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घूमने जाना है तो मोबाइल निकालिए जनाब!

 मंगलवार, 28 जनवरी, 2014 को 17:04 IST तक के समाचार

कैलिफोर्निया के सिलिकॉन वैली में रह रहे जेराल्ड सिंह के लिए ये एक चुनौती भरा वक्त है. यात्रा कारोबार से जुड़ी कंपनी एक्सपीडिया के मोबाइल प्रोडक्ट डिविजन के मुखिया की हैसियत से उन्हें अपने उपभोक्ताओं की बढ़ती हुई माँगें पूरी करनी पड़ती है. इस वजह से उन्हें लगातार यात्राएँ भी करनी पड़ती है.

जेराल्ड का पासपोर्ट उन्हें काम के सिलसिले में सारी दुनिया की सैर कराता है जबकि उनका मोबाइल फोन सफर के दौरान उन्हें कई सहूलियतें देता है. उनके जैसे लोगों के लिए जिन्हें यात्रा के दौरान ही अपने लिए हवाई टिकटें और होटल बुक कराने पड़ते हैं, हाथों में एक स्मार्टफोन का होना उनके काम और सफर को आसान कर देता है.

और जैसे ही भारत में क्लिक करें मोबाइल फोन का चलन बढ़ा, यात्रा कारोबार से जुड़ी कंपनियां इस मौके को भुनाने में कामयाब रहीं. वे अब मुसाफिरों को ऑनलाइन ढेर सारी सहूलियतें मुहैया करा रही हैं.

इन कंपनियों की यात्रा करने वाले उपभोक्ताओं से व्यापार महज टिकट या होटल बुक कराने तक ही सीमित नहीं रहा है. उपभोक्ताओं को वास्तविक जानकारी ठीक उसी समय मुहैया कराई जा रही है जिस समय उनकी माँग होती है.

यात्रा कारोबार से जुड़ीं दर्जनों वेबसाइट्स अब ऐसे बाज़ार में हिस्सेदारी के लिए होड़ में लगी हैं जो क्लिक करें डेस्कटॉप या लैपटॉप से स्मार्टफोन के स्क्रीन पर किए जाने वाले कारोबार में तब्दील हो रही है.

आसान हुआ सफ़र

एक्सपीडिया के क्लिक करें मोबाइल प्रोडक्ट डिविजन के प्रमुख जेराल्ड सिंह कहते हैं, "पहले कोई यात्री अपनी ईमेल का प्रिंट आउट लेकर सफर करता था. लेकिन आपने जैसे ही टिकट बुक किया और उसका प्रिंट आउट लिया, ये आपकी यात्रा की फ्लेक्सिबिलिटी लगभग खत्म कर देता है. जबकि टिकट बुक कर लेने के बाद मोबाइल एक जीवंत अनुभव देता है. आप यात्रा में बदलाव भी कर सकते हैं."

बिना परेशानी वाली इस सहूलियत की वजह से हवाई सफर करने वाले ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ता ऑनलाइन टिकटें बुक करा रहे हैं.

"पहले कोई यात्री अपनी ईमेल का प्रिंट आउट लेकर सफर करता था. आपने जैसे ही टिकट बुक किया और उसका प्रिंट आउट लिया, ये एक न बदलने वाली बात की तरह हो गई. टिकट बुक कर लेने के बाद मोबाइल एक जीवंत अनुभव देता है"

जेराल्ड सिंह, प्रमुख मोबाइल प्रोडक्ट डिविजन, एक्सपीडिया

भारत में ये चलन बढ़ रहा है. इसका अगला विस्तार होटल बुकिंग के मामलों में भी हो सकता है. फिलहाल होटल के कमरों की ऑनलाइन बुकिंग को लेकर उपभोक्ताओं का कोई बहुत ज्यादा रुझान नहीं दिखाई देता है लेकिन यात्रा कारोबार की अगली लहर इसी क्षेत्र में उठ सकती है.

होटल बुकिंग के आँकड़ों को देखें तो यात्रियों के बदलते रुझान का अंदाजा लगाया जा सकता है. एक्सपीडिया के अनुसार उसकी वेबसाइट पर बुक कराए जाने वाले 60 फीसदी होटल के कमरे मोबाइल फोन के जरिए बुक कराए गए और वह भी ठहरने वाले दिन ही.

भारत में यह आँकड़ा 15 फ़ीसदी के करीब है. ट्रिपएडवाइज़ डॉटकॉम पर हर महीने आठ करोड़ मोबाइल फोन धारक उपभोक्ता विज़िट करते हैं. भारत में उसकी वेबसाइट विज़िट करने वाले 35 फीसदी उपभोक्ता मोबाइल फोन का सहारा लेते हैं.

बढ़ता कारोबार

मोबाइल फोन के जरिए यात्रा कारोबार को अंजाम देने वाला बाजार भारत में तैयार हो रहा है. आईडीसी के अनुसार साल 2013 की तीसरी तिमाही में भारत में क्लिक करें स्मार्टफोन की बिक्री 229 फीसदी की दर से बढ़ी है. आंकड़ों में ये संख्या एक करोड़ 28 लाख स्मार्टफोन हुई.

इससे ठीक पहले वाली तिमाही में देश भर में एक करोड़ दो लाख स्मार्टफोन बेचे गए थे. इनके ज्यादातर खरीददारों में से एक बड़ी संख्या 30 साल से कम उम्र के लोगों की है. ये तबका मोबाइल फोन पर किए जाने वाले यात्रा कारोबार का एक संभावित उपभोक्ता हो सकता है.

जेराल्ड सिंह कहते हैं, "इससे पहले यात्रा कारोबार ऑफ़लाइन था, दूसरे शब्दों में कहें तो उपभोक्ता कतार में लगकर अपने टिकट या होटल बुक कराता था लेकिन बाद में डेस्कटॉप का चलन शुरू हुआ और अब इसका रुझान मोबाइल फोन की तरफ है."

जेराल्ड बताते हैं कि डाउनलोड्स के आंकड़ों के मद्देनजर भारत यात्रा कारोबार का पाँचवां सबसे बड़ा बाजार है.

मुसाफिरों का ध्यान खींचने में ट्रिपएडवाइजर को मिली कामयाबी की एक वजह उसकी क्लिक करें वेबसाइट पर मौजूद सामाग्री है. भारत में ट्रिपएडवाइजर के कंट्रीहेड निखिल गांजु कहते हैं, "होटल छोड़ने के बाद कई यात्री अपने अनुभवों के बारे में सलीके से लिख रहे हैं और शायद वे इसकी तस्वीर भी खींच रहे हैं."

मोबाइल के जरिए ट्रैवेल वेबसाइट विजिट करने वाले आठ करोड़ लोगों में से जो लोग होटल, रेस्तरां या अन्य सेवाओं के बारे में लिख रहे हैं, उनमें से 10 से 15 फीसदी चीजें भारत में मोबाइल फोन धारकों की तरफ से लिखी जा रही हैं.

दुनिया के ट्रैवल ब्रांड जब अपने व्यवसाय को तकनीकी युग में ले जाना चाह रहे हैं तो, देश में ही पैदा हुए प्रतिस्पर्धी भी इसे अपनाने की कोशिश कर रहे हैं.

मेकमाईट्रिप, क्लियर ट्रीप, यात्रा, मुसाफ़िर और कुथ अन्य ने सफलता का स्वाद चख लिया है. अब वे मोबाइल के ज़रिए भी टिकट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं.

दरअसल ये कंपनियां घरेलू यात्रियों के बड़े हिस्से पर कब्जा करना चाहती हैं, जो 2012 के 5.882 करोड़ यात्रियों की तुलना में 2013 में बढ़कर 6.142 करोड़ हो गई है.

भारत के हवाई अड्डों पर 2012-13 में 15.929 करोड़ यात्रियों का आना-जाना हुआ, जो कि एक साल पहले 16.23 करोड़ थी. एक अरब से अधिक आबादी वाले इस देश में बाज़ार के बढ़ने के पर्याप्त अवसर मौज़ूद हैं.

रेलवे की लोकप्रियता

भारत में ट्रेन यातायात का एक लोकप्रिय माध्यम है. करीब एक करोड़ तीस लाख लोग इंडियन रेलवे की ट्रेनों में प्रतिदिन यात्रा करते हैं. देशभर में सात हज़ार से अधिक रेलवे स्टेशन हैं, इसे भारत की जीवन रेखा माना जाता है.

"पहले यात्रा कारोबार ऑफ़लाइन था, दूसरे शब्दों में कहें तो उपभोक्ता कतार में लगकर अपने टिकट या होटल बुक कराता था लेकिन बाद में डेस्कटॉप का चलन शुरू हुआ और अब इसका रुझान मोबाइल फोन की तरफ है"

जेराल्ड सिंह, प्रमुख, मोबाइल प्रोडक्ट डिविजन, एक्सपीडिया

सरकार के नियंत्रण वाली बेवसाइट आईआरसीटीसी यात्रियों को ऑनसलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा देती है लेकिन यह बेवसाइट ठीक से काम नहीं कर पा रही है. यह देश में ऑनलाइन व्यापार करने वाली सबसे बड़ी बेवसाइट है और शायद इस पर आने वाले लोगों की संख्या के लिहाज़ से भी. लेकिन इसका प्रबंधन ठीक नहीं है.

आईआरसीटी की बेवसाइट के जरिए रेलवे के टिकट खरीदे जा सकते हैं. पिछले साल अगस्त में इसके जरिए एक करोड़ 35 लाख टिकट बुक किए गए. केवल एक दिन में ही रिकॉर्ड पांच लाख 72 हज़ार टिकट बिक गए.

आईआरसीटीसी की बेवसाइट पर पिछले साल तीन दिन ऐसे आए, जब एक दिन में पाँच लाख से अधिक टिकट बुक किए गए. ईर्ष्या करने लायक ट्रैफिक होने के बावज़ूद कई दिन ऐसा भी होता है, जब यह वेबसाइट आने वाले लोगों को संभाल नहीं पाती है.

इससे बहुत से संभावित ग्राहकों को दुखी होना पड़ता है. हफ्ते के सातों दिन और 24 घंटे होने वाले ई-कॉमर्स में यह वेबसाइट अच्छा व्यापार कर रही है. इसके बाद भी इसकी सुविधाओं में सुधार की जरूरत है.

इस बात में थोड़ा संदेह है कि मोबाइल फ़ोन अब यातायात के व्यापार को दिशा दे रहे हैं. कंपनियां ऐसे ऐप बना रही हैं, जो मोबाइल पर व्यापार को अधिक से अधिक बढ़ा रहे हैं. भारतीय रेलवे भी ऐसा करने की योजना बना रही है. उसके बारे में यह नहीं कहा जा सकता है कि वह सही चलेगा या नहीं लेकिन विमानन कंपनियों के विकास का रास्ता खुला हुआ है.

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