BBC navigation

मोदी की जीत से ग़ैर-एनडीए राज्यों की बढ़ी धड़कनें?

 शनिवार, 17 मई, 2014 को 20:21 IST तक के समाचार
नीतीश कुमार, पृथ्वीराज चव्हाण, हरीश रावत, हेमंत सोरेन

बिहार में लोकसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड(जेडीयू) के ख़राब प्रदर्शन के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. हालांकि उन्होंने बिहार के राज्यपाल से विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश नहीं की है.

पिछले साल तक भाजपा के साथ मिलकर राज्य में सरकार चला रही जेडीयू के पास भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद भी बिहार विधानसभा में पर्याप्त विधायक थे. इसके बावजूद अपने विधायकों को दल बदलने से रोक पाना जेडीयू के आगे बड़ी चुनौती थी.

नरेंद्र मोदी की अगुआई में भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत मिलने के बाद नज़रें बिहार समेत उन राज्यों की तरफ़ उठ गई हैं, जहां भारतीय जनता पार्टी विधानसभा में विपक्ष में है, लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजे भाजपा के पक्ष में आए हैं.

इन राज्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दलबदल की राजनीति से जूझना और विधानसभा सत्र पूरा करना है.

खतरे में उत्तराखंड सरकार?

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री हरीश रावत की अगुआई में कांग्रेस की सरकार है, जबकि विपक्षी भारतीय जनता पार्टी भी काफ़ी मज़बूत स्थिति में है.

वहीं लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सभी पांच सीटों पर जीती है. पहले ये सभी पांच सीटें कांग्रेस के पास थीं.

विजय बहुगुणा, हरीश रावत

देहरादून में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार शिव जोशी का मानना है कि उत्तराखंड सरकार को लेकर आशंका तो बनी हुई है, लेकिन कोई ख़तरा फ़ौरी तौर पर नहीं है.

उन्होंने कहा, "सतपाल ने हरीश रावत से इस्तीफ़ा मांगा है. भाजपा ने अपनी तरफ़ से हरीश रावत की सरकार के बारे में कुछ नहीं कहा है. उनका कहना है कि ये सरकार अपने आप ही गिर जाएगी. हालांकि जो भाजपा के तीन मुख्यमंत्री रह चुके हैं, वो अब सांसद बन चुके हैं. ज़ाहिर है और ताक़त उन्हें मिल चुकी है. लिहाज़ा हरीश रावत के लिए हर दिन चुनौती से भरा हुआ है."

उत्तराखंड की कुल 70 विधानसभा सीटों में से 33 पर कांग्रेस का क़ब्ज़ा है, जबकि विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के पास 30 सीटें हैं. तीन-तीन सीटें बहुजन समाज पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों की है, जबकि एक सीट उत्तराखंड क्रांति दल के पास है.

महाराष्ट्र में ‘अंदरूनी कलह’

महाराष्ट्र में अगले कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन इससे पहले ही कांग्रेस-एनसीपी के सत्तारूढ़ गठबंधन में फूट के आसार दिख रहे हैं.

आठ से चार लोकसभा सीटों पर सिमटी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ख़राब प्रदर्शन के लिए कांग्रेस की सरकार और केंद्र में उसके शासन को ज़िम्मेदार ठहरा रही है. खुद कांग्रेस की भी सीटें अप्रत्याशित तौर पर कम होकर 17 से दो पर पहुंच गई है.

मुंबई में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार समर खड़से के अनुसार ख़ुद कांग्रेस के विधायकों के बीच ही मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है.

शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन

समर खड़से ने बीबीसी से कहा, "ऐसे एक नतीजे के बाद मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ जो माहौल बनेगा, वो स्वाभाविक है और इसका असर दिखना शुरू भी हो चुका है. दो मंत्री अपना इस्तीफ़ा दे चुके हैं और कई जगह से पार्टी के भीतर यह सुनाई देना शुरू हो गया है कि अगर इस मुख्यमंत्री को लेकर अगले चुनाव में कांग्रेस उतरती है, तो उसे हार का मुंह देखना पड़ सकता है."

लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल शिवसेना को राज्य की 48 में से 41 सीटों पर जीत हासिल हुई है.

ऐसे में राज्य की कांग्रेस (82 विधायक) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (62) गठबंधन सरकार पर भी इसका असर पड़ सकता है. ख़तरा यह भी है कि कहीं कांग्रेस या एनसीपी के विधायक टूट न जाए.

झारखंड का 'संघर्ष'

झारखंड में भारतीय जनता पार्टी का विजय रथ रोकने में सिर्फ दो ही उम्मीदवार सफल रहे. दुमका में झारखंड मुक्ति मोर्चा के शिबू सोरेन जीते, तो राजमहल से उन्हीं की पार्टी के ही विजय हंसदक जीते, जिन्हें ख़ुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजमहल के लिए चुना था.

14 में से 12 लोकसभा सीटों पर जीती भाजपा की स्थिति विधानसभा में भी मज़बूत है.

झारखंड में सरकार बनाए रखने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा को विधानसभा में 39 सीटें चाहिए और उसके पास कागज़ पर इतने विधायकों का समर्थन है भी लेकिन इसे बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार को ख़तरा बरक़रार है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए क्लिक करें यहां क्लिक करें. आप हमें क्लिक करें फ़ेसबुक और क्लिक करें ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.