BBC navigation

नरेंद्र मोदी ब्राज़ील से क्या लाएँगे?

 मंगलवार, 15 जुलाई, 2014 को 07:34 IST तक के समाचार
ब्रिक्स देशों के राष्ट्रध्वज

ब्राज़ील में हो रहा ब्रिक्स शिखर सम्मलेन प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का पहला महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दौरा है.

यह ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीक़ा का संयुक्त मंच है.

इस यात्रा में मोदी पहली बार इन देशों के प्रमुखों से मुलाक़ात करेंगे. अपने दो दिवसीय दौरे के पहले दिन ही उनकी दो महत्वपूर्ण बैठकें हैं.

इस सम्मेलन के दौरान पाँच ऐसे मुद्दे हैं जो भारत की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेंगे.

इस यात्रा से नरेंद्र मोदी को क्या हासिल हो सकता है? जानने के लिए पढ़िए ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष समीर सरन का विश्लेषण.

रिश्ते बेहतर करने का मौक़ा

नरेंद्र मोदी, भारत के प्रधानमंत्री

यूक्रेन के मुद्दे पर रूस और यूरोपीय संघ के बीच एक तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. वहीं पूर्वी एशिया के दूसरे देशों के साथ चीन के रिश्ते तनावपूर्ण चल रहे है.

ऐसे में रूस, चीन और भारत के संबंध काफ़ी महत्वपूर्ण हो जाते हैं.

सम्मलेन के बहाने द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने का भी मौक़ा मिलेगा, चाहे वो भारत चीन के रिश्ते हों या भारत और रूस के बीच.

ब्रिक्स वित्तीय संस्थान?

जील्मा रूसेफ़

ब्रिक्स देशों के पास अब यह अच्छा मौक़ा है जब वो अपना एक अलग वित्तीय संस्थान और विकास का एक अलग मॉडल बना पाएं.

इस बार उम्मीद की जा रही है कि सम्मलेन के दौरान कंटिंजेंसी फ़ंड, ब्रिक्स विकास बैंक के गठन की औपचारिक घोषणा हो जाए.

जो देश इस तरह के कंटिंजेंसी फ़ंड का समर्थन कर रहे हैं वो वर्ल्ड बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ की मुख्य धारा में नहीं हैं.

आपसी व्यापार

व्लादीमिर पुतिन, रूस

व्यापार तीसरा बड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि अमरीका और यूरोपीय संघ के बीच खुले व्यापार का समझौता होने वाला है.

अगर यह समझौता हो जाता है तो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 66 प्रतिशत आपस में सम्मिलित हो जाएगा.

इस समझौते का भारत, चीन, रूस और दक्षिण अफ़्रीक़ा पर असर पड़ेगा.

अमरीका और यूरोपीय संघ के बीच समझौता ब्रिक्स देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है क्योंकि यह विश्व व्यापार संगठन की अहमियत को कम करने वाला है.

क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता

शी जिनपिंग

क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है.

पश्चिमी एशिया में हालात काफ़ी चिंताजनक हैं. अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी काफ़ी कड़वाहट है. अमरीकी फ़ौजें इस साल अफ़ग़ानिस्तान से वापस जा रही हैं.

भारत को अपने आर्थिक विकास के लिए इलाक़े में क्षेत्रीय स्थिरता और राजनीतिक शांति चाहिए.

भारत के लिए यह ज़रूरी होगा कि चीन और रूस इसमें उसका सहयोग करें.

पिछले पाँच सालों की समीक्षा

जैकब ज़ुमा, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति

यह ब्रिक्स देशों की छठी बैठक है.

यह मौक़ा है जब भारत को पिछले पांच सालों में अपनी उपलब्धियों की समीक्षा करनी चाहिए, उसके बाद भविष्य की रणनीति तय होनी चाहिए.

लैटिन अमरीका के देशों से संबंध बढ़ाने का भी यह अच्छा मौक़ा है क्योंकि भविष्य में ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए हमें इन्हीं देशों की तरफ़ देखना पड़ेगा.

(बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए क्लिक करें यहां क्लिक करें. आप हमें क्लिक करें फ़ेसबुक और क्लिक करें ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.