'निर्भीक' से बनेंगी महिलाएं 'निर्भया'?

  • 13 जनवरी 2014
निर्भिक रिवॉल्वर, कानपुर

कानपुर की फ़ील्ड गन फ़ैक्ट्री ने एक हल्का रिवॉल्वर ईजाद किया है जो महिलाओं की आत्मसुरक्षा के लिए ज़्यादा कारगर सिद्ध हो सकता है. इस रिवॉल्वर को नाम दिया गया है 'निर्भीक'.

इस रिवॉल्वर का वजन करीब 500 ग्राम है, जो किसी औसत रिवॉल्वर या पिस्तौल से करीब 250 ग्राम कम है. यह आसानी से किसी महिला के पर्स या हैंडबैग में आ सकता है.

फ़ील्ड गन फ़ैक्ट्री के जनरल मैनेजर अब्दुल हमीद ने बीबीसी को बताया, "हम हमेशा ही अस्त्रों के निर्माण का काम करते रहते हैं. हम एक हल्का रिवॉल्वर बनाने पर काम कर रहे थे. 16 दिसंबर, 2012 की घटना के बाद हमने अपने काम को तेज़ी दी. घटना के बाद हमने सोचा कि ऐसा रिवॉल्वर बनाया जाए जिसे महिलाएं आसानी से आत्मसुरक्षा के लिए इस्तेमाल कर सकें."

दिल्ली में 16 दिसंबर, 2012 की रातएक चलती बस में एक 23 वर्षीय महिला के साथ सामूहिक बलात्कार और उसके बाद अस्पताल में उसकी मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. तब से महिलाओं की सुरक्षाएक बड़ा मुद्दा बना हुआ है.

मारक क्षमता पर असर नहीं

दूसरे रिवॉल्वरों की तरह से निर्भीक में भी छह गोलियां लोड की जाती हैं और ये 15 मीटर तक मार कर सकती है.

अब्दुल हमीद ने बताया, "रिवॉल्वर महिलाओं को ध्यान में रख कर हल्का बनाया गया है. अमूमन रिवॉल्वर के निर्माण में स्टील के एलॉय का प्रयोग होता है. हमने निर्भीक के निर्माण में टाइटेनियम के एलॉय का इस्तेमाल किया जिसकी वजह से रिवॉल्वर का वज़न कम हो गया लेकिन उसकी मारक क्षमता में कोई कमी नहीं आई है."

कानपुर की फ़ील्ड गन फ़ैक्ट्री भारतीय आयुध निर्माणियों की कई इकाइयों में से एक है. कानपुर में ही भारतीय आयुध निर्माण की एक दूसरी इकाई स्माल आर्म्स फैक्ट्री 'अनमोल' नाम का एक रिवॉल्वर आम लोगों के लिए बनाती है. अनमोल का वजन 750 ग्राम है, जबकि 'निर्भीक' का वजन 525 ग्राम है.

दिल्ली, बलात्कार, विरोध प्रदर्शन

अब्दुल हमीद के अनुसार 'निर्भीक' की सारी टेस्टिंग हो चुकी है. उन्होंने बताया, "टेस्टिंग के दौरान महिलाओं ने इसे इस्तेमाल किया है और उपयुक्त पाया है. इस साल अप्रैल के महीने से यह लोगों को मिलनी शुरू हो जाएगी."

अप्रैल से बाज़ार में

अभी यह बाज़ार में उपलब्ध नहीं है लेकिन इस रिवॉल्वर के बारे में लोगों की जिज्ञासा काफी बढ़ गई है.

हमीद ने बताया, "काफ़ी लोग, ख़ासकर महिलाएं हमसे निर्भीक के बारे में पूछ चुकी हैं और उसे खरीदना चाहती हैं. एक आम आदमी को निर्भीक के लिए करीब 1.25 लाख रुपए देने होंगे."

अब्दुल हमीद मानते हैं कि 'निर्भीक' के इस्तेमाल से 16 दिसंबर, 2012 की रात जैसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी.

हालांकि कानपुर में तैनात वरिष्ठ पुलिस अधिकारी यशस्वी यादव किसी भी प्रकार के शस्त्र के आम उपयोग के खिलाफ हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "मैं इस बात के सख़्त ख़िलाफ़ हूं कि 'निर्भीक' या किसी भी रिवॉल्वर को आम आदमी को आँख बंद कर के मुहैया करा दिया जाए. एक रिवॉल्वर चलाने के लिए आदमी को प्रशिक्षित होना चाहिए. हर आदमी को रिवॉल्वर या पिस्टल नहीं दे दिया जाना चाहिए."

महिलाओं को इंतज़ार

महिला मंच नाम का एक सामाजिक संस्थान चलाने वाली नीलम चतुर्वेदी कहती हैं, "हथियार होना या मार्शल आर्ट सीखना महिलाओं के लिए ठीक तो है पर कुछ हद तक. समाज को महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलनी पड़ेगी."

हालांकि कुछ महिलाओं में अभी भी रिवॉल्वर के प्रयोग को लेकर हिचक क़ायम है.

कानपुर के एक पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल ऋतु चित्रांशी कहती हैं, "अगर कभी ज़रूरत पड़ी तो रिवॉल्वर के बदले मैं पेप्पर स्प्रे रखूंगी. एक आम महिला के लिए रिवॉल्वर संभाल कर रखना आसान नहीं है. दूसरी बात - कोई महिला अपने बचाव के लिए के लिए भी रिवॉल्वर इस्तेमाल करेगी तो भी कानून के घेरे में आ सकती है."

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