चार धाम यात्राः अभी खड़े हैं मुश्किलों के पहाड़

  • 28 फरवरी 2014
उत्तराखंड, रुद्रप्रयाग आपदा

पर्यटन का पीक सीज़न सामने है लेकिन उत्तराखंड के चार धाम मार्ग अभी भी पिछले वर्ष की प्रलयंकारी आपदा से उबरे नहीं हैं. पुनर्वास और पुनर्निर्माण के काम की रफ़्तार भी सुस्त है और आपदा प्रभावितों का आक्रोश भी बना हुआ है.

केदारनाथ के कपाट चार मई को खुलेंगे. रुद्रप्रयाग ज़िले के ऊखीमठ में ओंकारेश्वर मंदिर में कपाट खोलने की तारीख तय की गई.

इस तरह क़रीब दो महीने का समय बचा है शासन और प्रशासन के पास आपदा से सबसे ज़्यादा तबाह केदारनाथ के हालात को सामान्य बनाने में.

पिछले ही हफ़्ते जब गढ़वाल में बारिश और बर्फ़बारी हुई तो 36 घंटों के लिए उत्तरकाशी का सड़क संपर्क टूट गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि कंपनियों की बड़ी-बड़ी मशीनें आ तो गई हैं लेकिन काम कब शुरू होगा पता नहीं.

जुगाड़ करके कहीं-कहीं मलबा साफ़ किया जा रहा है लेकिन न तो नदी पर कोई तटबंध बनाए जा रहे हैं और न ही सड़क दुरुस्त की जा रही है.

उत्तरकाशी की आपदा में धराशायी एक बड़े होटल के मालिक विशेष जगूड़ी नए सिरे से ज़िंदगी शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं.

नाराज़गी

वह गहरी नाराज़गी ज़ाहिर करते हैं, “मैं ख़ुद यहां किराए पर रहकर एक दूसरी जगह पर छोटा सा गेस्ट हाउस बना रहा हूं. लेकिन लगता नहीं कि इस बार कोई यहां आएगा. हर साल 15 जनवरी तक हमारी मई-जून की बुकिंग फुल हो जाती थी जो इस बार ज़ीरो है.”

देहरादून में एक बड़ी ट्रेवल एजेंसी के मालिक देवेंद्र सिंह चढ्ढा कहते हैं कि, “सड़क ही नहीं है तो यात्रा कैसे होगी. आठ महीने गुज़र चुके हैं लेकिन सरकार ने किया क्या है. जो है वह पेपर पर है, ज़मीन पर तो कोई काम नहीं हुआ है. बद्रीनाथ जाने की भी सड़क नहीं है.”

इन सड़कों की देखरेख का ज़िम्मा केंद्र सरकार के सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के पास है. उसने इन रास्तों को दुरुस्त करने के लिए 15 अप्रैल की डेडलाइन तय की है.

उत्तराखंड आपदा प्रभावित

बीआरओ शिवालिक रेंज के मुख्य अभियंता केके राजदान का कहना है, “चार धाम यात्रियों की सुविधा के लिए ऋशिकेश-गंगोत्री, ऋषिकेश-बद्रीनाथ और ऋषिकेश-केदारनाथ में सभी संकरे मार्ग टू-लेन बनाए जा रहे हैं. भैरोंघाटी-गंगोत्री मार्ग के चौड़ीकरण का काम अंतिम चरण में है. गंगोत्री में मार्ग के दोनों ओर लेबाई बनाई जा रही, जिसमें 300 से अधिक वाहन एक साथ पार्क हो सकेंगे.”

बीआरओ का दावा है कि अगले चार साल में पूरा चारधाम सर्किट टू लेन का हो जाएगा. गंगोत्री और केदारनाथ के लिए वैकल्पिक रास्ते बनाने की तैयारी भी है.

मायूसी

होटल, ढाबे, टैक्सी ड्राइवर, पुजारी, खच्चर वाले- ऐसे लाखों स्थानीय कारोबारी विचलित और मायूस हैं.

