मोदी यानी 'सुपरहीरो का घोल और हिंदुत्व की चाशनी'

  • 28 मार्च 2014
मोदी और कॉमिक्स

महाबली वेताल, जादूगर मैंड्रेक, सुपरमैन, बैटमैन, स्पाइडरमैन इन सब सुपर हीरो भाइयों का घोल बनाया जाए और उसमें हिंदुत्व की चाशनी गुजराती मिठाइयों के परिमाण में मिलाई जाए तो क्या बनेगा? जवाब है- नरेन्द्र मोदी.

नरेन्द्र मोदी पर कई किताबें आई हैं, जिनमें से ज़्यादातर कॉमिक्स के ही अंदाज़ की हैं और हमारे हाथ दो किताबें लगी हैं जो बाक़ायदा कॉमिक्स ही हैं. और भी कॉमिक्स हो सकती हैं, लेकिन वो हमारी नज़रों से नहीं गुजरीं.

इन दो कॉमिक्स में से पहली है ‘प्रगति पुरुष नरेन्द्र मोदी’ (राजचित्र कथा) और दूसरी ‘भविष्य की आशा- नरेन्द्र मोदी’ (प्रभात प्रकाशन). दोनों ही कॉमिक्स अमर चित्र कथा शैली में एक भारतीय सुपर हीरो की गाथा कहती हैं.

ये कॉमिक्स और बाक़ी कॉमिक्सनुमा किताबें चुनाव के माहौल में आई हैं इसलिए इनका उद्देश्य भी साफ़ है यानी चुनाव प्रचार और साथ ही साथ चार पैसे भी कमा लिए जाएं.

चूंकि कॉमिक्स मिठाइयों के अंदाज़ में बनाईं गईं हैं इसलिए उनमें मिठास की भरमार है. कड़वे या तीखे प्रसंग याद करने के लिए ये कॉमिक्स नहीं बनाई गईं, इसलिए ऐसे प्रसंग नदारद हैं.

हमें पता चलता है कि नरेन्द्र मोदी बचपन से ही सुपर हीरो थे.

मगरमच्छों से भरी झील में कूद

दोनों कॉमिक्स में एक प्रसंग है जिसके मुताबिक़ नरेन्द्र मोदी बचपन में एक मगरमच्छों से भरी झील में कूद गए थे.

मामला उस पार एक मंदिर की पुरानी ध्वजा हटाकर नई ध्वजा लगाने का था. एक कॉमिक्स में यह प्रसंग संक्षिप्त और कुछ यथार्थवादी है कि वे दो साथियों के साथ झील में कूदे थे.

लेकिन राज चित्र कथा वाले कॉमिक्स में यह प्रसंग विस्तार में आया है कि वह अकेले कूदे थे.

वह ध्वजा तो लगा ही आए साथ में झील से मगरमच्छ का एक बच्चा भी उठा लाए.

जब वे मगरमच्छ के बच्चे को घर ले कर आए तो उनकी मां ने कहा कि बच्चे को मां से अलग करना अच्छा नहीं है.

बालक नरेन्द्र उस बच्चे को फिर झील में छोड़ आए. दूसरा वाला संस्करण नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व के ज़्यादा अनुकूल है.

वेताल के साथ गुर्रन

नरेन्द्र मोदी के साथ दो और साथी कूदे तो फिर उनकी अद्वितीयता कहां रही? नरेन्द्र मोदी के भाषणों में कभी ‘मैं’ के अलावा द्वितीय पुरुष या तृतीय पुरुष आया है?

वास्तविक जीवन में उनके साथ सिर्फ़ एक व्यक्ति दिखता है- अमित शाह और अमित शाह की हैसियत वही है जो महाबली वेताल के साथ गुर्रन की थी.

मगरमच्छों की कथा के दूसरे संस्करण में उनकी बहादुरी है, उनका भोलापन है, उनकी कोमलता और भावुकता है और मां का प्यार भी है, कंप्लीट पैकेज़ इसलिए यह ज़्यादा मारक है.

इसके बाद की कहानी धार्मिक और राष्ट्रीयता के पथ पर मोदी के आगे बढ़ने की है, उनके शब्दों में उनके ‘हिंदू राष्ट्रवादी’ बनने की.

वह कहानी मगरमच्छ वाली कथा का ही कुछ यथार्थवादी विस्तार मालूम देती है यानी वीरता, दृढ़ता, कोमलता और मातृ प्रेम की कथा.

बचपन से लेकर उनके घर छोड़ने और लौटने से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक की कथा के विस्तार में जाने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि मामला विश्वास का है.

प्रगति पुरुष

यह किताब उन्हीं लोगों के लिए लिखी गई है जो इस पर विश्वास कर सकते हैं.

अगर आप मगरमच्छ की कथा पर विश्वास कर सकते हैं तो फिर मोदी के ‘प्रगति पुरुष’ और ‘भविष्य की आशा’ बनने की कथा पर भी विश्वास करेंगे.

मोदी के ज़्यादातर कट्टर समर्थक इसी किस्म के लोग हैं जो मोदी को महाबली वेताल से लेकर सुपरमैन तक का भारतीय अवतार मानते हैं.

इसमें आश्चर्य नहीं है, दुनिया में बहुत सारे लोग होंगे जो सुपरमैन को वास्तविक मानते हैं, ऐसे लोग मोदी को भी वास्तविक मान लेंगे.

ये कॉमिक्स इन्हीं के लिए हैं लेकिन अगर आप सुपरमैन को काल्पनिक चरित्र मानते हैं तो.....मोदी को क्या माना जाए आप ख़ुद ही तय कर लीजिए.

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