ई-कारोबारी 'खा जाएंगे' छोटे दुकानदारों को?

  • 15 अगस्त 2014

भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर फ़्लिपकार्ट ने हाल में अपने कारोबार के लिए एक अरब डॉलर जुटाने की घोषणा की तो अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के ऑनलाइन रिटेलर अमेज़न ने दो अरब डॉलर के निवेश की घोषणा कर डाली.

इस तरह से ऑनलाइन कारोबार में अरबों डॉलर के निवेश के बाद इस कारोबार को रफ़्तार मिलने की संभावना है.

लेकिन इसका पूरे भारत में फैले हुए छोटे दुकानदारों और खुदरा व्यापार पर क्या असर होगा?

पढ़ें प्रशांतो कुमार रॉय का विश्लेषण

ऑनलाइन कारोबार की दुनिया में फ़्लिपकार्ट का निवेश सबसे बड़े निवेशों में एक है. हालांकि इससे ज़्यादा निवेश यूबर और फ़ेसबुक ने किया है.

मगर फ़्लिपकार्ट की घोषणा के अगले ही दिन अमेज़न ने भारत में अपने कारोबार के लिए दो अरब डॉलर के निवेश की घोषणा कर दी. अमेजन के सीईओ जेफ़ बेज़ोस ने कहा, "हम भारत में काफी संभावनाएं देख रहे हैं. हम यहां तेज़ी से एक अरब डॉलर की बिक्री का आंकड़ा पार कर लेंगे."

स्नैपडील भारत का दूसरा बड़ा ई-रिटेलर है. इसने ई-बे से हाथ मिलाया हुआ है, जो भारतीय बाज़ार में स्वतंत्र रूप से भी अपनी जगह तलाश रहा है.

अरबों डॉलर का युद्ध

वॉलमार्ट भी भारत के ई-कारोबार की दुनिया में घुसने की तैयारी में है, जबकि अमेज़न ने पिछले ही साल भारतीय बाज़ार में प्रवेश किया है.

अमेज़न के भारत प्रमुख अमित अग्रवाल न तो निवेश की समय सीमा और न एक अरब डॉलर की बिक्री पूरा करने की समय सीमा के बारे में कुछ कहते हैं, जिसे फ़्लिपकार्ट बीते साल ही पार कर चुका है.

फ़्लिपकार्ट की शुरुआत 2007 में अमेज़न के दो पूर्व कर्मचारी सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने की थी. दोनों अभी महज़ 32 साल के हुए हैं.

उन्होंने किताबें बेचनी शुरू कीं, फिर इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे उत्पाद बेचने शुरू किए. फ़्लिपकार्ट के एक करोड़ पंजीकृत उपभोक्ता हैं.

हर दिन कंपनी एक लाख उत्पादों की आपूर्ति करती है. हालांकि कंपनी को नुक़सान उठाना पड़ रहा है. मार्च 2013 में ख़त्म हुए वित्तीय साल में 1180 करोड़ रुपए की कंपनी को 282 करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ था.

ट्रेवल पोर्टल मेक माय ट्रिप के सह संस्थापक दीप कालरा फ़्लिपकार्ट की रणनीति से प्रभावित हैं. उन्होंने कहा, "उन्होंने प्रतिस्पर्धा का स्तर बढ़ा दिया है. यह आसान नहीं है."

दीप कालरा आगे कहते हैं, "फ़्लिपकार्ट ने इसे बड़े पैसों से लड़ा जाने वाला युद्ध बना दिया है."

अधिग्रहण पर ज़ोर

मगर इससे फ़्लिपकार्ट को क्या फ़ायदा होगा? अमरीका स्थित कनान पार्टनर फ़ंड के भारतीय ऑपरेशन प्रमुख अलोक मित्तल के मुताबिक़ शायद फ़्लिपकार्ट मार्केटिंग और बाज़ार को विकसित करने में पैसा खर्च करे.

मित्तल के मुताबिक़ फ़्लिपकार्ट दूसरी कंपनियां खरीद सकती है. मई में फ़्लिपकार्ट ने मायएनटीआरए डॉट कॉम के अधिग्रहण में 30 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं. कंपनी ऐसे दूसरे अधिग्रहण भी कर सकती है.

फ़्लिपकार्ट के सह संस्थापक और सीईओ सचिन बंसल ने ईमेल से भेजे जवाब में कहा कि कंपनी का उद्देश्य भारत में ई-कारोबार के लिए इको सिस्टम बनाने का है, क्योंकि देश में 50 करोड़ से ज़्यादा लोग अगले पांच साल में ऑनलाइन होने वाले हैं.

सचिन बंसल ने कहा, "हज़ारों उद्यमियों के ऑनलाइन होने से हमें लॉजिस्टिक और भुगतान संबंधी समस्याएं दूर करनी होंगी. इसके लिए हमें तकनीक के क्षेत्र में बड़े निवेश की ज़रूरत है. इससे ऑनलाइन शॉपिंग की दुनिया बदल जाएगी और हम भारत की सबसे बड़ी कंपनी बन जाएंगे."

फ़्लिपकार्ट में नए निवेश के बाद इसकी क़ीमत छह से सात अरब डॉलर के बीच पहुंच गई है, भारत की सबसे बड़े रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ़ से भी ज़्यादा. वेंचर कैपिटल फ़र्म सीड फंड के इंवेस्टर महेश मूर्ति बताते हैं कि हर निवेश के बाद फ़्लिपकार्ट कहता है कि उसे उपक्रम जारी रखने के लिए ज़रूरी पैसा मिल गया है. इसके बाद वे फिर से नया निवेश शुरू कर देते हैं.

56 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी

बहरहाल रेटिंग और एनेलिटिक्स फ़र्म क्रिसिल के मुताबिक़ पिछले साल भारत का कुल रिटेल बाज़ार 23 ख़रब रुपए का था. इसके मुक़ाबले ऑनलाइन रिटेल बाज़ार सिर्फ़ 0.5 फ़ीसदी है. मगर पिछले सात साल से यह 56 फ़ीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा है. अगले साल तक इसके 8.3 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.

ज़ाहिर है, इससे परंपरागत रिटेल कारोबारी चिंतित हैं. तकनीकी और टेलीकॉम क्षेत्र के कई कारोबारियों को अपने कारोबार में 35 फ़ीसदी की गिरावट तक दिखी है.

इसी साल अगस्त के पहले शनिवार को रिटेल कारोबारियों की बड़ी बैठक दक्षिण दिल्ली के एक होटल में हुई, जिसके आयोजक तकनीकी संघ पीसीएआईटी के मुताबिक़ घरेलू तकनीकी बाज़ार में 80 फ़ीसदी राजस्व वाले कारोबारी इसमें शामिल हुए.

इन्होंने अपना राष्ट्रीय वेब पोर्टल तैयार करने पर सहमति जताई.

ऑनलाइन खरीददारी करने वाले दिल्ली के गौरव बांका कहते हैं, "स्नैपडील पर सस्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद और जबोंग पर सस्ते कपड़े खरीदता हूं. बात सस्ते भर की नहीं. हम बेचने वाले की प्रतिष्ठा और डिलीवरी के समय का ध्यान रखते हैं."

गुड़गांव के एक इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम क्रोमा में मुझे 23 साल की रितु शर्मा मिलीं. जो यूएसबी हार्ड ड्राइव, मेमरी स्टिक और फ़ोन के लिए पावरपैक तलाश रही थीं.

आधे घंटे बाद उन्होंने अपना आईफ़ोन निकाला और तीनों चीज ऑनलाइन खरीद लीं. मैंने पूछा ऐसा क्यों तो उनका जवाब था कि मैंने 1400 रुपए बचा लिए हैं.

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