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यूपी चुनावी दंगल के पांच 'दबंग'

 गुरुवार, 24 अप्रैल, 2014 को 12:59 IST तक के समाचार

लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के द्वारा सुरक्षा और राजनीति के अपराधिकरण को मुद्दा तो बनाया गया है लेकिन इसके प्रति उनकी गंभीरता कितनी है ये तो कुछ इन उम्मीदवारों के परिचय से ज़ाहिर होता है.

मुख़्तार अंसारी

मुख्तार अंसारी

मुख़्तार अंसारी की पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीति से जुड़ी है, उनके दादा अपने ज़माने में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रह चुके थे. लेकिन मुख़्तार को पूर्वी उत्तर प्रदेश में 'बाहुबली’ का दर्जा लगभग 20 वर्ष पहले ही मिल चुका था.

मऊ विधान सभा क्षेत्र से 1996 में पहली बार चुनाव जीतने के बाद मुख़्तार अंसारी फिलहाल चौथी बार विधायक हैं और अब घोसी संसदीय सीट से ख़ुद बनाई गई पार्टी क़ौमी एकता दल से लोक सभा चुनाव लड़ रहे हैं.

अंसारी पर कम से कम पांच हत्याओं के आरोप हैं और पिछले आम चुनावों की तरह ही वे जेल में रहते हुए चुनाव लड़ने वाले हैं. 2007 में उन्हें बसपा में शामिल करने के बाद मायावती ने 2010 में पार्टी से ये कह कर निष्कासित किया था कि, "उन पर अभी ग़ैर कानूनी गतिविधियों मैं लिप्त होने के प्रमाण हैं."

मुख़्तार के दो भाई अफ़ज़ल और सिबाकतउल्लाह अंसारी क़ौमी एकता दल को मुख़्तार की ग़ैरमौजूदगी में चलाते हैं.

धनंजय सिंह

धनंजय सिंह

1990 के दशक में धनंजय सिंह लखनऊ विश्विद्यालय में अक्सर पाए जाते थे और उनके मित्र मुझे बताते थे कि उन्हें अंग्रेज़ी उपन्यास पढ़ने का शौक़ है.

जौनपुर के रहने वाले इस सांसद की राजनीति और 'दबंगई' का सफ़र जौनपुर से शुरू हुआ जहाँ से पहले वो विधायक रहे और फिर सांसद. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान सम्बन्धी एक घोटाले से जुड़ी एक हत्या में उनका नाम भी आया.

2011 में जौनपुर में दो बसपा नेताओं की हत्या के मामले में भी उन पर आरोप लगे. सबसे ताज़ा आरोप दिल्ली स्थित उनके निवास में एक नौकरानी की कथित प्रताड़ना और हत्या का लगा जिसमे उन्हें और उनकी पत्नी को हिरासत में भी रखा गया.

मायावती ने 2014 के चुनाव के ठीक पहले फिर से उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया. फिलहाल धनंजय सिंह निर्दलीय की हैसियत से चुनाव मैदान में हैं लेकिन सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में ही उन पर 10 से ज़्यादा आपराधिक मामले अदालतों में चल रहे हैं.

अतीक़ अहमद

अतीक अहमद

51 वर्षीय अतीक़ अहमद 2004 के लोकसभा चुनावों में फूलपुर की ऐतिहासिक सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद चुने गए थे.

वे 2014 के आम चुनावों में सपा की ओर से पहले सुल्तानपुर से अपना भाग्य आज़माने वाले थे लेकिन बाद में उन्हें श्रावस्ती से टिकट दिया गया. अतीक़ जब शक्ति प्रदर्शन के सिलसिले में सुल्तानपुर पहुंचे थे तो उनके काफ़िले में हथियारबंद लोगों से लैस गाड़ियों की तादाद 200 से ऊपर बताई गई थी.

एक ज़माने में अतीक़ अहमद पर 40 से भी ज़्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे जिनमें हत्या, हत्या की साज़िश, अपहरण और फिरौती के मामले शामिल थे. क्योंकि किसी भी मामले में उन्हें अभी तक दोषी नहीं पाया गया है इसलिए वे साल 2009 के चुनाव में अपना दल के उम्मीदवार थे, हालांकि उसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

डीपी यादव

डीपी यादव

धरम पाल यादव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे अमीर राजनेताओं में से एक हैं. शरफाबाद, नोएडा में एक किसान परिवार में जन्मे डीपी यादव पहले एक डेयरी चलाया करते थे और बाद में शराब बनाने के कारोबार में आए.

तमाम चीनी मिलों, शराब की डिस्टिलरीज़, होटल और कारखानों के मालिक होने के अलावा उन्होंने मुलायम सिंह की सपा से जुड़ कर वर्ष 1989 में सक्रिय राजनीति में क़दम रखा और विधान सभा सदस्य बनने के बाद राज्य मंत्री भी रहे.

पांच हत्याओं के मामलों में इन पर मुक़दमे जारी हैं और दर्जनों मामले हत्या की कोशिश, डकैती और वसूली के भी दर्ज हैं. साल 2004 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी में शामिल किया गया था तो मीडिया में हुई आलोचना के चलते चार दिन में फ़ैसला वापस लेना पड़ा.

इनके पुत्र विकास यादव बहुचर्चित नितीश कटारा हत्याकांड मामले में फिलहाल जेल में सज़ा काट रहे हैं और ख़ुद डीपी यादव राष्ट्रीय परिवर्तन दल की तरफ से सम्बल लोक सभा सीट के उम्मीदवार हैं.

ब्रज भूषण शरण सिंह

ब्रज भूषण सिंह

1991 में पहली बार गोण्डा से सांसद बने ब्रज भूषण की वेबसाइट पर लिखा है, "अपने नेतृत्व क्षमता के चलते वे चार बार सांसद बने हैं."

हालांकि इस बात का ज़िक्र कहीं नहीं दिखता कि उन पर हत्या, आगज़नी और तोड़-फोड़ करने के भी आरोप लग चुके हैं.

एक ज़माने में गोण्डा शहर में 'स्थानीय नेता' कहे जाने वाले ब्रज भूषण शरण सिंह भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष हैं और 2008 में भाजपा छोड़ कर मुलायम सिंह की सपा में शामिल हो गए थे.

लेकिन 2014 लोक सभा चुनावों के कुछ समय पहले ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में वापसी की और इस बार कैसरगंज से चुनावी रणक्षेत्र में हैं.

स्थानीय लोग बताते हैं कि ब्रज भूषण सक्रिय राजनीति में उतरने के पहले कुश्ती प्रतियोगिताएं आयोजित कराने का दम भरते थे. इन्हे महँगी एसयूवी गाड़ियों का बेहद शौक है और राजधानी लखनऊ के लक्ष्मणपुरी इलाक़े में इनका एक आलीशान बंगला है जिसमें इनकी चमचमाती गाड़ियों को खड़ी करने के लिए जगह कम पड़ जाया करती है.

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