शशि थरूर की 'सार्वजनिक त्रासदी'

  • 18 जनवरी 2014
शशि थरूर

शशि थरूर विवादों के लिए अजनबी नहीं हैं, लेकिन सबसे ताज़ा विवाद सबसे दुखद रहा है.

संयुक्त राष्ट्र में पूर्व राजनयिक रहे और यूपीए सरकार में मंत्री शशि थरूर को 2009 में कुछ विवादित ट्वीटों के कारण पार्टी की फ़टकार पड़ी थी.

उस समय ट्विटर पर थरूर के एक लाख साठ हज़ार से ज़्यादा फ़ॉलोअर थे और बहुत से लोग मज़ाक में उन्हें 'ट्वीटर मिनिस्टर' कहते थे.

अगले साल जब ट्विटर पर उनके करीब सात लाख फ़ॉलोअर हो गए, तब थरूर एक और विवाद में फँस गए और इस बार उन्हें अपना मंत्री पद गंवाना पड़ा.

उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग में एक नई टीम की नीलामी में अपनी भूमिका को लेकर हुए विवाद के कारण विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा. टूर्नामेंट वैसे भी विवादों के घेरे में थे जिससे थरूर के लिए मुश्किलों को और बढ़ा दिया. हालाँकि थरूर हमेशा अपनी भूमिका को लेकर लगे आरोपों को नकारते रहे.

लोकप्रियता

2009 लोकसभा चुनावों में थरूर ने अपने राजनीतिक करियर का शानदार आग़ाज़ किया था और सरकार में शामिल हुए थे. भारत के बुज़ुर्ग राजनीतिक तंत्र में तब लगभग पचास साल के रहे शशि थरूर का युवा, प्रतिभाशाली, ऊर्जावान नेता के रूप में स्वागत किया गया था.

सुनंदा के शव पर चोटों के निशानः एम्स

शशि थरूर सुनंदा पुष्कर

उनके समर्थकों के मुताबिक वे एक अपरंपरागत नेता, मेहनती, घुमक्कड़ और सोशल मीडिया के ज़रिए हर समय लोगों के संपर्क में रहने वाले थे.

उनकी बोलने की कला ने उन्हें अंग्रेज़ी टीवी चैनलों पर बेहद लोकप्रिय बना दिया. वे नियमित रूप से विभिन्न विषयों पर अख़बारों में नियमित स्तंभ और किताबें भी लिखते थे.

बीबीसी के लिए जब भी मैंने उनसे कुछ लिखने का आग्रह किया तो उन्होंने हमेशा एक तर्कशील लेख लिखा. एक लेख में उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कार्यशैली का बचाव किया और एक अन्य लेख में सचिन तेंदुलकर के संन्यास के बाद भारतीय क्रिकेट पर अपनी राय ज़ाहिर की. अपने बेहद व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उन्होंने हमेशा अपने लेख निश्चित समयसीमा से पहले भेजे.

साल 2009 के उस छोटे से विवाद के चार साल बाद शशि थरूर ने सरकार ने मानव संसाधन मंत्रालय में राज्यमंत्री बनकर वापसी की. तब तक ट्विटर पर उनसे बीस लाख लोग जुड़ चुके थे. लेकिन उनके जीवन अब जो दर्दनाक मोड़ आया है उसकी तुलना अन्य परेशानियों से नहीं की जा सकती है.

'जो ट्विटर पर जीते हैं वो ट्विटर पर ही मरते हैं'

विवाद

उनकी पत्नी और दुबई में महिला कारोबारी रहीं सुनंदा पुष्कर ट्विटर पर हुए एक विवाद के बाद दिल्ली के एक होटल में मृत पाई गई. इस ट्विटर विवाद से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि थरूर और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के बीच अफ़ेयर हैं. हालाँकि थरूर और तरार दोनों ने ही अफ़ेयर की बात को नकार दिया है.

सुनंदा पुष्कर ने शुरुआत में टीवी चैनलों और अख़बारों से कहा था कि उनके पति और तरार के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा है और वे तलाक लेने की योजना बना रही हैं. हालांकि बाद में सुनंदा इन बयानों से पीछे हट गईं और शशि थरूर के साथ एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ''वे दोनों अपनी शादीशुदा ज़िंदगी से खुश हैं और वैसे ही रहना चाहते हैं.''

सुनंदा ने ट्वीट किया था-हँसते हुए जाएंगे

2010 में शादी के बाद से ही ये जोड़ी हमेशा चर्चा में रही और इनसे जुड़ी ख़बरें अख़बारों के पेज थ्री पर प्रकाशित होती रहीं. उनके दोस्तों का कहना था कि वे एक दूसरे से बेहद प्यार करते हैं और एक आदर्श जोड़ी हैं.

जब एक पारंपरिक कथा बुरा मोड़ लेती है तब मीडिया निर्दयी जानवर बन सकता है. ऐसी ख़बरें हैं कि कुछ समय के लिए दोनों के बीच रिश्ते ख़राब हो गए थे और विभिन्न बीमारियों के लिए सुनंदा का इलाज चल रहा था. और इस बात को लेकर हमेशा ही बातें होती रही हैं कि ट्विटर कैसे शशि थरूर के जीवन में मुश्किलें पैदा करता रहा है.

अब कुछ आँखे भिगो देने वाले शीर्षक भी दिए गए हैं, जैसे "आधुनिक रोमांस का दुखांत". एक और शीर्षक कहता है, "किस, ट्वीट्स और उतार-चढ़ाव का संगम."

शशि थरूरः दो सीढ़ी ऊपर चार सीढ़ी नीचे

सोशल मीडिया की त्रासदी

शशि थरूर सुनंदा पुष्कर

ट्विटर पर सक्रिय लोगों का थरूर के बारे में उत्सुक होना कोई हैरत की बात नहीं है. जब यह विवाद शुरू हुआ तब मैंने एक ट्वीट देखी जिसमें कहा गया था कि उनके विवाह का ट्विटर पर अंत हो रहा है. एक अन्य ट्वीट में कहा गया कि जो लोग ट्विटर पर जीते हैं वे ट्विटर पर ही मरते हैं. लेखक सुकेतु मेहता ने ट्वीट किया, "सुनंदा की मौत ट्विटर द्वारा किया गया क़त्ल है."

लेकिन सोशल मीडिया को इस त्रासदी के लिए ज़िम्मेदार ठहराना अतिशयोक्ति होगा. दिल्ली के होटल के कमरे में शुक्रवार को जो भी हुआ उसे पुलिस जाँच पर छोड़ देना चाहिए.

टाइम पत्रिका से जुड़े शशि थरूर के पत्रकार बेटे का लोगों से परिवार की निजता का सम्मान करने का आग्रह सही है. लेकिन शशि थरूर और सुनंदा पुष्कर सोशल मीडिया की जिस नाज़ुक दनिया पर सक्रिय थे, उसमें यह हो पाएगा या नहीं, यह एक बहस का विषय है.

लेकिन यह साफ़ है कि इसका असर शशि थरूर के राजनीतिक करयिर पर ज़रूर होगा. उनकी पार्टी अगले कुछ महीनों में होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारी कर रही है.

थरूर केरल की अपनी लोकसभा में बेहद सक्रिय रहे हैं. उनके एक समर्थक ने ट्वीट कर कहा है कि इस हादसे कुछ नहीं बदलेगा. लेकिन सवाल ये है कि क्या उनकी पार्टी उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाएगी?

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