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चुनाव नतीजे से पहले ही हार तय !

 बुधवार, 9 अप्रैल, 2014 को 18:49 IST तक के समाचार
कांग्रेस चुनाव चिह्न

कभी-कभी भारतीय राजनीति साप्ताहिक टीवी सोप ओपेरा से कम नहीं दिखती जिसमें एंटरटेनमेंट भी खूब है और ट्रेजडी भी भरपूर. जिसमें आंसू भी बहते हैं और दिल भी टूटता-जुड़ता रहता है. और अगर समय चुनाव का हो तो यह ड्रामा दैनिक भी हो सकता है.

अभी पिछले हफ्ते ही इस तरह का ड्रामा नोएडा में देखने को मिला जब गौतमबुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र (नोएडा इसका एक भाग है) से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता रमेश चंद्र तोमर ने नोएडा में सेक्टर 19 के कांग्रेस के चुनावी दफ़्तर से स्पाइडरमैन की तरह एक लंबी छलांग लगाई और क्लिक करें भारतीय जनता पार्टी के सेक्टर 4 के दफ़्तर में जा गिरे.

वहां उनका पहले से इंतज़ार था. लेकिन यह एक अच्छे उपन्यास की तरह प्लॉट का सस्पेंस वाला हिस्सा था. इसका पता चला छलांग पूरी होने के बाद. वो मिनटों में नए खेमे के हीरो और पुराने खेमे में ज़ीरो हो गए.

कांग्रेस के दफ़्तर की तलाश

शायद कांग्रेस वाले वैसा ही महसूस कर रहे होंगे जैसा उस लड़की के परिवार वाले, जिसका होने वाला पति बारात लेकर आए, मंडप में बैठे और फिर अचानक वहां से फ़रार हो जाए किसी दूसरी दुल्हन के मंडप में बैठने के लिए.

मैं मंगलवार को नोएडा के सेक्टर 19 में कांग्रेस पार्टी के चुनावी दफ़्तर को ढूंढने निकला यह देखने के लिए कि इस उजड़े सियासी मंडप का अब क्या हाल है. मैंने काफी जगह इस दफ़्तर को तलाशा. वहां मौजूद लोगों से पूछा लेकिन ऐसा लगा कि यह दफ़्तर या तो रातों रात ग़ायब हो गया या ये फिर इसे दहेज़ में नई दुल्हन के हवाले कर दिया गया.

कभी हार न मानने वाला पत्रकार हूं मैं. आखिर मैंने भी धूप में अपने बाल मुफ़्त में नहीं गंवाए हैं. मेरे पास तोमर जी का नंबर पहले से मौजूद था. मैंने उन्हें कई बार फोन लगाया लेकिन उनके पास भी मेरा नंबर था. शायद वह मुझ से बात करने से कतरा रहे थे, इसलिए उन्होंने मेरा फ़ोन नहीं उठाया.

नरेंद्र मोदी, रमेश चंद्र तोमर

मैंने फिर क्लिक करें कांग्रेस के दो कार्यकर्ताओं के नंबर हासिल किए, उनको फ़ोन घुमाया और पूछा भाई आपका दफ़्तर कहां है और तोमर जी के बारे में आपके खेमे में क्या राय है?

दो चार हिंदी गालियों के बाद जब वह थोड़े ठंडे हुए तो कहा, "वह भाजपा की कोख से आया था वहीं चला गया (तोमर जी ग़ाज़ियाबाद लोकसभा सीट से भाजपा की तरफ से चुनाव जीत चुके हैं)."

जाति का वोट

दूसरे कांग्रेसी ने खुद को बृजेश के नाम से अपना परिचय देते हुए कहा, "वह मेरी जाति के ही हैं और मैं उनसे तीन बार मिला भी था लेकिन जो हरकत उन्होंने की है इसकी उम्मीद नहीं थी."

संभावना नहीं थी लेकिन पिछले मंगलवार से ही अफ़वाहों का बाज़ार गर्म था कि तोमर 'पलटी खाने वाले हैं' यानी दल बदलने वाले हैं. बुधवार को खुद तोमर ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इन अफ़वाहों को बेबुनियाद बताया और कहा वह कांग्रेस के सिपाही हैं. कुछ घंटे बाद वह भाजपा के सिपाही हो गए.

नोएडा सेक्टर 19 में हमारा एक दोस्त है जो कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और क्लिक करें भाजपा सभी से बेज़ार है. इस ड्रामे पर उसकी टिप्पणी थी, "पैसा बोलता है."

सेक्टर 19 में कांग्रेस के दफ़्तर की नाकाम तलाश के बाद मैं सेक्टर 4 गया जहां भाजपा का चुनावी दफ़्तर है. रास्ते में हलकी-हलकी नींद आने लगी और दूर से एक पुराने गाने की धुंधली आवाज़ सुनाई दी, "दूल्हा बिकता है, बोलो ख़रीदोगे?."

