उत्तर प्रदेश: 'आज़म की भैंसों' पर फिर बवाल

  • 22 अगस्त 2014
आज़म ख़ान

उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री और तेज़ तर्रार नेता आज़म खान की भैंसें राज्य की पुलिस के लिए लगातार बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.

कुछ दिनों पहले उनकी सात भैंसें रामपुर में जब गुम हुईं तो महकमे के लिए यह ख़ासा सिरदर्द बन गया था.

अब 'मंत्री जी' के लिए पंजाब से नई भैंसें आई हैं. दावा किया जा रहा है कि एक बार फिर प्रशासनिक अमले को इन्हें रामपुर तक पहुंचवाने जैसी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा.

पुलिस ने मारी बाज़ी

मगर पहला बड़ा काम था भैंसों की देख-रेख और उनके लिए चारे के इंतज़ाम का. बताया गया है कि इसमें पुलिसवालों ने बाज़ी मार ली.

पुलिस के सूत्रों का कहना है कि जिले के गागलहेड़ी थाने के भवन के पीछे ही इन भैंसों के रहने और चारे का इंतज़ाम किया गया था. फिर इन्हें रामपुर भेजने की व्यवस्था की गई. वो भी पुलिस सुरक्षा में.

हालाँकि सहारनपुर के एक नेता सरफ़राज़ ख़ान ने ये कहा है कि भैंसें उन्होंने आज़म ख़ान के लिए बतौर तोहफा मंगवाईं और भैंसें पंजाब से लाई गईं.

बीबीसी से बातचीत में सरफ़राज़ ख़ान ने इस बात का खंडन किया कि पुलिस महकमे को इन भैंसों की तीमारदारी में लगाया गया.

उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि भैंसों को सुरक्षा घेरे में रामपुर पहुंचाया गया.

पुलिस सुरक्षा

उनका कहना है कि वह श्रम विभाग की एक कमेटी में हैं और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त है. इसलिए उन्हें पुलिस सुरक्षा मिली हुई है न की भैंसों को. चूँकि वो खुद भैंसों को लेकर रामपुर गए इसलिए उनके सुरक्षा कर्मी उनके साथ थे.

उन्होंने कहा, "आज़म ख़ान एक कद्दावर नेता हैं. इसलिए उन्हें बदनाम करने के लिए इस तरह की बातें फैलाई जाती हैं. भैंसें मैंने खरीदीं. आज़म ख़ान मेरे बड़े भाई हैं. भैंसें मेरी हैं और मैं इन्हें तोहफे में किसी को भी दे सकता हूँ."

सहारनपुर की एक सीट पर उपचुनाव होने वाले हैं. भैंस पर छिड़े ताज़े विवाद के बाद विपक्ष को ख़ासा मुद्दा मिल गया है.

भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में प्रशासन मंत्रियों की तीमारदारी में ही लगा रहता है जबकि आम लोगों के काम नहीं हो पा रहे हैं.

उसका कहना है कि राज्य में जिसकी लाठी है, उसी की भैंस भी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार