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सोनिया और राहुल गांधी अदालत में तलब

 गुरुवार, 26 जून, 2014 को 15:54 IST तक के समाचार
सोनिया, राहुल गांधी

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अंग्रेज़ी अख़बार नैशनल हैरल्ड से संबंधित एक मामले में तलब किया है.

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक़ मैट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट गोमती मनोचा ने समन जारी करते हुए कहा, "मुझे सभी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ प्राथमिक सबूत मिले हैं. अदालत उन्हें सात अगस्त को हाज़िर होने का निर्देश देती है."

अदालत ने कुछ जाने-माने कांग्रेस नेताओं और एक वरिष्ठ पत्रकार को भी समन जारी किया है.

नेशनल हैरल्ड को प्रकाशित करने वाली कंपनी दि एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड की स्थापना 1938 में हुई थी. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा शुरू किया गया यह अख़बार 2008 में बंद हो गया था. नवगठित कंपनी यंग इंडिया ने 2010 में इसका अधिग्रहण कर लिया था.

अदालत ने यह आदेश बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका पर दिया है जिसमें राहुल और सोनिया पर विश्वासघात कर संपत्ति हड़पने और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है.

'ब्याज मुक्त ऋण'

बीबीसी से बात करते हुए स्वामी ने आरोप लगाया कि एसोसिएटेड जर्नल नाम की कंपनी की संपत्ति लेने के लिए कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ रुपये बतौर ऋण दिए थे जो ग़ैरक़ानूनी है. उन्होंने कहा, "कोई राजनीतिक दल इस तरह का क़र्ज़ नहीं दे सकता है, क्योंकि यह आयकर अधिनियम का उल्लंघन है. "

सुब्रह्मण्यम स्वामी

सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका पर सोनिया, राहुल को समन जारी किया गया है.

स्वामी का कहना था "नैशनल हैरल्ड अख़बार के बंद होने के बाद कंपनी की संपत्ति पर ग़ैर क़ानूनी तरीके से क़ब्ज़ा कर लिया गया. यंग इंडियंस नाम की एक कंपनी बनाई गई. इस मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और मोतीलाल वोहरा, सुमन दुबे सहित 6 लोगों को मैंने अपनी याचिका में अभियुक्त बनाया है."

इस मामले में पार्टी का बचाव करते हुए 2012 में कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा था कि 'कानून का पालन करते हुए अख़बार (नेशनल हैरल्ड) को दुरुस्त करने में एसोसिएट जर्नल की मदद की प्रक्रिया शुरू कर' कांग्रेस ने 'अपने कर्तव्य का पालन' किया है.

पार्टी का कहना था कि उसने यह मदद 'ब्याज मुक्त ऋण के रूप में दी थी जिससे कांग्रेस को कोई व्यावसायिक फ़ायदा नहीं हुआ था.'

इससे पहले दिल्ली की अदालत ने सोमवार को रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़ को आदेश दिया था कि वह नेशनल हैरल्ड अख़बार के विवादित अधिग्रहण से संबंधित रिकॉर्ड्स पेश करे.

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