'पता नहीं कौन कहां घात लगाए बैठा है'

  • 24 जुलाई 2014
बलात्कार विरोधी प्रदर्शन

बेंगलुरू के एक प्रतिष्ठित स्कूल में एक छह साल की बच्ची से कथित बलात्कार के बाद कई बड़े स्कूलों में सुरक्षा उपायों की समीक्षा शुरू हो गई है.

कई जगह अभिभावक और स्कूल मैनेजमेंट साथ बैठे और बच्चों के लिए सुरक्षा कड़ी करने पर चर्चा की और बच्चों से यौन शोषण के संभावित अपराधियों से निपटने के लिए क़ानूनी सलाह मांगी.

मुंदकुर लॉ पार्टनर्स में वरिष्ठ साझीदार दिव्या बालगोपाल कहती हैं, "यह मामला अभिभावक बनाम प्रबंधन नहीं है. सच तो यह है कि स्कूल भी हिले हुए हैं."

बिशप कॉटन्स गर्ल्स हाईस्कूल की प्रिंसिपल प्रिंसिस फ्रैंकलीन कहती हैं, "आपको कभी अंदाज़ नहीं लग सकता कि विकृत मानसिकता का कोई व्यक्ति कहाँ घात लगाए बैठा है. इसलिए ज़रूरत है लगातार हरकत में रहने की."

छह साल की बच्ची के कथित बलात्कार मामले में अभियुक्त दो स्कूल शिक्षक हैं, इनमें से एक स्केटिंग इंस्ट्रक्टर को गिरफ़्तार कर लिया गया है जबकि दूसरा फ़रार है.

गुड टच, बैड टच

बलात्कार आरोपी

उस स्कूल ने बच्चों की सुरक्षा से संबंधित अभिभावकों की 40 मांगों को तब माना जब लोगों ने स्कूल का बहिष्कार जारी रखा.

स्कूल कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए स्कूल कई तरीक़े अपना रहे हैं.

फ़्रेंकलिन कहती हैं, "हमारे यहां तो ज़्यादातर सिफ़ारिशें चर्च से आती हैं. फिर भी हम कर्मचारियों के बर्ताव पर कड़ी नज़र रखते हैं."

कुछ स्कूल कर्मचारियों की पुलिस जांच भी करवाते हैं. लेकिन इन्वेंचर एकेडमी की सीईओ, नूरीन फ़ज़ल कहती हैं, "हम लोग अपने संदर्भों से भी शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की जांच करते हैं."

सामाजिक कार्यकर्ता विद्या दिनकर कहती हैं, "अक्सर बच्चे जिन पर विश्वास करते हैं वही बलात्कारी निकलते हैं."

एक प्रतिष्ठित स्कूल की प्रिंसिपल ने कहा, "नर्सरी से ही हम बच्चों को सिखाते हैं कि गुड टच और बैड टच क्या होता है."

बलात्कार प्रदर्शन

एक अन्य स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया, "पूरे स्कूल में लगाए गए क्लोज़ सर्किट टीवी को हम अब घर से भी देखने की आदत डाल रहे हैं."

जिस स्कूल में कथित बलात्कार हुआ उसके एक कर्मचारी के मुंह से यह सुनकर अभिभावक सकते में आ गए कि अगर किसी बच्चे को स्कूल में कुछ हो जाता है तो स्कूल की किसी तरह की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है.

इसकी वजह है वो दस्तावेज़ जिस पर इस स्कूल में दाखिले से पहले अभिभावकों के हस्ताक्षर कराए गए थे. इस दस्तावेज़ के मुताबिक स्कूल में बच्चों को अगर कुछ हो जाए तो ज़िम्मेदारी स्कूल की नहीं.

हालांकि दिव्या बालगोपाल कहती हैं, ''ज़्यादातर स्कूलों में इस तरह के क्लॉज़ नहीं हैं क्योंकि स्कूल खुद अपने स्तर पर ऐसा कोई नियम नहीं बना सकते जो किसी भी तरह भारतीय दंड संहिता या आईपीसी के विरुद्ध हो.''

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