कांग्रेस, भाजपा के ख़िलाफ़ 'फ़र्स्ट फ़्रंट'

  • 25 फरवरी 2014
तीसरे मोर्चे के मंच पर नीतीश कुमार

लोकसभा चुनावों से पहले देश के 11 राजनीतिक दल मंगलवार को नई दिल्ली में एकजुट हुए और कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को सत्ता से बाहर कर भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में आने से रोकने के लिए ख़ुद को एक विकल्प के तौर पर पेश किया.

क्यों बैकफ़ुट पर है कांग्रेस

तीसरे मोर्चे के मंच से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता प्रकाश करात ने कहा, ''लोकसभा चुनाव अब दूर नहीं हैं और यही वो मौक़ा है जब भारत के लोग, भारतीय गणतंत्र की भावी दिशा तय कर सकते हैं.''

कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, ''बीते पांच साल में सरकार ने बस परेशानियां पैदा कीं हैं जिनका ख़ामियाज़ा लोगों को भुगतना पड़ा है. किसानों को बड़ा कष्ट हुआ है, क़ीमतें बढ़ गई हैं, भ्रष्टाचार बढ़ गया है. नीतियों के मामले में भारतीय जनता पार्टी भी कांग्रेस से अलग नहीं है.''

सवाल एकजुटता का

जिन ग्यारह दलों को साथ लेकर तीसरे मोर्च की बात प्रकाश करात ने की, क्या वे 11 दल गुज़रते समय के साथ एकजुट रह सकेंगे.

इस सवाल पर जनता दल यूनाइटेड के नेता शरद यादव ने कहा, ''पक्का जान लीजिए कि ये 11 पार्टियां एकजुट थी और आगे भी एकजुट रहेंगी. हम लोग एकजुट हुए, ये असल में फ़र्स्ट फ़्रंट है. प्रधानमंत्री पद के दावेदार को लेकर हमारे बीच कभी कोई झगड़ा नहीं हुआ.''

प्रधानमंत्री कौन होगा

मंच पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी थे. एक समय था जब भारतीय जनता पार्टी से उनकी दोस्ती थी.

क्या भारतीय जनता पार्टी से दोबारा दोस्ती की गुंजाइश है, इस सवाल पर तीसरे मोर्च के मंच से नीतीश कुमार बोले, ''कोई गुंजाइश नहीं है, संबंध की बात तो छोड़ दीजिए, सम्पर्क तक की गुंजाइश नहीं है.''

तीसरे मोर्चे के मंच पर बैठे नेताओं ने कई सवाल टाल दिए. जैसे तीसरे मोर्चे को बहुमत मिला तो प्रधानमंत्री कौन बनेगा.

इस पर प्रकाश करात ने जयललिता से हुई बात का हवाला देते हुए कहा कि इसका फ़ैसला चुनाव के बाद किया जाएगा.

समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने इसकी वजह भी बताई.

उन्होंने कहा, ''अभी और दलों को भी शामिल करना है. अभी तो शुरुआत है. हो सकता है कि कल 11 की जगह 15 दल हो जाएं. जब 15 दल हो जाएंगे तब सभी नेता बैठकर नाम तय कर लेंगे और आगे की योजना भी बना लेंगे.''

तीसरे मोर्चे की इस बैठक में 11 में से नौ राजनीतिक दलों के नेता शामिल थे. बीजू जनता दल के नेता नवीन पटनायक और असम गण परिषद के प्रफुल्ल महंत बैठक में नहीं थे. प्रकाश करात ने कहा कि ये नेता अपने निजी कारणों से बैठक में नहीं आ पाए.

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