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नरेंद्र मोदी से क्यों हैं 'ख़फ़ा' ये महंत?

 शनिवार, 29 मार्च, 2014 को 12:52 IST तक के समाचार
अयोध्या का दृश्य

उत्तर प्रदेश का अयोध्या-फ़ैज़ाबाद चुनाव क्षेत्र ही वो स्थान है जहाँ से एक समय में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को देश की राजनीति में अपने पैर जमाने का स्वर्णिम अवसर मिला था.

शायद इसीलिए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने अपनी दावेदारी पक्की होते ही अपने 'ख़ास सहयोगी' और पार्टी महासचिव अमित शाह को उत्तर प्रदेश रवाना कर दिया था.

पिछले वर्ष से अमित शाह ने उत्तर प्रदेश को अपना घर बनाते हुए भाजपा के लिए काम करना शुरू किया.

हालांकि क्लिक करें अमित शाह ने प्रत्यक्ष रूप से बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि का ज़िक्र नहीं किया था लेकिन उन्होंने गत वर्ष जुलाई महीने में अयोध्या पहुँच कर संत-महात्माओं से मुलाक़ात की थी और कारसेवक पुरम में पत्रकारों से बात भी की थी.

उन्होंने कहा था, "कांग्रेस को सत्ता से हटाने के अलावा मैंने प्रार्थना की है कि हम सब मिलकर एक विशाल राम मंदिर का निर्माण करें".

क्या है नाराज़गी

"चाहे मोदी हों या राहुल गांधी हों, हम किसी का नाम नहीं लेना चाहते. जो भी अच्छा काम करेगा उसे हमारा आशीर्वाद मिलेगा"."

महंत ज्ञान दास, हनुमान गढ़ी ट्रस्ट के प्रमुख पुजारी

उस समय जानकारों का मत था कि अपनी राजनीति में क्लिक करें बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद को क़रीब रखने वाली भाजपा आगामी चुनावों में भी इस मुद्दे के इर्द-गिर्द रहेगी.

लेकिन इस बात को अब छह महीने से ज़्यादा हो चुके हैं. ख़ुद नरेंद्र मोदी ने भी इस विवाद को अपने भाषणों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल भी नहीं किया है.

आम चुनावों से ठीक पहले अयोध्या नगरी पहुँचने पर हिन्दू घार्मिक स्थलों के संत-महात्माओं से हुई बात के बाद एक बड़ी निराली और अचरज भरी तस्वीर सामने आती है.

हनुमान गढ़ी ट्रस्ट के प्रमुख पुजारी और ज्ञान सागर मंदिर के भी मुखिया महंत ज्ञान दास रोज़ की तरह मंदिर के प्रांगण में बैठे मिलते हैं और उनके आस-पास भक्तों की चौपाल लगी हुई है.

महंथ ज्ञान दास

उन्होंने कहा, "हम किसी एक व्यक्ति या पार्टी के लिए नहीं हैं. किसी एक पार्टी से हमारा लेना-देना नहीं है. हमारा आशीर्वाद तो उसी को मिलेगा जो सबको सामान भाव से देखे. अमित शाह जब आए तो हम अयोध्या नहीं गंगासागर में गए हुए थे. हमको ऐसा राम मंदिर नहीं चाहिए जो ख़ून की धारा से बना हो, बल्कि ऐसा चाहिए जो सुलह और दूध की धारा से बना हो. चाहे मोदी हों या राहुल गांधी हों, हम किसी का नाम नहीं लेना चाहते. जो भी अच्छा काम करेगा उसे हमारा आशीर्वाद मिलेगा".

राम मंदिर का मुद्दा

हनुमान गढ़ी के पास ही मौजूद है वो मैदान जहाँ पर किसी ज़माने में बाबरी मस्जिद हुआ करती थी.

युगल किशोर शास्त्री

महंथ शास्त्री का कहना है कि मोदी के आने से भाजपा की सीटें कम हो जाएंगी.

अब यहाँ ऊंचे ऊंचे कटीले तारों के बीच कड़ी सुरक्षा है और सैंकड़ों पुलिसकर्मियों का पहरा है.

इसी स्थल से सटा हुआ है विशालकाय सरजू कुंड मंदिर जिसके प्रमुख महंत युगल किशोर शरण शास्त्री राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व प्रचारक भी रहे हैं.

महंत शास्त्री को लगता है कि भाजपा इन चुनावों में क्लिक करें राम मंदिर के मामले से इसलिए बच रही है जिससे उत्तर प्रदेश और बिहार के पिछड़े और दलित वर्ग का समर्थन भी ले सकें.

उन्होंने कहा, "संघ के लिए हिंसा कोई बड़ा मुद्दा नहीं रहा है लेकिन आरएसएस की इस नीति पर मोदी खरे उतर रहे है. इसलिए क्योंकि आडवाणी इस सोच पर खरे नहीं उतरे. मुझे लगता है मोदी के आने से भाजपा की सीटें कम ही हो जाएंगी, बढ़ेंगी नहीं. मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने में भाजपा ने जल्दी कर डाली है, अभी समय नहीं था".

सोची-समझी रणनीति

अयोध्या के कई मंदिरों में मुझे ऐसे महंत मिले जिन्हें लगता है कि भाजपा एक सोची-समझी रणनीति के तहत 2014 के आम चुनावों में राम मंदिर मामले से कतरा रही है.

समय निकाल कर मैं बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले में पहली बार वर्ष 1959 में अदालत का दरवाज़ा खटखटाने वाले हाशिम अंसारी के घर भी पहुंचा.

हाशिम अंसारी

हाशिम अंसारी मोदी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से खफ़ा नज़र आते हैं.

90 वर्ष की आयु के आस-पास वाले हाशिम अंसारी मोदी के साथ-साथ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से भी ख़फ़ा बैठे हैं.

उन्होंने बताया, "भारत में कोई भी प्रधानमंत्री बनें, मुसलमानों का कोई पुरसाने हाल लेने वाला नहीं है. जब बाबरी विध्वंस हुआ तब भी राज्य और केंद्र सरकारों में मुसलमान मंत्री चुप बैठे थे और अब क्लिक करें मुज़फ़्फ़रनगर में दंगे हुए तब भी ऐसा ही हुआ. मोदी हो या कोई और हों मुसलमानों का कुछ नहीं हो सकता".

बहराल अयोध्या-फैज़ाबाद में निवर्तमान सांसद तो कांग्रेस के निर्मल खत्री हैं लेकिन इस बार भाजपा ने पूर्व विधायक लल्लू सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है.

इलाक़े में पिछले हफ़्ते इस बात को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे कि राम मंदिर आंदोलन में भाजपा की ओर से सक्रिय रहे, तीन बार सांसद रह चुके, विनय कटियार को इस बार टिकट नहीं दिया गया.

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के वाराणसी चुनाव क्षेत्र चुनने के बाद से यहाँ कुछ लोगों में काफ़ी निराशा भी दिख रही है.

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