गठबंधन को लेकर सुषमा ने क्यों किया एतराज़?

  • 7 मार्च 2014
सुषमा स्वराज और रेड्डी बंधु

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज के हाल के एक ट्वीट ने कर्नाटक के नेताओं को ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ये कहीं राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के भीतर चल रही उठापटक का हिस्सा तो नहीं.

ट्वीट में सुषमा स्वराज ने कहा, “मैं कर्नाटक में बीजेपी और बीएसआर कांग्रेस के बीच गठबंधन या विलय के ख़िलाफ़ हूं. मैंने राजनाथ सिंह जी को ख़त लिखकर कहा है कि बीजेपी को इसकी इजाज़त नहीं देनी चाहिए.”

बीजेपी और बीएसआर कांग्रेस के विलय की घोषणा के बाद सुषमा स्वराज ने पहली बार खुलकर इसका विरोध किया है.

बीएसआर कांग्रेस के नेता बी सिरीरामालू ने पिछले बुधवार को बीजेपी में अपनी पार्टी के विलय की घोषणा की थी.

सिरीरामालू बीजेपी सरकार में मंत्री रह चुके हैं और अवैध खनन घोटाला मामले में कथित तौर पर शामिल रेड्डी बंधुओं के क़रीबी माने जाते हैं.

विलय पर सवाल!

एक बीजेपी नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “राष्ट्रीय स्तर के सभी बड़े नेताओं ने इस विलय को हरी झंडी दे दी थी. उनकी स्वीकृति के बाद ही सिरीरामालू ने ये फ़ैसला लिया था. लेकिन सुषमा जी ने ज़िद पकड़ ली है. ज़ाहिर है इसकी वजह से पार्टी में ये अटकलें शुरू हो गई हैं कि कहीं ये मामला नरेंद्र मोदी को पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किए जाने से जुड़ा हुआ तो नहीं है.”

कर्नाटक की खदान

पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर ने बीबीसी हिंदी से कहा, “हम संसदीय बोर्ड की बैठक में शामिल होने के लिए गुरूवार से दिल्ली में होंगे. उम्मीदावारों के नामों पर वहीं फ़ैसला लिया जाएगा. मैं इस वक़्त इससे ज़्यादा कुछ नहीं कह सकता हूं.”

शेट्टर कर्नाटक बीजेपी ईकाई के उन नेताओं में से हैं जिन्होंने सिरीरामालू की बीएसआर कांग्रेस की वापसी का समर्थन किया था.

बीएसआर कांग्रेस के प्रवक्ता रविंद्र रेश्मी का कहना था, “विलय के जिस प्रस्ताव को बेलारी बैठक में मंज़ूरी दी गई वो बीजेपी नेताओं की मंज़ूरी के बाद हुआ. इसे दिल्ली में मौजूद वरिष्ठ नेताओं का समर्थन भी हासिल था.”

बीएसआर का असर

नायक समुदाय से ताल्लुक़ रखने वाले सिरीरामालू का राज्य के कई चुनाव क्षेत्र मे ख़ासा प्रभाव है. 2013 में कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनावों में बीएसआर कांग्रेस को अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित चुनाव क्षेत्रों में चार सीटें हासिल हुईं. ये नतीजे तब और अहम हो जाते हैं जब ये देखते हैं कि उस समय राज्य में कांग्रेस का ज़ोर था.

रविंद्र रेश्मी ने कहा कि सबको मालम है कि सिरीरामालू के आने से बीजेपी को कम से कम हावेरी, कोप्पल, रायचूर और चित्रदुर्ग के चार चुनाव क्षेत्रों में फ़ायदा होगा.

रेशमी ने कहा, “अगर बीजेपी के साथ हमारा गठबंधन सफल नहीं भी होता है तब भी हम नरेंद्र मोदी का समर्थन करेंगे. अगर पिछड़े समुदाय का एक व्यक्ति मुख्यमंत्री बन सकता है तो पिछड़ी जाति का कोई व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकता.”

सुषमा स्वराज के रूख़ की एक बड़ी वजह सिरीरामालू और रेड्डी बंधुओं – गाली जनार्दन रेड्डी, करूनाकर रेड्डी और सोमाशेखर रेड्डी की नज़दीकी है. ये संबंध कुछ इस तरह के हैं कि सिरीरामालू को ‘चौथा भाई’ कहा जाता है.

अवैध खनन घोटाला केस में जनार्दन रेड्डी अभी भी जेल में हैं.

छवि की चिंता

येदयुरप्पा कर्नाटक बीजेपी

लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गोवा और कर्नाटक में लौह अयस्क के खनन पर रोक लगा दी थी.

बीजेपी के एक नेता जो अपना नाम नहीं बताना चाहते हैं कहा, “सुषमा स्वराज अपनी छवि को लेकर परेशान हैं. रेड्डी बंधू और सिरीरामालू उन्हें हमेशा देवी मां बुलाते रहे हैं और रेड्डी बंधूओं को आर्शीवाद देती हुई बेलारी में हर तरफ़ लगी उनकी तस्वीर ने उनपर गहरा असर डाला है.”

साल 1999 लोकसभा चुनाव के दौरान रेड्डी बंधू और सिरीरामालू सुषमा स्वराज के क़रीब हुए तब सुषमा स्वराज ने बेलारी से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा था.

रेड्डी बंधूओं और सिरीरामालू की तरक्क़ी का दौर उसके बाद ही शुरू हुआ था.

बीजेपी नेताओं ने सिरीरामालू से अनौपचारिक बातचीत की शुरूआत पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदयुरप्पा की पार्टी में वापसी के बाद की थी.

येदयुरप्पा की वापसी

येदयुरप्पा को अवैध खनन मामले पर लोकायुक्त की रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

येदयुरप्पा ने बाद में अपना राजनीतिक दल, कर्नाटक जनता पार्टी, बना लिया था. उनके साथ पार्टी का लगभग 10 फ़ीसद वोट भी चला गया था जिसने विधानसभा में बीजेपी की तादाद 40 सीट पर पहुंचा दी थी.

येदयुरप्पा के नेतृत्व में लड़े गए 2008 चुनावों में बीजेपी को 110 सीटें हासिल हुई थीं. लेकिन येदयुरप्पा को बहुमत दिलवाने में रेड्डी बंधूओं ने बहुत अहम भूमिका निभाई थी.

एक कन्नड़ अख़बार ने बीएसआर कांग्रेस के सोमाशेखर रेड्डी के हवाले से कहा कि उनका दल बिना शर्त बीजेपी में मिल रहा है क्योंकि वो नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं.

उनके हवाले से कहा गया कि “जनार्दन रेड्डी जून-जूलाई में जेल से बाहर होंगे.”

बीजेपी नेता ने कहा, “हमें नहीं मालूम कि क्या इन बयानों ने सुषमाजी को सिरीरामालू के ख़िलाफ़ खुले तौर पर बोलने को मजबूर किया?”

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