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मोबाइल से आपके घर आएगी सरकार

 बुधवार, 15 जनवरी, 2014 को 06:53 IST तक के समाचार
मोबाइल इंडियन

अगर आपने घंटों लाइन में लगकर और सरकारी दफ़्तरों के चक्कर काटकर पासपोर्ट बनवाया है तो इस ख़बर को पढ़कर आपको हैरानी हो सकती है. क्या आप जानते हैं कि पासपोर्ट जैसे संवेदनशील दस्तावेज़ का आवेदन आप अपने सोफ़े पर आराम से बैठकर एक ऐप के माध्यम से कर सकते थे.

मोबाइल-गवर्नेंस योजनाओं की देख-रेख करने वाले इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त सचिव डॉक्टर राजेंद्र कुमार का कहना है कि सिर्फ पासपोर्ट ही नहीं कई अहम सरकारी दस्तावेज़ों और पहचान पत्रों के लिए लोग मोबाइल पर आवेदन कर सकते हैं.

लेकिन ऐसी किसी सेवा का फ़ायदा क्या जिसके बारे में लोगों को पता ही न हों?

यही सवाल हमने डॉक्टर राजेंद्र कुमार से पूछा जिसके जवाब में उन्होंने कहा, “हमने ई-गवर्नेंस पर काफ़ी काम किया है, लेकिन ये सही बात है कि हमारे योजनाओं की जानकारी लोगों तक सुचारू रूप से नहीं पहुंच पाई. इस दिशा में हम लगातार कदम उठा रहे हैं.”

मोबाइल इंडियन सिरीज़ के अंतर्गत डॉक्टर राजेंद्र कुमार ने बीबीसी हिन्दी के फ़ेसबुक यूज़र्स के कई सवालों का जवाब दिया.

क्लिक करें (देखिए: डॉक्टर राजेंद्र कुमार से फ़ेसबुक चैट)

डॉक्टर राजेंद्र कुमार के अनुसार ई-गवर्नेंस की भारत में पहुंच करीब साढ़े चार करोड़ लोगों तक है, हालांकि भारत में इससे कही अधिक पहुंच की गुंजाइश है.

ट्राई के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 87 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता हैं, जबकि डेस्कटॉप और मोबाइल फ़ोन यूज़र्स मिला दिए जाएं तो 15 करोड़ लोग इंटरनेट का प्रयोग करते हैं.

क्या है मोबाइल गवर्नेंस?

मोबाइल-गवर्नेंस के अंतर्गत मोबाइल फ़ोन के ज़रिए ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक सरकारी योजनाओं और उनसे जुड़ी जानकारियों को पहुंचाने की कोशिश की जाती है.

मोबाइल दूर-दराज के इलाकों और गांवों में भी अब आम हो चले हैं, इसलिए इसके ज़रिए लोगों तक सुविधाएं पहुंचाना पहले के मुकाबले काफ़ी आसान हो गया है.

सूचना के अधिकार की जानकारी, आधार कार्ड और बैंक से संबंधित जानकारियां, वोटर आई डी बनवाने के लिए जानकारियां, यहां तक कि नरेगा से संबंधित जानकारी भी मोबाइल के ज़रिए लोगों तक पहुंचाई जा रही है.

सरकार का दावा है कि भारत में मोबाइल के माध्यम से रोज़ाना 30 लाख लोगों तक सरकारी सेवाएं पहुंचती हैं.

राजेंद्र कुमार, संयुक्त सचिव, भारत सरकार

भारत सरकार ने पिछले साल क्लिक करें अपना ऐप स्टोर लॉन्च किया जिसमें फ़िलहाल 272 लाइव ऐप हैं और 61 अन्य ऐप ट्रायल पर हैं.

विभिन्न भाषाओं में ट्रांसलेट करने वाले ऐप से लेकर, प्रमुख कानूनी मामलों और प्रक्रियाओं, भारतीय पोस्ट, स्वास्थ्य, मतदान संबंधी और आधार कार्ड से संबंधित ऐप इस ऐप स्टोर में उपलब्ध हैं.

फिलहाल ये सभी ऐप एंड्रॉएड या जावा वर्ज़न में उपलब्ध हैं लेकिन डॉक्टर राजेंद्र कुमार के मुताबिक आने वाले समय में ऐपल और विंडोज़ जैसे अन्य ऑपरेटिंग सिस्टमों पर भी ये ऐप लॉन्च किए जाएंगे.

मोबाइल पर क्या-क्या जानकारी मिलेगी?

  • मोबाइल के ज़रिए पासपोर्ट का आवेदन कर सकेंगे.
  • चुनिंदा राज्यों में वोटर कार्ड रजिस्ट्रेशन की जानकारी
  • सूचना का अधिकार कानून और लोक सूचना अधिकारियों के संपर्क संबंधी जानकारी
  • विभिन्न मंत्रालयों की टेलीफ़ोन डायरेक्टरी, हालांकि सूची से कई मंत्रालय गायब हैं. जोड़े जा रहे हैं.
  • आधार कार्ड को बैंक खाते से जोड़ने संबंधी जानकारी
  • अंग्रेज़ी या हिंदी से दूसरी भाषाओं में अनुवाद करने वाला ऐप
  • खेती संबंधी जानकारी गांवों में पहुंचाने के लिए ऐप
  • भारत के अलग-अलग हाईकोर्ट की सुनवाई और अहम आदेशों की जानकारी
  • भारतीय पोस्ट संबंधी जानकारी – लाइव ट्रैकिंग
मोबाइल इंडियन

भारत सरकार के ऐप स्टोर, ‘मोबाइल सेवा’ में इसके अलावा भी कई तरह के ऐप मौजूद हैं

क्या हैं एम-गवर्नेंस की चुनौतियां?

डॉक्टर राजेंद्र कुमार के अनुसार सबसे बड़ी चुनौती तो यही है कि सभी सरकारी विभागों का अपना खुद का डाटाबेस तैयार हो. सभी जानकारी और सरकारी रिकॉर्ड कंप्यूटर पर दर्ज होना चाहिए ताकि जानकारी तक आसानी से पहुंचा जा सके.

राजेंद्र कुमार कहते हैं, “हमारी टीम विभिन्न सरकारी विभागों और दफ़्तरों से संपर्क करती है और पूछती है कि वो सभी रिकॉर्ड डाटाबेस में दर्ज कर रहे हैं कि नहीं. अगर ऐसा नहीं होता है तो हम उन्हें ट्रेनिंग देते हैं ताकि रिकॉर्ड कंप्यूटरों में दर्ज हो.”

इंटरनेट, गूगल

सरकार मोबाइल फ़ोन के ज़रिए ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचना तो चाहती है, लेकिन अब भी देश के कई इलाकों में इंटरनेट सेवा काफ़ी कमज़ोर है.

स्मार्टफ़ोन की बिक्री काफ़ी तेज़ी से बढ़ रही है लेकिन ऐसा शहरों और विकसित राज्यों में ज़्यादा होता है. ग्रामीण इलाकों में मोबाइल इंटरनेट का प्रयोग अभी तक उतना आसान नहीं है.

डॉक्टर कुमार के अनुसार इन सब चुनौतियों के अलावा ये भी काफ़ी ज़रूरी होता है कि राज्य सरकारें अपने कामकाज की नीतियों में थोड़ी नरमी रखें ताकि उन्हें ई-गवर्नेंस के लिए तैयार किया जा सके.

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ये सिरीज़ बीबीसी हिन्दी और अमर उजाला डॉट कॉम की संयुक्त पेशकश है.

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