सड़क पर होगी शिकायतों की सुनवाई: केजरीवाल

  • 9 जनवरी 2014
अरविंद केजरीवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायतों की सुनवाई खुले में होगी.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि लोगों की शिकायतों की सुनवाई सरकार सचिवालय के सामने वाली सड़क पर करेगी ताकि लोगों को प्रशासन तक पहुंचने में कोई दिक्क़त न हो.

एक प्रेस वार्ता के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि समस्याओं की सुनवाई के लिए वो अपने मंत्रियों के साथ बैठेंगे.

उन्होंने कहा कि इसके बाद समस्याओं की श्रेणी के अनुसार उनका समाधान किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि लोगों की शिकायतें तो केवल समस्या का लक्षण हैं. समस्याओं के समाधान के लिए दिल्ली सरकार के सभी मंत्री शनिवार को सचिवालय के सामने बैठेंगे.

शिकायत की सुनवाई रोज़ाना सुबह साढ़े नौ से दो घंटे के लिए होगी. इसके अलावा हर विभाग का एक मंत्री रोज़ाना सचिवालय के सामने बैठकर लोगों की समस्याओं की सुनवाई करेंगे. इसके बाद तात्कालिक आवश्यकता और शिकायत की श्रेणी के आधार पर उनका समाधान किया जाएगा.

शिकायतों की श्रेणी

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायतों के निपटारे के लिए पाँच श्रेणियां बनाई जाएंगी. पहली श्रेणी तात्कालिक जरूरत की होगी. दूसरी नीतियों से संबंधित, तीसरी श्रेणी सुझावों की होगी, चौथी श्रेणी दूसरे क़िस्म की शिकायतों के लिए होगा.

उनके मुताबिक़ पाँचवी श्रेणी में उन शिकायतों को रखा जाएगा, जिनका सीधा संबंध सरकार से नहीं है. पाँचवीं श्रेणी वाली शिकायतों का हल आपसी बातचीत के जरिए किया जाएगा.

उन्होंने शिकायतों के समाधान पर नज़र ऱखने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम बनाने की बात भी कही.

लोगों की समस्या का समाधान होने के बाद विभाग की तरफ़ से उनको एक एसएमस भेजा जाएगा कि अगर आप अभी भी संतुष्ट नहीं हैं तो जवाब में नहीं लिखकर भेजिए.

जो समस्या के निपटारे से संतुष्ट नहीं होंगे उनसे पार्टी के स्वयंसेवक व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे. इस मामले में संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जन शिकायतों की व्यवस्था शनिवार से लागू होगी. मुख्यमंत्री उस दिन अपने सभी मंत्रियों के साथ सचिवालय के सामने लोगों की शिकायतों की सुनवाई करेंगे.

तय समय सीमा

केजरीवाल की टीम
उन्होंने कहा कि लोगों की शिकायतों को सुनने में स्वयं सेवकों की मदद ली जाएगी.

उन्होंने माना कि हो सकता है कि लोग शिकायतों के समाधान से पूरी तरह संतुष्ट न हों क्योंकि यह एक शुरूआत है.

जब उनसे पूछा गया कि प्रशासन उन विभागों के बारे में क्या करेगा जो सीधे दिल्ली सरकार के अधीन नहीं तो उन्होंने कहा कि इसके लिए उप राज्यपाल से बात हो गई है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि डीडीए, एमसीडी और दिल्ली पुलिस के सिलसिले में उन्होंने उप-राज्यपाल ने उन्हें ख़त भेजा है. इस मामले में संबंधित विभाग के अधिकारियों को समस्याओं के निपटारे के लिए मौके पर उपस्थित होना होगा.

जन लोकपाल का मसौदा तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है. इसमें क़ानून, शहरी विकास, वित्त विभाग के सचिव समिति के सदस्य होंगे.

कहाँ है कॉल सेंटर?

उन्होंने कहा कि बुधवार को स्टिंग मामले में करीब 39,00 फ़ोन कॉल्स आईं जिनमें 53 गंभीर किस्म के हैं. इसमें से 38 लोगों ने स्टिंग करके लाने की बात कही है. लोगों को जारी किए गए हेल्पलाइन से जरूरी सलाह मिल रही है.

मुख्यमंत्री ने कॉल सेंटर के बारे में जानकारी गुप्त रखने के बारे में कहा कि अगर लोगों को पता चल जाता है तो भ्रष्ट अधिकारी वहीं जाकर बैठेंगे.

अपने ख़िलाफ़ आने वाली शिकायतों को दबाने की कोशिश कर सकते हैं. इस कारण से उसके संबंध में जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है.

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