छत्तीसगढ़: 'सांस का दुश्मन' बना एक पेड़

  • 22 जुलाई 2014

छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में लगाए गए सप्तपर्णी यानी एल्सटोनिया स्कोलारिस के पेड़ों को लेकर विवाद शुरू हो गया है.

राजधानी रायपुर समेत राज्य के दूसरे शहरों में भी पिछले कुछ वर्षों में लाखों की संख्या में ये पेड़ लगाए गए हैं लेकिन राज्य में एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जो मानता है कि इस पेड़ के कारण अस्थमा के रोगियों को भारी परेशानी हो रही है.

यही कारण है कि लोगों ने इन पेड़ों को काटना भी शुरू कर दिया है.

आयुर्वेद और कृषि के जानकार प्रदीप शर्मा कहते हैं, “डेविल ट्री के नाम से मशहूर यह पेड़ सदाबहार होता है लेकिन इस पेड़ पर तो चिड़िया भी नहीं बैठती."

वो कहते हैं, "यह श्वास रोगियों के लिए अत्यंत घातक है. छाती में भारीपन और दूसरी परेशानियां भी इस पौधे के कारण होने की आशंका रहती है.”

श्वास रोगियों के लिए समस्या

'कैपिटल प्रोजेक्ट' में रहते हुए सप्तपर्णी का बड़ी मात्रा में वृक्षारोपण करवाने वाले भोपाल वन विहार के उप निदेशक डॉक्टर सुदेश वाघमारे का भी मानना है कि इस पेड़ की गंध अत्यंत तीक्ष्ण होती है, इसलिए श्वास रोगियों को इससे परेशानी हो सकती है.

लेकिन डॉक्टर वाघमारे कहते हैं कि किसी भी पेड़ में जब परागण की प्रक्रिया होती है तो ऐसा होता है.

वहीं रायपुर के रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में लाइफ साइंस विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर एके पति की राय है कि यह पौधा कई रोगों में काम आता है.

लेकिन अपने घर के सामने से ऐसा पौधा कटवाने वाली रायपुर की सुगंधा देवांगन का कहना है कि इस पौधे के कारण न केवल उन्हें श्वास की परेशानी होने लगी थी, बल्कि उनके कई जान-पहचान वालों ने भी इसके बारे में उन्हें बताया था.

रायपुर की मेयर डॉक्टर किरणमयी नायक कहती हैं, "यह पेड़ बहुत तेज़ी से बढ़ता है और हमेशा हरा-भरा रहता है, इसलिए हम लोगों ने इसे कुछ जगहों में लगवाया था. हम इसके दुष्प्रभावों की जानकारी लेंगे और आवश्यक क़दम भी उठाएंगे."

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