और उम्र कैद की सज़ा सुनाई.

पिछले 17 साल में इस कमेटी ने महिला उत्पीड़न के हर मामले पर संघर्ष किया है.

घटना जो लहर बन गई

किरणजीत कौर की 17वीं बरसी 12 अगस्त को मनाई गई.

किरणजीत कौर को स्त्री मुक्ति का प्रतीक मानते हुए हज़ारों लोग इस मौके पर महिल कलां की अनाज मंडी पहुंचे.

मास्टर दर्शन सिंह बताते हैं कि उन्हें गांव छोड़ देने की सलाह कई रिश्तेदारों से लेकर दोस्तों ने दी है पर उन्हें इसी गांव में सिर उठा कर जीना है.

एक्शन कमेटी के समन्वयक गुरविंदर सिंह कहते हैं कि यह औरत की मुक्ति की लड़ाई है जो एक घटना से लहर बन गई है.

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