भाजपा के दफ़्तर के सामने जब गाड़ी रुकी तो नींद जाती रही और तब मुझे एहसास हुआ कि शायद यह गाना केवल मेरे ज़ेहन में बज रहा था.

भाजपा का नोएडा दफ्तर

भाजपा के दफ़्तर मैं शाम 4 बजे पहुंचा. यह एक बड़ा हॉल था ठीक वैसा ही जैसा एक मैरिज हॉल होता है. पार्टी के दर्जनों बढ़िया पोशाक में लिपटे उत्साहित कार्यकर्ता बाराती से कम नहीं लग रहे थे. यहां बारात की तरह खाना मुफ़्त था और चाय भी. हर तरफ काफ़ी गहमा-गहमी थी.

ये लोग गुरुवार को मतदान केंद्रों में भाजपा के एजेंट होंगे.

पार्टी को फ़ायदा

यहां से भाजपा के उम्मीदवार डॉक्टर महेश शर्मा तो हमें नहीं मिले लेकिन नोएडा ज़िले के पार्टी अध्यक्ष विजेंद्र नागर से ज़रूर सामना हुआ. वह मुझे देख कर थोड़ा हैरान हुए कि बीबीसी का रिपोर्टर एक छोटे से दफ़्तर में क्यों आया है. ये वह नहीं कह रहे थे उनकी और उनके साथियों की निगाहें कह रही थीं.

मैंने झट से पूछा कि यह उत्साह नए दूल्हे के प्रवेश के कारण है? उनका कहना था, "तोमर जी के अपनी पार्टी से जुड़ने के कारण हमें इसका काफी फ़ायदा होगा. तोमर जी की जाति के लोग हमें वोट देंगे. हमें उम्मीद है हम जीतेंगे".

"हम तो एक लाख वोटों से जीत रहे हैं. लेकिन हम जीतें या न जीतें कांग्रेस की एक सीट तो अब गई. इस क्षेत्र में उनका कोई उम्मीदवार नहीं है."

विजेंद्र नागर, नोएडा ज़िलाध्यक्ष, बीजेपी

नागर जी ने मुस्कुराते हुए कहा कि यहां मौजूद लोगों में से कुछ तोमर जी के साथी भी हैं लेकिन उनकी शिनाख्त को सस्पेंस में रखा.

दूल्हे के मंडप बदलने का फ़ायदा नए मंडप वालों को ही होगा जैसा कि नागर जी ने मुझे आगे बताया, "हम तो एक लाख वोटों से जीत रहे हैं. लेकिन हम जीतें या न जीतें कांग्रेस की एक सीट तो अब गई. इस क्षेत्र में उनका कोई उम्मीदवार नहीं है."

यानी शादी से पहले सगाई टूटी. दुल्हन तिलमिलाई लेकिन कुछ कर नहीं पाई. दूल्हा अब नई भूमिका की तलाश में है.

ये तो था मंज़र उत्तर भारत के सियासी ड्रामे का. आजकल हर राज्य में स्थानीय भाषाओं में सियासी ड्रामे देखे जा सकते हैं. अब उदाहरण लीजिए तमिलनाडु का. राज्य के नीलगिरी चुनावी क्षेत्र में भाजपा ने एस गुरुमूर्ति को अपना उम्मीदवार घोषित किया. चुनाव आयोग ने उनका नामांकन पत्र अधूरा होने के कारण उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी.

भाजपा के अतिरिक्त उम्मीदवार डी अंबरासन की उम्मीदवारी भी रद्द कर दी गई. यह तो वही हाल हुआ कि परीक्षा की पूरी तैयारी करने के बाद भी इम्तिहान से पहले फ़ेल हो जाना.

नामांकन रद्द

भाजपा का नोएडा दफ्तर

भाजपा ने अथक कोशिश की कि चुनाव आयोग को अपने उम्मीदवार की मजबूरी समझाई जाए लेकिन कुछ हासिल न हुआ.

इस तरह भाजपा ने चुनाव से पहले एक सीट खो दी. यहां से डीएमके के दिग्गज उम्मीदवार और कथित 2G घोटाले के अभियुक्त ए राजा हैं. क्या इसमें भी कोई फ़िल्मी प्लॉट या ड्रामे की कहानी छिपी है?

तमिलनाडु में ही चुनावी क्षेत्र चिदंबरम से चुनाव आयोग ने भाजपा की भागीदार पार्टी पीएमके के उम्मीदवार के आई मणिरत्नम का नामांकन भी रद्द कर दिया. इस वजह से अब पीएमके को एक सीट से हाथ धोना पड़ेगा.

इसे भी भाजपा के लिए एक झटका माना जा रहा है. लेकिन चुनाव आयोग ने मणिरत्नम की पत्नी और पार्टी की डमी कैंडिडेट सुधा की उम्मीदवारी मंज़ूर कर ली. इसलिए अब पीएमके ने मतदाताओं से उन्हें वोट देने की अपील की है. मणिरत्नम वैसे भी कांग्रेस से टिकट न मिलने के कारण कुछ दिन पहले ही पीएमके में शामिल हुए थे.

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