पोलियोमुक्त होने की ओर भारत का बड़ा कदम

  • 13 जनवरी 2014
पोलियो, भारत

भारत में पोलियो का आखिरी मामला सामने आए तीन साल हो चुके हैं. इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है.

भारत ने ये सफलता बड़े पैमाने पर लगातार टीकाकरण कार्यक्रम चलाकर हासिल की है.

भारत में साल 2011 में पोलियो का सिर्फ़ एक मामला सामने आया था जबकि साल 2009 में ये आंकड़ा 741 था.

बीते साल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत को उन देशों की सूची से हटा दिया था जहां पोलियो का प्रभाव है. पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और नाइजीरिया में अब भी बड़े पैमाने पर पोलियो के मामले सामने आते हैं.

ये वो देश हैं जहां पोलियो वाइरस का संचरण हो रहा है और पोलियो को फैलाव को रोका नहीं जा सका है.

ख़बरों के मुताबिक हालांकि भारत सरकार देश को सोमवार को पोलियोमुक्त घोषित कर देगी, विश्व स्वास्थ्य संगठन भारत के इस दर्जे पर 11 फ़रवरी को ही मुहर लगाएगा जब वो कुछ आखिरी नमूनों की जांच कर चुका होगा.

'बड़ा मुकाम'

विश्व स्वास्थ्य संगठन
पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, सोमालिया और नाइजीरिया जैसे देशों से पोलियो मिटाना अब भी बड़ी चुनौती है.

विश्व पोलियो उन्मूलन अभियान ने एक बयान में कहा है, "भारत 13 जनवरी को पोलियो को जड़ से मिटाने की दिशा में एक बड़ा मुकाम हासिल कर लेगा - 13 जनवरी को पोलियो का आखिरी मामला सामने आए तीन साल बीत चुके हैं. कभी भारत को उन देशों में गिना जाता था जहां पोलियो को जड़ से मिटाना बेहद मुश्किल माना जाता था.

भारत ने साल 1980 में स्मॉलपॉक्स यानी चेचक को जड़ से मिटा दिया था, इसके बाद पोलियो दूसरी ऐसी बीमारी है जिसे टीकाकरण के ज़रिए मिटाया गया है.

भारत में पोलियो टीकाकरण के हर दौर में 24 लाख से ज़्यादा स्वयंसेवक 17 करोड़ से ज़्यादा बच्चों को पोलियो का टीका देते हैं.

पोलियो की वजह से विकलांगता या मौत भी हो सकती है. इसने प्राचीन समय में कई समाजों को शिकार बनाया और इसका प्रभाव 1980 के दशक तक 100 से ज़्यादा देशों में था, जिससे हर साल साढ़े तीन लाख लोग विकलांग हो जाते थे.

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