BBC navigation

अमरीका में बर्फ़ का कहर और एक भारतीय लड़की

 रविवार, 12 जनवरी, 2014 को 11:00 IST तक के समाचार
याशिका

राजस्थान जैसे गर्म प्रदेश की रहने वाली याशिका को उस बर्फीले तूफ़ान 'पोलर वॉर्टेक्स' का सामना करना पड़ा जिससे पूरा अमरीका करीब चार दिनों तक थम गया और इक्कीस लोगों की जान चली गई.

याशिका ने इससे पहले इतनी सर्दी का सामना कभी नहीं किया था. अमरीकी सरकार की ओर से मिल रही चेतावनियों और तापमान के गिरने के अनुमानों को देख कर उन्हें डर लग रहा था.

इस ध्रुवीय तूफ़ान (पोलर वॉर्टेक्स) की वजह से अमरीका में तापमान शून्य से करीब 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे तक चला गया था. पिछले 20 साल में अमरीका में ऐसा कभी नहीं हुआ था.

गर्म पानी के साथ प्रयोग

शिकागो में रह रहीं याशिका बताती हैं, "बाहर इतना क्लिक करें बर्फीला तूफ़ान चल रहा था कि हम एक तरह से घर में क़ैद हो गए थे. मैं चार दिन तक अपने घर का दरवाज़ा भी नहीं खोल पाई. चार दिन तक घर पर समय काटना मुश्किल हो रहा था. मैंने टीवी देखा तो उस पर एक प्रयोग के बारे में बताया जा रहा था."

पोलर वर्टेक्स

टीवी पर गर्म पानी को खिड़की से बाहर फेंकने के प्रयोग के बारे में बताया जा रहा था.

याशिका ने बताया, "टीवी पर बताया जा रहा था कि आप जैसे ही गर्म पानी को खिड़की से बाहर फेंकेगे वो सेकेंडों में धुआँ बन जाएगा. मैंने जब यह यह प्रयोग किया तो एक सेकेंड से भी कम समय में उबलता हुआ गर्म पानी बर्फ बनकर हवा के साथ मेरे मुँह पर आ गया.

वह कहती हैं, "यह बहुत रोमांचक था. मैंने इसका क्लिक करें एक वीडियो बना कर इंटरनेट पर भी डाला."

वह कहती हैं कि जब उनके दोस्तों ने केले को कुछ सेकेंड के लिए ही बाहर रखा तो वह इतना सख्त हो गया कि उसे मेज पर मारने से टक-टक की आवाज़ आ रही थी. कुछ लोगों ने पानी की बोतल के साथ प्रयोग किया जो चंद सेकेंड में बर्फ़ बन गई.

वह कहती हैं, "मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं सबसे तेज़ बर्फ जमाने वाले फ्रिज के फ्रीज़र में बैठी हूँ."

अमरीका में इस क्लिक करें बर्फीले तूफ़ान की वजह से लगभग ग्यारह हज़ार से ज्य़ादा उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं.

'जान भी जा सकती है'

पोलर वर्टेक्स

शिकागो में भी बर्फ़ के तूफ़ान की वजह से घर, गाड़ियां, पेड़ सब बर्फ़ से ढक गए थे.

याशिका कहती हैं, "मैं यहाँ राजस्थान से आई थी और मुझे आम तौर पर 40 से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान में रहने की आदत है. अचानक मेरा यहाँ आना हुआ और मेरे आते ही यहाँ पोलर वॉर्टेक्स आ गया."

उन्होंने कहा, "मेरे लिए और मेरे जैसे गर्म प्रदेशों से आए लोगों के लिए यह बहुत मुश्किल समय था. मुझे ऐसे तापमान में रहने की बिल्कुल आदत नहीं थी."

शिकागो में भी बर्फ़ के तूफ़ान की वजह से घर, गाड़ियां, पेड़ सब बर्फ़ से ढक गए थे और पानी के पाइप इतना कम तापमान नहीं झेल पाए.

क्लिक करें मौसम का जादू या कु़दरत का क़हर

याशिका बताती हैं, "अमरीका में घर में आग लगने पर बचने के लिए हर कमरे में पानी के पाइप होते हैं. यह आग लगते ही सभी कमरों में पानी के फव्वारे छोड़ने के लिए होते हैं. कुछ कमरों में पाइप ठंड झेल नहीं पाए और फट गए. इससे कमरों में पानी भर गया."

याशिका याद करते हुए कहती हैं, "यह पोलर वॉर्टेक्स के तीसरे दिन रात तीन बजे हुआ और फिर फ़ायर ब्रिगेड डिपार्टमेंट के लोग आए उन्होंने ठीक किया. रात भर काम चला और हमें दूसरी जगह शिफ़्ट किया गया. इससे काफ़ी परेशानी हुई. पानी की सप्लाई में भी फिर दिक्कत आई."

मेडिकल बीमा की दिक्कतें

पोलर वॉर्टेक्स

अमरीकी प्रशासन ने पोलर वॉर्टेक्स आने से कुछ समय पहले ही लोगों के लिए चेतावनी जारी की थी.

याशिका ने कहा,"यह अच्छा हुआ कि मैं बीमार नहीं हुई. यहाँ पर दूसरे देशों से आकर रहने वालों के मेडिकल बीमा में बहुत दिक्कतें हैं. भारत से आते समय ही मैं अपने साथ काफी सारी छोटी-मोटी परेशानियों की दवाइयां ले आई थी. यहाँ उन दवाइयों के लिए भी डॉक्टर से लिखवाना होता है जो भारत में दवा की दुकान पर आसानी से मिल जाती हैं. "

अमरीका में अधिकतर घरों में घर को गर्म रखने के लिए विशेष व्यवस्था होती है. सभी कमरों में एसी की तरह हीटिंग सिस्टम भी होता है.

उन्होंने बताया, "हमारा हीटिंग सिस्टम ठीक से काम कर रहा था. लेकिन जिन इलाकों में बिजली चली गई वहाँ बहुत दिक्कत आई."

अमरीकी प्रशासन ने पोलर वॉर्टेक्स आने से कुछ समय पहले ही सभी लोगों के लिए चेतावनी जारी की थी.

याशिका ने कहा,"चेतावनियों में यह लिखा गया था कि अगर आप कुछ मिनट भी बाहर रहेंगे तो आपकी त्वचा जम सकती है, आपको हायपोथर्मिया (शरीर का तापमान बहुत कम होना) हो सकता है और आपकी जान भी जा सकती है."

ऐसी चेतावनियाँ मिलने पर याशिका के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे थे.

याशिका कहती हैं, "तूफ़ान आने से पहले मुझे पता नहीं था कि ऐसी ठंड कैसी होती है. मुझे तो 40 डिग्री से नीचे तापमान जाने की सोच कर ही दहशत हो रही थी."

याशिका ने मौसम विभाग और सरकार की तरफ से की गई घोषणाओं के बारे में सुन कर पहले ही खाने-पीने का सामान इकठ्ठा करके रख लिया था.

याशिका कहती हैं, "बस अब यह समय गुज़र गया है. तापमान शुक्रवार को पहली बार एक डिग्री सेल्सियस से ऊपर आया. अब सामान भी ख़त्म हो रहा है. अब तो बाहर जाना ही पड़ेगा."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए क्लिक करें यहां क्लिक करें. आप हमें क्लिक करें फ़ेसबुक और क्लिक करें ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

इसे भी पढ़ें

टॉपिक

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.