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दलाल स्ट्रीट को चाहिए 'बहुमत की सरकार'

 बुधवार, 14 मई, 2014 को 07:55 IST तक के समाचार
दलाल स्ट्रीट, क़तार के पहले, हर्षद मेहता

कारोबारी दिन ख़त्म होते ही बीएसई की प्रतिष्ठित इमारत के बाहर मशहूर दलाल स्ट्रीट पर दलालों की भीड़ लग जाती है. चाय की चुस्की और सिगरेट के कश भरते कई दलाल नज़र आते हैं.

बीएसई के कई दफ़्तरों से निकलकर जब ये दलाल बाहर आते हैं, तो एक आज़ाद पंछी से नज़र आते हैं. ऐसे ही एक दलाल से मैं मिला, जब नाम पूछा तो यक़ीन नहीं हुआ.

"मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूँ, मेरा नाम हर्षद मेहता है. वह एक बड़ा दलाल था, मैं एक छोटा-मोटा सब ब्रोकर हूँ." मुझे इस इत्तेफाक़ पर यक़ीन नहीं हुआ.

ये हर्षद मेहता 25 साल से शेयर बाज़ार से जुड़े हैं और उन्होंने यहाँ बदनाम और अब दुनिया से गुज़र चुके हर्षद मेहता को भी काम करते देखा है.

हर्षद बताते हैं, "मेरे इस नाम की सज़ा मुझे मिल चुकी है. एक बार एक कंपनी के कुछ शेयर मैं खरीदना चाहता था. जब मैंने अप्लाई किया, तो उस कंपनी ने मुझे शेयर देने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि मैं वह धोखेबाज़ हर्षद हूँ."

भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में हर्षद कहते हैं, "जो उम्मीदें कांग्रेस से थीं, वो उन पर खरी नहीं उतरी. जबकि यूपीए सरकार के पास अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह थे, फिर वित्त मंत्री पी चिदंबरम जैसे दिग्गज लोगों के होने के बाद भी अर्थव्यवस्था का बुरा हाल हुआ."

पिछले कुछ दिनों में भारतीय शेयर बाज़ार में उछाल देखा गया है. बाज़ार में आई इस तेज़ी के बारे में हर्षद मेहता बताते हैं, "मार्केट को उम्मीद है कि मोदी सरकार आएगी. उसी के आधार पर बाज़ार गति पकड़ता नज़र आया. साथ ही बाज़ार में इस समय विदेशी निवेश भी हो रहा है."

हर्षद ने हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में वोट डालकर हिस्सा लिया है. वह बदलाव की चाह रखते हैं.

हर्षद ने कहा, "बदलाव मेरे एक वोट से नहीं होता. देश भर में मोदी लहर है. उन्होंने लोगों को इम्प्रेस तो किया है. आशा है कि वह भ्रष्टाचार कम करेंगे और इसीलिए शायद कई राज्यों में जहाँ उनके 60 प्रतिशत सीटें जीतने की उम्मीद थी, वह अब 70-75 फ़ीसदी हो चुकी है. जो गुजरात में उनका काम करने का मॉडल है, अगर उसका 20 फ़ीसदी भी देश भर में आ जाए, तो सबको फ़ायदा होगा."

क्रूर है शेयर बाज़ार

दलाल स्ट्रीट, मुंबई

हर्षद की बात से बिलकुल अलग सोचना है शंकर शर्मा का. शंकर शर्मा भी शेयर दलाली के व्यापार में 25 साल से हैं. शंकर की कंपनी फ़र्स्ट ग्लोबल भारत की जानी-मानी शेयर ब्रोकिंग कंपनी है.

शंकर का मानना है, "भारत की राजनीति से स्टॉक मार्केट का कोई लेना-देना नहीं है. अगर आप बीएसई सेंसेक्स की टॉप 30 कंपनियों में सबका पैसा लगा दो, तो यह स्टॉक मार्केट आज की तारीख में तीन गुना हो जाएगा. अगर ग़रीबों से रोटी छीन कर अमीरों को दे दोगे, तो मार्केट पाँच गुना हो जाएगा. भारत में अगर टॉप 30 कंपनियों की जेबें भर दी जाएँ तो ये बाज़ार आसमां छू जाएगा."

