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भारत: पाकिस्तान वापस मांग रहा ब्राउन शुगर और लाने वाले

 सोमवार, 20 जनवरी, 2014 को 20:19 IST तक के समाचार
एलओसी, कारोबार

भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के बीच नियंत्रण रेखा के आर-पार व्यापार 17 जनवरी को एक क्विंटल ब्राउन शुगर पकड़े जाने के बाद से बंद पड़ा है. भारत का दावा है कि पकिस्तान ना केवल पकड़ी गयी एक क्विंटल ब्राउन शुगर वापस मांग रहा है बल्कि वो तस्करी का सामान ला रहे ट्रक ड्राइवरों के लिए कूटनयिकों को मिलने वाले लाभ भी चाहता है.

बकौल भारतीय अधिकारियों के पाकिस्तान का कहना है कि वो ड्राइवर अपने यहाँ मुकदमा चलाना चाहते हैं जबकि भारत का कहना है कि अपराधी उसके यहाँ पकड़ा गया है इसलिए मुकदमा यहाँ चलेगा.

भारत प्रशासित कश्मीर के डिविज़नल कमिश्नर शैलेंद्र कुमार के मुताबिक़ पाकिस्तान का कहना है कि पकड़ी गई ब्राउन शुगर, उस ट्रक का ड्राइवर और ट्रक पाकिस्तान को वापस करने के बाद ही व्यापार बहाल होगा.

शैलेंद्र कुमार ने कहा, "यह घटना कश्मीर में हुई है तो क़ानून के मुताबिक़ कारवाई भी यहीं होगी. पाकिस्तान कह रहा है कि यह व्यापार विश्वास बहाली क़दमों के तहत हो रहा है तो इस पर राजनयिक सुरक्षा लागू होती है. हमने उन्हें ऐसे दस्तावेज़ दिखाने को कहा है."

बीबीसी के पास इस मसले पर पाकिस्तान की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो पाई.

घटनाक्रम

यह मसला तब पैदा हुआ जब 17 जनवरी को पाकिस्तान की तरफ़ से आए एक ट्रक से 100 किलो से ज़्यादा ब्राउन शुगर बरामद की गई. इस ब्राउन शुगर की क़ीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क़रीब 100 करोड़ रुपए बताई जा रही है.

इस ट्रक में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की ओर से बादाम आ रहे थे. भारत प्रशासित कश्मीर के सलामाबाद में जब यह बात सामने आई तो ड्राइवर को ट्रक समेत हिरासत में ले लिया गया. इस के जवाब में पाकिस्तानी अधिकारियों ने अपनी तरफ़ 27 भारतीय ड्राइवरों को बंदी बना लिया. ये सभी ड्राइवर माल लेकर नियंत्रण रेखा के उस पार गए थे.

एलओसी, कश्मीर

पहले एलओसी पर दोनों ओर से फ़ायरिंग की वजह से संबंधों पर असर पड़ा था.

यही नहीं, पाकिस्तान ने माल लेकर भारत प्रशासित कश्मीर आए 48 पाकिस्तानी ट्रकों और ड्राइवरों को भी वापस लेने से मना कर दिया. इस के बाद से नियंत्रण रेखा के आर-पार व्यापार बंद है.

पकड़ा गया ट्रक पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के मुज़फ़्फ़राबाद के अल-फैज़र ट्रेडर्स ने भारत प्रशासित कश्मीर के बांदीपोर में शौकत हबीब ट्रेडर्स के लिए भेजा था. बांदीपोर के इस व्यापारी को भी हिरासत में लिया गया है.

पुंछ ज़िले के चकां द बाग़ से नियंत्रण रेखा के आर-पार व्यापार चल रहा है लेकिन सोमवार को वो बस सेवा भी रुक गई जिससे भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में बंटे हुए परिवार आते-जाते हैं.

भारतीय अधिकारियों का कहना है, "पाकिस्तान की तरफ़ से गेट नहीं खोला गया."

नवंबर 2003 में भारत और पाकिस्तान ने कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम किया था.

'संख्या अहम नहीं'

साल 2005 में भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के दोनों भागों में रह रहे हज़ारों बंटे हुए परिवारों को जोड़ने के लिए नियंत्रण रेखा के आर-पार आने जाने के रास्ते खोले गए थे. जबकि दिसंबर 2008 में पुंछ के चकां दा बाग़ और सलामाबाद से भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में व्यापार शुरू हुआ था.

इस व्यापार में इस्तेमाल होने वाली मुद्रा पर भारत और पाकिस्तान के बीच सहमति न बन पाने के कारण यह व्यापार वस्तुओं की अदला-बदली के आधार होता रहा है.

यह व्यापार हफ़्ते में चार दिन होता है और इसमें 600 ट्रक माल आता-जाता है. दोनों तरफ़ से मेवे, ताज़े फल, दस्तकारी और सब्ज़ियों जैसी 22 स्वीकृत वस्तुओं का व्यापार होता है.

जम्मू में व्यापारी संगठन के प्रमुख वी शर्मा कहते हैं, "इस व्यापार की संख्या इतनी महत्वपूर्ण नहीं है जितना इसका चलते रहना है."

दोनों ओर इस व्यापार को लेकर काफ़ी जोश था. इस व्यापार से भावनाएं तो जुड़ी ही हुई थीं इन पिछड़े इलाक़ों में आर्थिक लाभ के साथ-साथ रोज़गार के अवसरों की भी बात हो रही थी.

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