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असम में मरने वालों की संख्या 30 पहुँची

 शनिवार, 3 मई, 2014 को 15:20 IST तक के समाचार
असम हिंसा

असम में जातीय हिंसा में मरने वालों की संख्या समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ 30 हो गयी है. हिंसा प्रभावित इलाक़ों में कर्फ़्यू जारी है और दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश हैं.

बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टासाली ने बताया कि बक्सा ज़िले के नारायणगुड़ी गाँव से शनिवार सुबह आठ शव बरामद हुए हैं जिनमें बच्चे और महिलाएं शामिल हैं. इनमें चार शव बच्चों के हैं. साथ ही तीन अन्य बच्चों को बचाया गया है.

इससे पहले शुक्रवार को इसी गाँव से 12 शव बरामद हुए थे. हिंसा के पहले दिन गुरुवार को कोकराझार और बक्सा ज़िलों में दस लोग मारे गए थे. कोकराझार ज़िले में सात और बक्सा ज़िले में तीन लोग मारे गए थे.

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इस मामले में पाँच वन सुरक्षा गार्डों और वन रेंज़र को इस मामले में गिरफ़्तार किया गया है.

गिरफ़्तारी

स्थानीय लोगों का कहना है, वन सुरक्षा गार्डों ने चरमपंथियों की मदद की है और गार्डों ने भी ग्रामीणों के ऊपर गोलियाँ चलायी. गिरफ़्तार किए गए गार्ड और रेंज़र्स बोडो आदिवासी समुदाय से संबंधित है.

कोकराझार और बक्सा ज़िलों में 22 लोगों को इस सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया है. इनमें से आठ कोकराझार ज़िले से और 14 बक्सा ज़िले से है.

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आर एम सिंह ने बताया कि नारायणगुड़ी गांव में कम से कम 36 घरों को जला दिया गया है. यह गांव मानस नेशनल पार्क के पास है. मारे गए सभी लोग एक ही संप्रदाय के हैं और कथित तौर पर उन्हें बोडो आदिवासियों ने निशाना बनाया.

घरों में आग लगने के बाद बाहर निकलते लोगों पर हमलावरों ने गोलीबारी शुरू कर दी. हालांकि शुक्रवार रात से बोडोलैंड क्षेत्र में हिंसा की कोई ताज़ा घटना नहीं हुई है.

कर्फ़्यू

भारतीय समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में सेना गश्त कर रही है और केंद्र से अर्धसैनिक बलों की दस कंपनियां भी मांगी गई हैं.

हिंसाग्रस्त इलाक़ों में कर्फ़्यू जारी है और दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश हैं. कोकराझार और चिरांग ज़िलों में रात के वक़्त कर्फ़्यू में थोड़े समय के लिए ढील दी गयी है लेकिन बक्सा ज़िले में कोई ढील नहीं दी गयी है.

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इस बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दंगों पर दुख जताते हुए कहा कि असम में दंगे होना दुर्भाग्यपूर्ण है.

हिंसा के ख़िलाफ़ असम में कई जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इस बीच नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के संगबिजित गुट के प्रमुख ने दंगे में शामिल होने से इनकार किया है.

असम में फौज

असम पुलिस के मुताबिक़ हमलावरों ने गुरुवार रात कोकराझार और बक्सा ज़िलों में दो स्थानों पर अंधाधुंध फ़ायरिंग की .

दंगे

ये दोनों ज़िले बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) में शामिल हैं, जहां दो साल पहले भी बोडो आदिवासियों और बंगाली मुसलमानों के बीच बड़े पैमाने पर दंगे हुए थे.

बोडो आदिवासियों का आरोप है कि सीमा पार बांग्लादेश से आने वाले मुसलमान अवैध क्षेत्र में बसे हुए हैं. यह क्षेत्र भूटान सीमा के पास स्थित है.

बांग्लादेश से आकर भारत में बसने वाले लोगों की समस्या इस चुनाव में मुख्य चुनावी मुद्दा है और प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि 16 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अवैध प्रवासियों को वापस भेज दिया जाएगा.

पुलिस का दावा है कि इस हिंसा का चुनाव से कोई संबंध नहीं है. इस संसदीय क्षेत्र में 24 अप्रैल को वोट डाले गए थे.

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