मोदी के विरोधी शंकर शर्मा का कहना है कि यूपीए सरकार की नीतियाँ और इस सरकार से जुड़े लोग काफी सशक्त हैं, एक अच्छी सरकार चलाने के लिए.

दलाल स्ट्रीट

'स्टॉक मार्केट से फ़र्क पड़ता है'

"भारत की 1.25 अरब की आबादी में से सिर्फ़ तीन प्रतिशत ही ऐसी जनता है, जो शेयर बाज़ार में निवेश करती है. मगर इसके उतार-चढ़ाव से पूरे देश को फ़र्क पड़ता है. किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का हाल उसके शेयर बाज़ार से पता लगता है. 2002-2003 से भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ, जिससे शेयर बाज़ार में कई बदलाव हुए, पर 2008 का दौर शेयर बाज़ार और निवेशकों के लिए बुरा समय था, जब लोगों की पूँजी यहाँ से गायब हुई. कांग्रेस के 10 साल में पहले पाँच साल अच्छे रहे, पर बाद के साल बुरे रहे क्योंकि रणनीतियों और नियमों के लिए वे कुछ नहीं कर पाए, जिससे विदेशी निवेशक यहाँ आ नहीं पाए."

गौरांग शाह, उपाध्यक्ष, बीएनपी पारिबा

शर्मा कहते हैं, "अगर कांग्रेस सरकार फिर आती है तो मैं उत्साहित रहूँगा क्योंकि उनके शासनकाल में ग़रीबों की आमदनी बहुत बढ़ी है. 20 फ़ीसदी लोग ग़रीबी रेखा से ऊपर उठे हैं. पिछले 10 वर्षों में उन्होंने क़र्ज़ कम किया है, अर्थव्यवस्था बेहतर हुई है."

मोदी के बारे में शंकर कहते हैं, "उन्होंने गुजरात का प्रचार अच्छा किया है. ये सिर्फ़ प्रचार की जीत है. भारत में और कई ऐसे राज्य हैं, जहाँ तरक़्क़ी गुजरात से ज़्यादा हुई है. बस वहां के मंत्रियों ने अपना प्रचार नहीं किया. दो-चार सड़कें बनाने से आप चुनाव तो नहीं जीत पाओगे. देश को साथ लेकर चलने वाला चाहिए. हमें सांसद नहीं, सेवक चाहिए".

उम्मीद पर बाज़ार बढ़ रहा है

सरकार और स्टॉक मार्केट के बीच का रिश्ता जितना दूर का है, उतना ही नज़दीक का है.

ये मानना है गौरांग शाह का, जो बहुराष्ट्रीय कंपनी जियोजित बीएनपी परिबा के उपाध्यक्ष हैं.

गौरांग का कहना है, "सट्टेबाज़ी से जोड़े जाने वाले इस बाज़ार में लोग निवेश ही इसीलिए करते हैं ताकि वे अपनी पूँजी को बढ़ता देख सकें. जिसके लिए एक वातावरण होना बहुत ज़रूरी है. इस वातावरण को बनाने के लिए एक स्थिर सरकार और उसकी नीतियों की ज़रूरत है."

बीते दिनों सेंसेक्स और निफ़्टी के रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ों को देखते हुए गौरांग का कहना है, "एक उम्मीद पर बाज़ार बढ़ता दिख रहा है. नाकाम और कमज़ोर यूपीए-2 से शेयर बाज़ार काफ़ी मायूस था. मगर अब जैसे-जैसे चुनाव परिणाम का दिन क़रीब आ रहा है, तो गौरांग को लगता है कि अगर बीजेपी 250 से ज़्यादा सीटों पर क़ब्ज़ा कर लेती है, तो आने वाले पाँच सालों के लिए भारतीय शेयर बाज़ार ज़्यादा दुरुस्त और मज़बूत हो जाएगा."

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