मुक़ाबला माओवादियों से, पर 'वेतन है कम'

  • 20 जुलाई 2014

छत्तीसगढ़ के माओवादी इलाके में तैनात छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के जवानों ने आरोप लगाया है कि दूसरे जवानों के मुकाबले कम वेतन और भत्ते में काम करना पड़ रहा है.

इन जवानों की नाराज़गी सरकार के पुलिस विभाग के ताज़ा आदेश को लेकर भी है जिसमें जवानों को हर महीने मिलने वाले 805 रुपए के आवास भत्ता को रद्द कर दिया गया है.

इतना ही नहीं, पिछले पांच सालों में उन्हें दिए गए आवास भत्ते की वसूली के भी आदेश जारी किए गए हैं.

इस मामले में दिलचस्प पहलू ये है कि राज्य के गृहमंत्री को इसकी भनक तक नहीं है.

गृह मंत्री रामसेवक पैंकरा ने बीबीसी से कहा, "माओवाद प्रभावित इलाकों में जवानों की सुविधा और बढ़ाए जाने की ज़रूरत है. सुविधाओं को कम नहीं किया जाना चाहिए. मैं इस विषय में जानकारी लूंगा.”

हालांकि सरकार के ताज़ा आदेश से माओवाद प्रभावितइलाकों में तैनात कम से कम 10 हज़ार जवान प्रभावित होंगे.

कम होगा हौसला

छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के जवानों को माओवाद प्रभावित बस्तर जैसे इलाकों में केवल 15 से 20 प्रतिशत का जोख़िम भत्ता मिलता है जबकि राजधानी रायपुर में विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा में लगे जवान 50 फीसदी जोखिम भत्ता पाते हैं.

इसके अलावा माओवाद प्रभावित इलाकों में केंद्रीय सुरक्षा बल और दूसरे जवानों को जहां हर महीने 2000 रुपए से अधिक का भोजन भत्ता मिलता है, वहीं छत्तीसगढ़ सुरक्षा बल के जवानों को केवल 650 रुपये दिए जाते हैं.

पुलिस सुधारों की पहल के लिए चर्चित कई राज्यों के पुलिस महानिदेशक रहे प्रकाश सिंह कहते हैं, “छत्तीसगढ़ में पुलिसकर्मियों की काम करने की परिस्थितियां बहुत ही कठिन हैं. जवान कभी भी नक्सलियों की वारदात में मारे जाते हैं. उन्हें जो भत्ता मिलता था, वह बंद नहीं होना चाहिए.”

राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक रामनिवास भी मानते हैं कि ऐसे क़दमों से जवानों के हौसले पर फ़र्क पड़ता है.

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