पंजाब: "नशा ना करने वाले वर ढूंढना हुआ मुश्किल"

  • 27 अप्रैल 2014
लुधियाना, नशे के ख़िलाफ़ अभियान

लुधियाना शहर के सालेम टापरी, तीरू बंधा का इलाका. यहाँ लोगों का एक समूह घर-घर घूम रहा है. मगर इस जमात में शामिल लोग वोट नहीं मांग रहे हैं.

ये लोगों से उन प्रत्याशियों को नकारने की अपील कर रहे हैं जो वोट के लिए नशे का प्रलोभन देते हैं.

इस मोहल्ले में हर दूसरे घर की कहानी दिल दहला देने वाली है. यह इलाक़ा गवाह है पंजाब में फैली नशाखोरी का.

इस मोहल्ले में तक़रीबन हर तीसरे या चौथे घर के एक नौजवान की मौत नशे के चलते हो चुकी है.

'मौत का कारोबार'

यहाँ गुरुद्वारे से जुड़े लोगों को घर-घर जाकर यह अपील करने पर मजबूर होना पड़ा कि वे वोट के लिए नशीले पदार्थ का लालच देने वालों का बहिष्कार करें.

दोपहर का वक़्त है और इन लोगों के हुजूम के पीछे-पीछे मैं भी हो लिया. पहला पड़ाव है गुरुद्वारा, जहाँ मेरी मुलाक़ात मागू की बूढी माँ से हुई. अपने 30 साल के बेटे की मौत के बाद ये पूरी तरह टूट चुकी हैं.

मागू की माँ
मागू की बूढी माँ अपने 30 साल के बेटे की मौत से पूरी तरह टूट चुकी हैं.

गुरुद्वारे में ही मेरी मुलाक़ात वयोवृद्ध महिला प्रकाश कौर से हुई, जिनका जवान बेटा हंसराज सिंह काला भी नशे के काल का शिकार हो गया. अब इन बूढ़ी हड्डियों को अपनी बहू और बच्चों का बोझ भी उठाना पड़ रहा है.

गुरुद्वारे के आस-पास के घरों में भी इस तरह के किस्से आम हैं. बूढ़े माँ-बाप नशे की लत की वजह से खो चुके अपने बच्चों को याद कर बिलख उठते हैं.

ये लोग पूछते हैं कि आख़िर कौन हैं वो लोग, जो पंजाब में इस तरह की मौत का कारोबार फैला रहे हैं.

'खोखला होता युवा'

हालांकि उन्हें ये पता है कि ये धंधा बिना सबकी मिलीभगत से नहीं चल सकता. हाल ही में पंजाब पुलिस ने 750 करोड़ रुपए की हेरोईन बरामद की थी. चुनाव के दौरान इस तरह की बरामदगी से एक बात तो साफ़ हो गई है कि किस तरह वोट हासिल करने के लिए नशे का प्रलोभन दिया जा रहा है.

डॉक्टर इंद्रजीत सिंह
डॉक्टर इंद्रजीत सिंह के मुताबिक़ 15 साल से 50 साल तक की उम्र के लोग नशे की चपेट में आ रहे हैं.

'माहातर साथी जागृति मंच' नाम के एक स्वयंसेवी संगठन से जुड़े कीमती रावल ने बताया कि नौजवानों में नशे की बढ़ रही लत के बाद हालात यहां तक पहुँच चुके हैं कि लड़कियों की शादी के लिए ऐसा लड़का मिलना मुश्किल हो गया है जो नशा न करता हो.

रावल कहते हैं, "शहर का 70 प्रतिशत युवा नशे की चपेट में है. लोगों में इसकी लत बढ़ती जा रही है, क्योंकि इसका कारोबार फल-फूल रहा है. नशे की वजह से पंजाब का युवा वर्ग खोखला होता जा रहा है."

इस बार राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को मज़बूर होकर लोगों के बीच कसमें खानी पड़ रहीं हैं कि वो नशे के ख़िलाफ़ अभियान चलाएंगे.

मुश्किल है नशे का विरोध

इस अभियान में शामिल अनुराधा शर्मा बताती हैं कि लोगों के बीच नशे के ख़िलाफ़ जागृति पैदा करना दरअसल एक टेढ़ी खीर है, क्योंकि इसका जाल इतना बड़ा है कि उसे भेदना मुश्किल होता चला जा रहा है. वो कहती हैं कि नशे की लत की वजह से परिवार के परिवार तबाह हो रहे हैं.

लुधियाना में नशे के ख़िलाफ़ अभियान
लुधियाना में नशे के कारोबार से लोग काफ़ी चिंतित हैं.

मोहल्ले में ही स्थित एक अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर इंदरजीत सिंह का कहना है कि पहले लोग अफ़ीम के नशे तक ही सीमित थे. मगर कुछ सालों से हेरोईन, स्मैक, चरस जैसे नशीले पदार्थों का चलन बढ़ गया है. ये नौजवानों को इतना खोखला कर दे रहा है कि वो ज़्यादा दिन जी भी नहीं पा रहे हैं.

लुधियाना के दो बड़े अस्पतालों में रोज़ सौ के आस-पास नशे की लत वाले मरीजों का इलाज किया जाता था. अब ये संख्या दो सौ के ऊपर पहुँच चुकी है.

इंदरजीत सिंह कहते हैं कि नशे का सेवन करने वाले पहले तीस से ज्यादा की उम्र के लोग हुआ करते थे, लेकिन अब 15 साल के किशोर भी इसके शिकार होने लगे हैं.

कैसे बंद हो नशे का धंधा?

वो कहते हैं, "पहले लोग गोलियां या खांसी की दवाएं लेकर नशा किया करते थे. इससे मौतें उतनी नहीं होती थीं. मगर सिंथेटिक ड्रग्स के आने के बाद माहौल काफ़ी ख़तरनाक हो गया है."

प्रकाश कौर
प्रकाश कौर अपने बेटे की मौत के बाद बहू और बच्चों की जिम्मेदारी उठा रही हैं.

डॉक्टर इंदरजीत सिंह और सालेम टापरी के रहने वालों का कहना है कि नशे का धंधा बिना सरकारी अधिकारी और नेताओं की मिलीभगत के नहीं फल-फूल सकता. मगर लोग मजबूर हैं. वो खुद अपने स्तर पर इनके ख़िलाफ़ कोई कारवाई नहीं कर सकते.

तंग आकर लोगों ने 'माहातर साथी जागृति मंच' की अगुवाई में सर्वोच्च धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ से मुलाक़ात की और उनसे अनुरोध किया कि कमेटी एक हुक्मनामा ज़ारी करे ताकि नशे का धंधा पंजाब में पूरी तरह बंद हो जाए.

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