तेलंगाना: चुनौती तो अब आएगी

  • 7 मार्च 2014
तेलंगाना समर्थक, फ़ाइल फ़ोटो

जून के पहले हफ़्ते से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना औपचारिक रूप से दो अलग राज्य हो जाएंगे. ये विभाजन एक राज्य का ही नहीं होगा बल्कि ये एक समाज का बंटवारा होगा.

तेलंगाना के लोगों में जहां अलग राज्य की मांग पूरी होने पर काफी ख़ुशी है वहीं उनके अंदर आंध्र प्रदेश के लोगों के प्रति एक ग़ुस्सा साफ़ महसूस होता है

दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश के लोगों के अंदर विभाजन से मातम छाया हुआ है लेकिन उनके अंदर तेलंगाना वालों के लिए नफ़रत कम महसूस हुई.

मैंने तेलंगाना के दौरे के बाद ये महसूस किया कि उन्हें अब भी विश्वास नहीं हो रहा है कि उन्हें एक अलग राज्य का दर्जा मिल गया है.

ऐसा लगता है तेलंगाना के लोग अभी सो कर उठे हैं और उन्हें जब पता चला कि अलग राज्य की उनकी मांग पूरी हो गई है तो वे ये ख़बर सुनाने वाले को आंखें फाड़कर आश्चर्य से देख रहे हैं

'अब हम ख़ुद बॉस हैं'

कृशांक, तेलंगाना के छात्र नेता

लगभग 60 साल के ‘संघर्ष’ के बाद उनका ये सपना पूरा हुआ है. कृशांक तेलंगाना के छात्रों के संगठन के प्रवक्ता हैं, जिन्होंने तेलंगाना के लिए आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया है. वह कहते हैं, “पहले तो हम हैरान हुए क्योंकि हमें मालूम नहीं था कि तेलंगाना हमारी पीढ़ी के रहते आएगा. उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी हो जाएगा.”

मैं हैदराबाद से 60 किलोमीटर दूर इब्राहिमपट्टनम कस्बे के आस-पास कई छोटे-छोटे गांवों में गया. ईश्वर नाम के एक छात्र ने मुझसे कहा कि वह बहुत खुश है कि अब उन्हें आंध्र वालों से आज़ादी मिल गई है. वह कहते हैं, “बड़ा बॉस चला गया. हम अब ख़ुद ही बॉस हैं. हम आज़ाद हैं.”

तेलंगाना वाले चाहते हैं कि आंध्र वाले उनके इलाकों से निकल जाएं. वेंकटेश गोवड़ा कहते हैं, “इधर आंध्र के लोग बहुत हैं. हम उन्हें हटा देंगे. दो या तीन साल में उन्हें हटा देंगे, चाहे हमें इसके लिए एक और संघर्ष करना पड़े.”

अपने नए राज्य से तेलंगाना वालों को काफी आशाएं हैं. वे अब ये उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें नौकरियां मिलेंगी, महंगाई कम होगी और उन्हें सिंचाई के लिए पानी आराम से मिलेगा क्योंकि उनका मानना है कि नौकरियों और पानी पर आंध्र वालों का क़ब्ज़ा था.

ईश्वर, तेलंगाना समर्थक
तेलंगाना के छात्र ईश्वर का कहना है कि वो नया राज्य बनने से बेहद ख़ुश हैं.

वेंकटेश के अनुसार, “पूरा एडमिनिस्ट्रेशन आंध्र वालों के हाथ में है. सारी नौकरियां उनके पास हैं. जब वे यहां से हटेंगे तब ये नौकरियां हमें मिलेंगी”.

उनके पास खड़े एक गांव वाले ने कहा कि कृष्णा और गोदावरी नदियां तेलंगाना होकर आंध्र में जाती हैं लेकिन सारे प्रोजेक्ट्स आंध्र में हैं. अब हमारे पास खेती के लिए पानी होगा.”

एक अनुमान के अनुसार सरकारी नौकरियों से लेकर व्यापार में आंध्र प्रदेश के लोग अधिक संख्या में हैं. हैदराबाद का हाई टेक सिटी काफी अहम माना जाता है जहां व्यापार पर आंध्र प्रदेश के लोगों का दबदबा है.

'आंध्र काफ़ी आगे निकल जाएगा'

आंध्र के लोग अब इस बात से डर रहे हैं कि कहीं भावनाओं में बहकर तेलंगाना के लोग उन्हें हैदराबाद से निकलने पर मजबूर न करें.

मैं चार मीनार के इलाके में तीन युवतियों से मिला जो आंध्र की थीं. उन तीनों ने विभाजन पर अफ़सोस जताया.

आंध्र समर्थक छात्राएं

एक ने कहा, “हैदराबाद में हम पैदा हुए और अब कहा जा रहा है कि ये शहर मेरा नहीं.” उसके साथ वाली लड़की ने मुस्कुराते हुए कहा, “देख लेना आने वाले सालों में तेलंगाना एक नाकाम राज्य साबित होगा और आंध्र प्रदेश उससे काफी निकल चुका होगा.”

हैरानी की बात ये है कि चार मीनार के मुसलमान दुकानदारों ने भी तेलंगाना का विरोध किया. मोहम्मद जाहिद वहां चूड़ियों का कारोबार करते हैं.

जाहिद कहते हैं, “तेलंगाना बनने से हमारे धंधे में काफ़ी गिरावट आई है. व्यापार आधा हो गया है. आंध्र वाले सबसे अधिक संख्या में आते थे लेकिन अब वे नहीं आ रहे हैं. बिक्री आधी हो गई है.”

दूसरे दुकानदारों ने भी ऐसी ही शिकायत की. एक ने कहा कि उनके आठ बच्चे हैं और उनकी कमाई आधी हो गई अब वह पैसे कहां से लाएं.

तेलंगाना के लोगों की उम्मीदों को देखने से ये तो तय लगता है कि आगामी विधानसभा चुनाव के बाद जो भी मुख्यमंत्री बनेगा उसके सामने कई चुनौतियां होंगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार