साहेब प्रकरण: 16 मई से पहले जज का नाम घोषित हो जाएगा

  • 2 मई 2014
कपिल सिब्बल

गुजरात में एक महिला की उच्च स्तर पर जासूसी कराने का मसला तूल पकड़ने लगा है. केंद्र सरकार ने कहा है कि इस मामले में जांच के लिए जज का नाम 16 मई से पहले ही तय कर दिया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि इस मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी शामिल किया जाता रहा है और आरोपों के अनुसार उन्हीं के कहने पर एक महिला की जासूसी हो रही थी.

शुक्रवार को केंद्रीय क़ानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि गुजरात के 'स्नूपगेट' मामले में सरकार 16 मई से पहले जज का नाम तय कर देगी.

साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी नेता अरुण जेटली के उस दावे को भी ख़रिज़ कर दिया जिसमें कहा गया था कि नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए 'राजनीतिक और बुरी नीयत' से की जा रही कार्यवाही में कोई भी जज शामिल नहीं होना चाहेगा.

सिब्बल का कहना था, ''16 मई से पहले स्नूपगेट मामले में जज के नाम पर फ़ैसला ले लिया जाएगा. मैं नहीं समझ पा रहा कि ये लोग क्यों डरे हुए हैं. भाजपा के नेता क्यों डरे हुए हैं और वे क्यों सार्वजनिक बयान दे रहे हैं कि जांच आयोग में किसी भी जज को शामिल नहीं होना चाहिए.''

उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता इस तथ्य को जानते हैं कि आयोग का गठन हो जाने के बाद मोदी के लिए कोई रास्ता नहीं बचेगा.

उन्होंने कहा, ''क्योंकि इस बात के दस्तावेजी सबूत हैं कि उन्होंने (मोदी) क्या किया है और किस तरह उन्होंने एक युवती की गतिविधियों की जासूसी की.''

सिब्बल ने कहा, ''…केंद्र द्वारा राष्ट्रीय आयोग के गठन से वे डरे हुए हैं और मैं समझता हूं कि उन्हें लगातार डरे रहना चाहिए क्योंकि आयोग का गठन किया जाएगा.उनकी जांच की जाएगी और उन्हें जेल भेजा जाएगा.''

'कोई जज नहीं मिला'

अरुण जेटली

उन्होंने गुजरात सरकार द्वारा जासूसी के मामले में जांच समिति के गठन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह जांच कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएगी क्योंकि इसका आदेश देने वाले मुख्यमंत्री पर ही अभियोग है.

सिब्बल के अनुसार ''गुजरात सरकार की जांच समिति की जांच नानावती आयोग की तरह ही आगे नहीं बढ़ पाएगी. 12 वर्ष गुजर चुके हैं. हमें कोई भी रिपोर्ट नहीं मिल पाई. यह है गुजरात सरकार की उपलब्धियों का रिकॉर्ड. इसलिए हमें राज्य सरकार से किसी चीज की उम्मीद नहीं है.''

सिब्बल का यह बयान भाजपा नेता अरुण जेटली के उस बयान के बात आया है जिसमें कहा गया था कि कोई भी जज इस ''राजनीतिक और बुरी नीयत'' से की जा रही कार्रवाई में न्यायिक प्रतिष्ठा को देखते हुए खुद को शामिल नहीं करेगा.

जेटली ने कहा था कि संप्रग सरकार द्वारा संपर्क किए गए सभी जजों ने नई सरकार बनने से एक पखवाड़े पहले हताशा में उठाए जा रहे कदम में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है.

गुरुवार को एक लेख में अरुण जेटली ने लिखा था, ''मैं उस जज का नाम जानने के लिए बहुत उत्सुक हूं जो संप्रग का साथ देने के लिए सहमत हुए हैं. मुझे आश्चर्य होगा यदि कोई तैयार होता है. मुझे उम्मीद है कि न्यायिक प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए कोई भी इस हताशा में की जा रही कार्रवाई में भागीदार नहीं बनेगा.''

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