जोशीमठ में एक लॉज चलाने वाले विनय डिमरी का कहना है कि, “सरकार कम से कम एक नीति तो बनाती जिससे टूरिस्ट आश्वस्त होते कि एक बार में कितने लोग केदारनाथ या बद्रीनाथ जा पाएंगे.”

हालांकि आपदा के फ़ौरन बाद सरकार ने यात्रियों और वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए गेट सिस्टम लागू करने की बात की थी जिसमें एक बार में तय संख्या में ही यात्री और वाहन निकलेंगे.

इस बीच राज्य सरकार का दावा है कि आपदा की सबसे ज़्यादा मार झेल चुके केदारनाथ के रास्ते दुरुस्त करने का काम प्राथमिकता से किया जा रहा है. ख़ासकर रामबाड़ा से केदारनाथ तक के पैदल रास्ते को खोलने के लिए एक टास्क फ़ोर्स बनाई गई है.

इस रास्ते पर बेसकैंप और केदारनाथ से पहले हैलीपैड बनाए जाएंगे. रेलिंग और 40 शेल्टर भी बनाए जाने का आदेश दिया गया है. लेकिन अभी ये आदेश ही हैं. और दो-ढाई महीने बाद यात्रा शुरू हो जाएगी.

एक साल का लक्ष्य

उत्तराखंड, रुद्रप्रयाग, पुनर्निर्माण

राज्य के नये मुखिया हरीश रावत बार-बार दावा कर रहे हैं कि चार धाम शुरू होने के पहले सारी व्यवस्था पूरी कर ली जाएगी. ध्यान रहे कि राहत और पुनर्वास में ढिलाई के आरोपों की वजह से ही विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी है.

हरीश रावत यह भी कह चुके हैं कि जब तक आपदा प्रबंधन और पुनर्वास का काम संतोषजनक नहीं हो जाता वह देहरादून के आलीशान मुख्यमंत्री आवास में क़दम भी नहीं रखेंगे. उन्होंने इस काम के लिए एक साल का लक्ष्य तय किया है.

तो क्या इस बार की चारधाम यात्रा जैसे-तैसे की जाएगी. इस पर सरकार का कहना है कि पुनर्वास का काम एक झटके में किया नहीं जा सकता, गांव के गांव बसाए जाने हैं. लेकिन चार धाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए जो काम सबसे पहले किए जाने हैं वे चल रहे हैं.

हरीश रावत के कार्यकाल का एक तरह से असली इम्तहान यही होगा कि चार धाम यात्रा कितनी सुगम तरीक़े से संपन्न हो पाती है.

इस बीच विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इस बार बरसात में और ज़्यादा नुकसान हो सकता है.

मौसम विभाग के निदेशक आनन्द शर्मा कहते हैं, “पिछले वर्ष आपदा में मकान, दुकान और सड़कें कमज़ोर हो चुकी हैं और ज़रा सी बारिश से ढह सकती हैं. बादल न भी फटे तो भी नुकसान वैसा ही होगा.”

राडार लगाने का प्रस्ताव

उत्तराखंड टूटी सड़कें

मौसम विभाग ने मौसम के सटीक पूर्वानुमान के लिए चार धाम क्षेत्रों के क़रीब राडार लगाने का प्रस्ताव किया था लेकिन उस पर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

पर्यटन का उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है. एक अनुमान के अनुसार गढ़वाल मंडल में पर्यटन की 90 प्रतिशत आमदनी चार धाम यात्रा से होती है.

आर्थिक तरक्की पर नज़र रखने वाली संस्था, पीएचडी चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स, की एक रिपोर्ट के अनुसार आपदा से चरमराए पर्यटन उद्योग की वजह से हर साल कम से कम 12,000 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है.

केंद्र ने आपदा के बाद यात्रा मार्ग और चारों धामों के नए सिरे से पुर्नर्निमाण के लिए 195 करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की थी लेकिन अब तक धरातल पर इस पैकेज का कोई असर नहीं दिख पाया है.

इस बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, एएसआई और भूगर्भीय सर्वेक्षण विभाग, जीएसआई की रिपोर्टें भी अमल के इंतज़ार में हैं.

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